
Hearing Loss: आजकल लोग अक्सर यह समझ बैठते हैं कि, सुनने की समस्या का मतलब अचानक पूरी तरह बहरा हो जाना है, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है। ज्यादातर मामलों में सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती है। शुरुआती लक्षण इतने हल्के और सामान्य होते हैं कि, लोग उन्हें उम्र बढ़ने, थकान, व्यस्त दिनचर्या या आसपास के शोर का असर समझकर आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। नतीजतन, समस्या तब तक गंभीर रूप ले लेती है जब तक रोजमर्रा की बातचीत, परिवार के साथ जुड़ाव या कामकाज करना मुश्किल न होने लगे।
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बेहद बारीक होती है शुरुआती पहचान
चिकित्सकों का कहना है कि, सुनने की समस्या को शुरूआती चरण में ही पहचान लेना बेहद जरूरी है। यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन डेफनेस एंड अदर कम्युनिकेशन डिसऑर्डर्स की रिपोर्ट भी स्पष्ट करती है कि, उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता में कमी धीरे-धीरे विकसित होती है और यह दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है। अगर समय रहते ध्यान दिया जाए तो सुनने की क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है और जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होता है।

सुनने की समस्या केवल कान की नहीं होती, बल्कि पूरे जीवन से जुड़ी होती है। जब कोई व्यक्ति ठीक से सुन नहीं पाता तो वह धीरे-धीरे सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रहने लगता है, परिवार के सदस्यों के साथ कम बातचीत करता है और अकेलापन महसूस करने लगता है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि, अनुपचारित सुनने की समस्या अवसाद, चिंता, तनाव और यहां तक कि डिमेंशिया के खतरे को भी बढ़ा सकती है।
ये हैं लक्षण
डॉक्टर कहते हैं कि, शुरुआती चरण में समस्या को पहचानकर हियरिंग एड्स, थेरेपी या अन्य उपचारों से इसे अच्छी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। देर होने पर नुकसान अपरिवर्तनीय हो सकता है। सुनने की समस्या के शुरुआती संकेत अक्सर बहुत सूक्ष्म होते हैं। सबसे आम लक्षण यह है कि व्यक्ति आवाज तो सुन लेता है, लेकिन शब्द साफ-साफ नहीं समझ पाता।
खासकर रेस्तरां, शादी-ब्याह, पारिवारिक समारोह, बाजार या ट्रैफिक वाली जगहों जैसी भीड़भाड़ वाले माहौल में बातचीत समझना मुश्किल हो जाता है। लोग इसे आमतौर पर शोर ज्यादा है कहकर टाल देते हैं, जबकि यह उच्च-आवृत्ति वाली सुनने की क्षमता घटने का महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। एक और आम संकेत है बार-बार अपनी बात दोहरवाना। अगर आपको लोगों से बार-बार क्या कहा?, दोहराओ ना या जोर से बोलो कहना पड़ता है तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
धीरे-धीरे आता है बदलाव
शुरुआत में यह कभी-कभार होता है, लेकिन जब यह रोजमर्रा की आदत बन जाए, तो चेतावनी का संकेत माना जाना चाहिए। अक्सर परिवार के सदस्य या सहकर्मी सबसे पहले इस बदलाव को नोटिस करते हैं। टीवी, मोबाइल या रेडियो की आवाज लगातार बढ़ाते रहना भी एक क्लासिक लक्षण है। घर के अन्य सदस्यों को वह आवाज बहुत तेज लगती है, जबकि सुनने में दिक्कत महसूस कर रहा व्यक्ति उसे सामान्य समझता रहता है।
यह बदलाव इतना धीरे-धीरे आता है कि, व्यक्ति खुद इसे गंभीरता से नहीं ले पाता। फोन पर बातचीत में परेशानी महसूस होना भी सुनने की क्षमता कम होने का स्पष्ट संकेत हो सकता है। आमने-सामने बात करते समय चेहरे के भाव और होंठों की हरकत से समझने में मदद मिल जाती है, लेकिन फोन पर केवल आवाज पर ही निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए हल्की कमी भी फोन कॉल के दौरान साफ महसूस होने लगती है।
लोग अक्सर इसे नेटवर्क की समस्या या कम आवाज बताकर अनदेखा कर देते हैं। इसके अलावा कानों में लगातार या बार-बार घंटी बजने, भिनभिनाहट या सीटी जैसी आवाज सुनाई देना भी चिंता का विषय है। इसे टिनिटस कहा जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि, टिनिटस कई बार सुनने की समस्या का पूर्व संकेत हो सकता है। यह लाउड नॉइज, इंफेक्शन या उम्र संबंधी बदलाव के कारण भी हो सकता है।
बुढ़ापा मनाकर न करें लापरवाही
सुनने की समस्या के अन्य संकेतों में बच्चों या महिलाओं की ऊंची आवाज कम सुनाई देना, टीवी के डायलॉग समझने में दिक्कत होना, सबटाइटल्स ऑन रखना, मीटिंग या लेक्चर में ध्यान केंद्रित करने में मुश्किल और सामाजिक अलगाव की भावना बढ़ना शामिल है। ये सभी लक्षण धीरे-धीरे आते हैं, इसलिए व्यक्ति खुद उन्हें आसानी से महसूस नहीं कर पाता।

कई लोग इसे बस बुढ़ापा मानकर स्वीकार कर लेते हैं, जबकि सही समय पर जांच और उपचार से स्थिति को रोका जा सकता है। समय पर ध्यान न देने पर समस्या बढ़ती जाती है। व्यक्ति काम की दक्षता खोने लगता है, खासकर उन पेशों में जहां फोन, मीटिंग या संवाद ज्यादा होता है। लंबे समय तक अनुपचारित रहने पर मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है।
डॉक्टर से करें संपर्क
डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि, सुनने की समस्या अवसाद और संज्ञानात्मक गिरावट से सीधे जुड़ी हुई है। अगर आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को ये लक्षण दिख रहे हैं तो तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ या ऑडियोलॉजिस्ट से संपर्क करें। हियरिंग टेस्ट करवाएं और जरूरत अनुसार हियरिंग एड्स या अन्य उपकरणों का उपयोग शुरू करें।
लाउड नॉइज से बचें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और ब्लड शुगर तथा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें। सुनने की क्षमता हमारी सबसे मूल्यवान इंद्रियों में से एक है। यह सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं बल्कि जीवन की खुशियों और रिश्तों को जोड़े रखने का जरिया भी है। शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज करना बाद में पछतावे का कारण बन सकता है।
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