
आज की भागमभाग वाली और तनाव भरी जिंदगी में लगभग हर दूसरे इंसान को सिरदर्द की शिकायत रहती है। ज्यादातर लोग इसे मामूली समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं या फिर मेडिकल स्टोर से कोई भी पेनकिलर खा लेते हैं और आराम मिल जाता है। लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के सिरदर्द हो रहा है, तो इसे हल्के में लेने की भूल बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। सिर का यह दर्द कई बार केवल एक शारीरिक तकलीफ भर नहीं होता, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत हो सकता है कि शरीर में अंदर से कुछ ऐसा हो रहा है जो ठीक नहीं है। आइए जानते हैं कि आखिर बार-बार होने वाले सिरदर्द के पीछे कौन-कौन से बड़े कारण छिपे हो सकते हैं।
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हॉर्मोन्स में अचानक बदलाव बड़ी वजह
महिलाओं में बार-बार सिरदर्द होने के पीछे सबसे बड़ी और आम वजहों में से एक है हॉर्मोन्स का असंतुलन। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि, एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन सीधे तौर पर दिमाग की रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करता है। जब शरीर में इस हॉर्मोन का स्तर अचानक और तेजी से गिरने लगता है, जो कि आमतौर पर 40 वर्ष की उम्र के आसपास, यानी मेनोपॉज के शुरुआती दौर में देखा जाता है, तो दिमाग की नसें बार-बार सिकुड़ने और फैलने लगती हैं।

यही वजह है कि, जिन महिलाओं को अपनी पूरी जिंदगी में कभी सिरदर्द की शिकायत नहीं हुई, वे भी 40 की उम्र पार करने के बाद अचानक हर कुछ दिनों के अंतराल पर तेज सिरदर्द या माइग्रेन जैसी समस्या से जूझने लगती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस उम्र में महिलाओं को अपने शरीर में हो रहे बदलावों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है, ताकि समय रहते सही देखभाल की जा सके।
पानी की कमी और अधूरी नींद भी है वजह
आज की भागदौड़ भरी दिनचर्या में अक्सर लोग पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भूल जाते हैं। ऐसे में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन, सिरदर्द को ट्रिगर करने वाले सबसे आम और सबसे बड़े कारणों में गिना जाता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि, डिहाइड्रेशन के साथ ही नींद की गुणवत्ता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
यदि किसी व्यक्ति की नींद बार-बार टूटती है या वह रोजाना 7 से 8 घंटे की गहरी और पूरी नींद नहीं ले पा रहा है, तो यह समस्या और अधिक गंभीर रूप ले सकती है। कम सोने की वजह से दिमाग पर्याप्त आराम नहीं कर पाता और थकान की स्थिति में चला जाता है। ऐसे में अगले दिन सुबह उठते ही सिर में भारीपन और दर्द महसूस होने लगता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि, रोजाना पर्याप्त पानी पीना और नियमित नींद लेना सेहत के लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें तनिक भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए।
ब्लड शुगर लेवल गिरने से भी होता है दर्द
अक्सर काम की व्यस्तता या लापरवाही के चलते लोग समय पर खाना नहीं खाते और लंबे समय तक भूखे रह जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह आदत भी सीधे तौर पर सिरदर्द को न्योता देती है। जब शरीर लंबे समय तक बिना भोजन के रहता है, तो रक्त में शुगर का स्तर अचानक नीचे गिरने लगता है। शुगर लेवल कम होते ही शरीर को जरूरी ऊर्जा मिलनी बंद हो जाती है, और कुछ ही घंटों के भीतर सिर में तेज दर्द शुरू हो जाता है।
डॉक्टरों का कहना है कि, यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में ज्यादा तेजी से देखने को मिलती है, जिनके शरीर में हॉर्मोन्स पहले से ही ऊपर-नीचे हो रहे होते हैं। ऐसे में समय पर संतुलित भोजन लेना सिरदर्द से बचाव का एक कारगर तरीका माना जाता है।
गर्दन और कंधों की अकड़न भी बन रही चिंता का विषय
बदलती जीवनशैली में लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने गलत पोस्चर में बैठकर काम करना आजकल आम बात हो गई है। विशेषज्ञों की मानें तो यह आदत गर्दन, जबड़े और कंधों की मांसपेशियों पर भारी दबाव डालती है। दिनभर का मानसिक तनाव और शारीरिक थकान धीरे-धीरे इन मांसपेशियों में अकड़न पैदा कर देती है, जो शाम होते-होते एक गंभीर सिरदर्द का रूप ले लेती है।

चिकित्सा की भाषा में इसे ‘टेंशन हेडेक’ यानी तनाव जनित सिरदर्द कहा जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि, लगातार बैठकर काम करने वालों को बीच-बीच में ब्रेक लेकर हल्की स्ट्रेचिंग करनी चाहिए और अपने बैठने के पोस्चर पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि गर्दन और कंधों पर पड़ने वाला दबाव कम हो सके।
बार-बार होने वाले सिर दर्द को न करें इग्नोर
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो बार-बार होने वाला सिरदर्द भले ही एक सामान्य शारीरिक समस्या जैसा लगे, लेकिन यह शरीर के भीतर चल रही किसी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि, इसे नजरअंदाज करने के बजाय इसके पीछे के असली कारणों को समझने की कोशिश करें।
हॉर्मोनल बदलाव, पानी की कमी, अधूरी नींद, अनियमित खानपान और गलत पोस्चर जैसी आदतें इसके पीछे की मुख्य वजहें हो सकती हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि, यदि सिरदर्द की समस्या लगातार बनी रहती है या बार-बार दोहराई जाती है, तो बिना देर किए डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, ताकि समय रहते सही कारण की पहचान हो सके और उचित इलाज शुरू किया जा सके।
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नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए योग्य डॉक्टर या चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।



