बार-बार आती है बेहोशी? जानें कब बन जाती है जानलेवा बीमारी की चेतावनी

आमतौर पर लोग बेहोशी को शरीर की कमजोरी, भूख न लगने, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव या तेज गर्मी का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि, यदि किसी व्यक्ति को बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार बेहोशी आने लगे, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह लक्षण केवल शारीरिक कमजोरी का संकेत नहीं, बल्कि मस्तिष्क, हृदय या नर्वस सिस्टम में किसी गंभीर गड़बड़ी की शुरुआती चेतावनी भी हो सकता है।

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क्यों आती है बेहोशी

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि, बेहोशी उस स्थिति में होती है जब कुछ समय के लिए मस्तिष्क तक पर्याप्त मात्रा में रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इस कारण व्यक्ति कुछ सेकंड या कुछ मिनट के लिए अपना होश खो बैठता है। मेडलाइन प्लस के हवाले से बताया गया है कि, इसके सामान्य कारणों में लंबे समय तक खड़े रहना, शरीर में पानी की कमी, लो ब्लड प्रेशर, तेज दर्द, भावनात्मक तनाव, भूखे रहना या अचानक उठकर खड़े हो जाना शामिल है। चिकित्सा भाषा में इसे “वैसोवेगल सिंकोप” कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में यह गंभीर स्थिति नहीं मानी जाती।

Fainting occurs frequently

हालांकि, डॉक्टरों की सलाह है कि, अगर बेहोशी बार-बार हो, बिना किसी ट्रिगर के अचानक आए या इसके साथ शरीर में अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत किसी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

कब स्थिति हो जाती है गंभीर

मैयोक्लीनिक के अनुसार, कुछ खास परिस्थितियों में बेहोशी को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए। इनमें शामिल हैं – व्यायाम करते समय बेहोशी आना, बिना किसी पूर्व संकेत के अचानक बेहोश हो जाना, बार-बार बेहोशी की घटना दोहराना, बेहोशी के बाद लंबे समय तक होश न आना, तथा होश में आने के बाद व्यक्ति का भ्रमित रहना, बोलने में परेशानी होना या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस होना।

इस समय करें डॉक्टर से संपर्क

  • बार-बार बेहोश होना
  • बेहोशी के दौरान चोट लग जाना
  • सीने में दर्द के साथ बेहोशी आना
  • दिल की धड़कन का तेज या अनियमित हो जाना
  • परिवार में अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु का इतिहास होना
  • बेहोशी के बाद दौरे जैसे लक्षण दिखना

डॉक्टरों का कहना है कि, ऐसी स्थितियों में मरीज को न्यूरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट, दोनों विशेषज्ञों से जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी की सही वजह का पता लगाया जा सके।

दिमाग से जुड़ी बीमारियां

मिर्गी

चिकित्सा जगत में बार-बार होने वाली बेहोशी को मस्तिष्क से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत माना जाता है। इनमें सबसे प्रमुख है मिर्गी। मैयोक्लीनिक के अनुसार हर बेहोशी मिर्गी का लक्षण नहीं होती, लेकिन कुछ मरीजों में दौरे के दौरान बेहोशी आ सकती है। यदि बेहोशी के साथ शरीर में झटके आना, जीभ कट जाना, पेशाब निकल जाना या लंबे समय तक भ्रम की स्थिति बनी रहे, तो डॉक्टर मरीज को ईईजी की जांच कराने की सलाह देते हैं।

स्ट्रोक

दूसरा है, स्ट्रोक या ट्रांसिएंट इस्केमिक अटैक (TIA)। एनसीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश स्ट्रोक के मामलों में सीधे बेहोशी नहीं होती, लेकिन ब्रेनस्टेम से जुड़े स्ट्रोक या मस्तिष्क में रक्त प्रवाह पूरी तरह रुक जाने की स्थिति में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है। अगर बेहोशी के साथ बोलने में कठिनाई हो, चेहरा टेढ़ा दिखाई दे या हाथ-पैर में अचानक कमजोरी महसूस हो, तो डॉक्टरों के अनुसार यह स्थिति एक मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी होता है।

ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से जुड़े विकार

इसके अलावा, ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम से जुड़े विकार और कुछ दुर्लभ मामलों में ब्रेन ट्यूमर भी बार-बार बेहोशी आने की वजह बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीज को उल्टी होना, तेज सिरदर्द रहना और देखने में परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं, जिन्हें डॉक्टर अतिरिक्त चेतावनी संकेत मानते हैं।

दिल की बीमारी

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, बेहोशी की सभी किस्मों में कार्डियक सिंकोप को सबसे गंभीर श्रेणी में रखा जाता है, क्योंकि इसमें अचानक मृत्यु का खतरा काफी बढ़ जाता है।

Fainting occurs frequently

हृदय की अनियमित धड़कन यानी एरिदमिया, हृदय के वॉल्व से जुड़ी बीमारियां और कार्डियोमायोपैथी जैसी स्थितियों में मरीज को बार-बार बेहोशी आने की समस्या हो सकती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यही वजह है कि सीने में दर्द या धड़कन अनियमित होने के साथ आने वाली बेहोशी को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकती है।

बिना देर किए कराएं जांच

डॉक्टरों का साफ कहना है कि, बार-बार बेहोश होना कभी भी सिर्फ शारीरिक कमजोरी या थकान का परिणाम मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर अगर यह समस्या दोहराई जा रही हो या इसके साथ सीने में दर्द, दिल की अनियमित धड़कन, बोलने में परेशानी, दौरे पड़ना या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण भी मौजूद हों, तो यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक समय रहते न्यूरोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट से जांच कराने पर मिर्गी, स्ट्रोक, हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों या अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का समय पर पता लगाया जा सकता है। सही समय पर सही निदान और उपचार मिलने से न सिर्फ गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है, बल्कि अचानक होने वाली जानलेवा स्थितियों को भी रोका जा सकता है।

डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी व्यक्ति को हाल के दिनों में एक से अधिक बार बेहोशी आई है, चाहे वह कितनी भी संक्षिप्त क्यों न रही हो, तो उसे टालने के बजाय तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर की गई जांच और सतर्कता न केवल बीमारी की सही पहचान में मदद करती है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी रोकने में सहायक साबित हो सकती है।

 

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नोट-  यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

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