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जौहर यूनिवर्सिटी पर रोक लगाने वाले IAS आंजनेय सिंह की यूपी से विदाई, लौटेंगे सिक्किम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया है। प्रदेश सरकार ने रविवार देर रात 17 अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया। इस फेरबदल में सबसे अधिक चर्चा मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त रहे 2005 बैच के आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह की रही। सात बार सेवा विस्तार पा चुके आंजनेय सिंह को इस बार आठवां विस्तार नहीं मिला। शासन ने उन्हें उत्तर प्रदेश से कार्यमुक्त कर उनके मूल कैडर सिक्किम वापस भेज दिया है। आंजनेय की जगह अलीगढ़ की मंडलायुक्त संगीता सिंह को मुरादाबाद मंडल का नया मंडलायुक्त बनाया गया है।

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आंजनेय कुमार सिंह की यूपी से विदाई ऐसे समय हुई है, जब रामपुर की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसी साल जुलाई में मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत में उन्होंने रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी।

Anjaneya Kumar Singh

आरडीए ने विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण बताते हुए उन्हें गिराने का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ विश्वविद्यालय की ओर से अपील की गई थी।

38 भवनों पर ध्वस्तीकरण का आदेश

रामपुर के जिलाधिकारी और आरडीए के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने 15 जुलाई को जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को ध्वस्त करने का आदेश जारी किया था। प्राधिकरण का कहना था कि, इन भवनों के निर्माण तय मानकों स्वीकृत भवन मानचित्र उपलब्ध नहीं थे। विश्वविद्यालय को इन संरचनाओं को निर्धारित अवधि में हटाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों और समर्थकों का विरोध शुरू हो गया। छात्रों ने धरना भी दिया और मामला प्रशासनिक अपील के जरिए मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत तक पहुंचा।

ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर लगाई थी रोक

मुरादाबाद के मंडलायुक्त होने के साथ आंजनेय कुमार सिंह आरडीए के अध्यक्ष और इस मामले में अपीलीय प्राधिकारी भी थे। 27 जुलाई को उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि, मामले की सुनवाई पूरी होने तक भवनों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

इसके बाद मामले में कई तारीखें पड़ीं। अगस्त में भी रोक जारी रही। 14 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक मंडलायुक्त की अदालत ने दोनों पक्षों को आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए थे और अगली सुनवाई 25 अगस्त निर्धारित की गई थी। यानी आंजनेय सिंह को कार्यमुक्त किए जाने के समय यह प्रकरण अभी विचाराधीन था।

 क्या टेढ़ी हुईं योगी सरकार की भौहें?

आंजनेय सिंह को आठवां सेवा विस्तार नहीं मिलने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक चर्चा यह भी है कि, जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाए जाने से सरकार के स्तर पर नाराजगी थी। हालांकि, शासन की तरफ से जारी तबादला या कार्यमुक्ति आदेश में ऐसी किसी नाराजगी का जिक्र सा र्वजनिक रूप से नहीं किया गया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार आंजनेय सिंह की यूपी में प्रतिनियुक्ति 14 अगस्त 2026 को समाप्त हो गई थी। इसके बाद वे अवकाश पर चले गए थे। पिछले वर्षों में प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें विस्तार मिलता रहा था, इसलिए इस बार भी प्रशासनिक गलियारों में आठवें विस्तार की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन 23 अगस्त की देर रात जारी आदेश के साथ इन अटकलों पर विराम लग गया।

जौहर यूनिवर्सिटी प्रकरण और आंजनेय सिंह की विदाई के बीच संबंध को फिलहाल आधिकारिक तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि प्रशासनिक हलकों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए। सरकार के आदेश का घोषित आधार उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि का समाप्त होना और उन्हें मूल कैडर के लिए कार्यमुक्त किया जाना है।

सात बार मिला सेवा विस्तार

आंजनेय कुमार सिंह सिक्किम कैडर के 2005 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वह 15 फरवरी 2015 को प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए थे। यूपी में अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।

फतेहपुर, बुलंदशहर और रामपुर के जिलाधिकारी रहने के बाद उन्हें मुरादाबाद मंडल का मंडलायुक्त बनाया गया। मार्च 2021 से वह लगातार मुरादाबाद मंडल के मंडलायुक्त पद पर रहे। उनका करीब साढ़े पांच साल का कार्यकाल मंडलायुक्त के पद पर रहा, जिसे प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य रूप से लंबा कार्यकाल माना जा रहा है।

प्रतिनियुक्ति की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें कई बार विस्तार मिला। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें कुल सात बार सेवा विस्तार दिया गया। उनका सातवां विस्तार 14 अगस्त 2026 तक था। इस दौरान उनके कार्यकाल को लेकर हर बार शासन स्तर पर चर्चाएं होती रहीं और विस्तार मिलता रहा। इस बार आठवां विस्तार नहीं मिलने से उत्तर प्रदेश में उनकी लंबी प्रशासनिक पारी समाप्त हो गई।

 आजम खान से जुड़े मामलों से आये चर्चा में

आंजनेय कुमार सिंह का नाम उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक रामपुर के जिलाधिकारी रहते हुए चर्चा में आया। रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनसे जुड़े संस्थानों के खिलाफ हुई प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान वह जिले के डीएम थे।

Anjaneya Kumar Singh

जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े जमीन, निर्माण और प्रशासनिक मामलों में जिला प्रशासन की कार्रवाई ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में चर्चित अधिकारी बना दिया था। बाद में मुरादाबाद मंडलायुक्त के रूप में भी रामपुर उनके प्रशासनिक क्षेत्र में रहा। जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर आरडीए के ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ अपील पर अंतरिम रोक लगाने के बाद एक बार फिर उनका नाम इस प्रकरण के केंद्र में आ गया।

संगीता सिंह को मिली कमान

आंजनेय सिंह की जगह अब अलीगढ़ मंडल की मंडलायुक्त संगीता सिंह को मुरादाबाद मंडल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। शासन के 17 आईएएस अधिकारियों के तबादले वाले आदेश में यह बदलाव किया गया है। वहीं प्रयागराज में राजस्व परिषद के सदस्य (न्यायिक) सोम प्रकाश आर्य को अलीगढ़ का मंडलायुक्त बनाया गया है।

मुरादाबाद मंडल में नई मंडलायुक्त की तैनाती ऐसे समय हुई है, जब रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों का मामला अभी मंडलायुक्त न्यायालय में लंबित है। अगली सुनवाई 25 अगस्त को प्रस्तावित है। ऐसे में अब इस मामले की आगे की सुनवाई और प्रशासनिक रुख पर भी निगाहें रहेंगी।

11 साल तक रहे यूपी में

आंजनेय सिंह की यूपी से विदाई के साथ करीब 11 साल से अधिक समय से चली आ रही उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त हो गई है। सात बार विस्तार के बाद आठवें विस्तार का इंतजार कर रहे इस अधिकारी को आखिरकार उनके मूल कैडर के लिए कार्यमुक्त कर दिया गया। फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों पर लगी रोक और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई का फैसला नई मंडलायुक्त की देखरेख में आगे बढ़ेगा।

 

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