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सीएम योगी का सख्त फरमान, चीनी की जमाखोरी की तो झेलना होगा एस्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और आगामी त्योहारी सीजन से पहले बाजार में किसी भी तरह की कृत्रिम कमी या कालाबाजारी को रोकने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में राज्य की चीनी मिलों में मौजूद स्टॉक की स्थिति, बाजार में चीनी की आपूर्ति और कालाबाजारी रोकने के लिए उठाए जा सकने वाले सख्त कदमों पर चर्चा हुई। इस दौरान सीएम ने अधिकारियों को कुछ स्पष्ट दिशा-निर्देश भी दिए।

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जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलेगी सरकार

बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि, प्रदेश की चीनी मिलों में इस समय लगभग 179.38 लाख क्विंटल चीनी का मजबूत स्टॉक मौजूद है, जो आगामी त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।  इसके बावजूद सीएम योगी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए साफ कर दिया कि, चीनी की जमाखोरी या अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ पूरी तरह से जीरो टॉलरेंस की नीति अपने जाएगी।

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उन्होंने कहा कि, जो भी व्यक्ति या व्यावसायिक प्रतिष्ठान नियमों का उल्लंघन करते हुए पाए जाएंगे, उनके खिलाफ आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम यानी एस्मा के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह अधिनियम विशेष रूप से आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए बनाया गया है और इसके तहत सख्त सजा का प्रावधान है।

स्टॉक में मौजूद है 179.38 लाख क्विंटल चीनी

सरकार की तरफ से जारी किए गए ताजा आंकड़ों पर गौर करें, तो उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में इस समय चीनी के भंडारण की स्थिति कुछ इस प्रकार है। राज्य की सहकारी चीनी मिलों में फिलहाल 23.60 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक मौजूद है। वहीं राज्य निगम के अंतर्गत आने वाली मिलों में 5.28 लाख क्विंटल चीनी का भंडार है।

इसके अलावा निजी क्षेत्र की चीनी मिलों में सबसे अधिक यानी 150.50 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध है, जो कुल स्टॉक का बड़ा हिस्सा है। इन आंकड़ों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि, बाजार में चीनी की आपूर्ति हर हाल में सुचारू और निरंतर बनी रहनी चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की किल्लत या अचानक मूल्य वृद्धि का सामना न करना पड़े।

30 दिन से ज्यादा भंडारण पर होगी कार्रवाई

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में मौजूद प्रशासनिक और संबंधित विभागीय अधिकारियों को चीनी के भंडारण और बाजार में इसकी उपलब्धता पर लगातार कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की तरफ से तय किए गए मानकों के अनुसार, यदि कोई व्यापारी या प्रतिष्ठान 30 दिन से अधिक समय तक चीनी का भंडारण करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के तहत सीधी कार्रवाई की जाएगी।

इतना ही नहीं, इससे भी आगे बढ़कर यह स्पष्ट किया गया है कि, जिन कारोबारियों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास 400 टन से अधिक चीनी का अनधिकृत और अघोषित स्टॉक पाया जाएगा, तो उनके खिलाफ तत्काल छापेमारी की कार्रवाई करते हुए कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जाएगा। इसके साथ ही प्रशासनिक टीमों को मंडियों और गोदामों का समय-समय पर औचक निरीक्षण करने के भी सख्त आदेश दिए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को समय रहते पकड़ा जा सके।

किसानों को हुआ रिकॉर्ड भुगतान

बैठक में गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की स्थिति पर भी चर्चा हुई तो अधिकारियों ने बताया कि, प्रदेश में किसानों को इस बार रिकॉर्ड स्तर पर गन्ने का मूल्य भुगतान किया जा चुका है। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अब तक प्रदेश के करीब 48 लाख किसानों के बैंक खातों में सीधे तौर पर 3,217 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि भेजी जा चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि, सरकार गन्ना किसानों के हितों को लेकर भी पूरी गंभीरता से काम कर रही है और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है।

15 अक्टूबर से शुरू होगा नया पेराई सत्र

बैठक में यह भी जानकारी साझा की गई कि, उत्तर प्रदेश में आगामी गन्ना पेराई सत्र की औपचारिक शुरुआत 15 अक्टूबर से होने जा रही है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि, नए पेराई सत्र के शुरू होने से पहले पुराने स्टॉक की व्यवस्थित निकासी सुनिश्चित की जाए और बाजार में आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनी रहे। इसके पीछे सरकार की मंशा यह है कि, नए सत्र की शुरुआत से पहले किसी भी तरह की अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो और बाजार में चीनी की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे।

त्योहारी सीजन से पहले सरकार सतर्क

राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि, मुख्यमंत्री योगी की ओर से बुलाई गई यह हाईलेवल बैठक त्योहारी सीजन से ठीक पहले सरकार की सक्रियता और सतर्कता को दर्शाती है।

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दरअसल त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की मांग में स्वाभाविक रूप से भारी बढ़ोतरी हो जाती है और ऐसे मौकों पर अक्सर कुछ कारोबारी जानबूझकर जमाखोरी कर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करते हैं, जिससे कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं और आम उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ता है। मुख्यमंत्री की ओर से समय रहते सख्त निर्देश जारी किए जाने को इसी आशंका को पहले ही रोकने की एक ठोस और सुनियोजित रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

आम उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

सरकार की इस पूरी कवायद का मूल उद्देश्य यही है कि, आगामी त्योहारी सीजन के दौरान प्रदेश के आम उपभोक्ताओं को चीनी की उपलब्धता को लेकर किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और बाजार में इसकी कीमतें स्थिर बनी रहें। जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी के साथ-साथ मंडियों और गोदामों की नियमित निगरानी की व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि बाजार में चीनी की आपूर्ति पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार के ये सख्त कदम बाजार में वास्तविक रूप से कितना असर दिखाते हैं और त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर कितनी राहत मिल पाती है।

 

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