
मानसून सीजन शुरू होते ही डेंगू के मामले भी तेजी से बढने लगते हैं। अधिकतर लोग इस बीमारी को सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने वाली समस्या मानते हैं, लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि, कुछ गंभीर मामलों में डेंगू दिल की कार्यक्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
बरसात के मौसम के साथ ही मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप एक बार फिर सिर उठाने लगा है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियां हर साल इसी सीजन में अपने पैर पसारती हैं। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। डेंगू के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। आमतौर पर जब भी डेंगू की बात होती है, तो सबसे पहले जिस चीज पर हर किसी का ध्यान जाता है, वह है प्लेटलेट्स काउंट। मरीज और उनके परिजन बार-बार खून की जांच करवाते हैं ताकि यह पता चल सके कि प्लेटलेट्स कितना गिरा।
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प्रभावित हो सकती है हृदय की कार्य क्षमता
यह चिंता वाजिब भी है, क्योंकि प्लेटलेट्स के अत्यधिक गिरने से रक्तस्राव जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ प्लेटलेट्स पर ध्यान केंद्रित करना काफी नहीं है। डेंगू का असर शरीर के एक और महत्वपूर्ण अंग दिल पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अक्सर लोग इस तरफ ध्यान नहीं देते हैं। इसी विषय पर बातचीत के लिए विशेषज्ञों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने डेंगू और हृदय स्वास्थ्य के बीच के जटिल रिश्ते पर विस्तार से रोशनी डाली।

चिकित्सकों का कहा है कि, डेंगू वायरस सामान्य परिस्थितियों में दिल पर सीधा हमला नहीं करता। ज्यादातर मरीजों में यह बीमारी बुखार, शरीर में दर्द, थकान और प्लेटलेट्स में गिरावट तक ही सीमित रहती है। उचित इलाज और आराम करने से मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन जब मामला गंभीर रूप ले लेता है, तब स्थिति बदल जाती है। ऐसे में शरीर की हृदय संबंधी कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, जिससे मरीज की सेहत पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।
दिल की मांसपेशियों को नुकसान
डॉक्टरों का कहना है कि, यह गलतफहमी बेहद आम है कि, डेंगू सिर्फ प्लेटलेट्स से जुड़ी बीमारी है। असलियत यह है कि, गंभीर मामलों में यह वायरस दिल की मांसपेशियों तक को अपनी चपेट में ले सकता है। इसके पीछे मुख्य वजह है शरीर में होने वाली अत्यधिक सूजन यानी इन्फ्लेमेशन। जब डेंगू वायरस शरीर में फैलता है, तो इम्यून सिस्टम उससे लड़ने के लिए सक्रिय हो जाता है और इस प्रक्रिया में कई बार सूजन इतनी बढ़ जाती है कि वह दिल की मांसपेशियों तक को नुकसान पहुंचाने लगती है।
मायोकार्डाइटिस से लेकर हार्ट फेल्योर तक का रिस्क
इस स्थिति के चलते मरीज में मायोकार्डाइटिस यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन की समस्या हो सकती है। इसके अलावा दिल की धड़कन का अनियमित हो जाना, ब्लड प्रेशर का असामान्य रूप से गिर जाना, दुर्लभ लेकिन गंभीर मामलों में हार्ट फेल्योर तक की नौबत आ सकती है। यह जानकारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि, आमतौर पर मरीज और उनके परिजन इन लक्षणों को डेंगू का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि असल में यह एक गंभीर चेतावनी हो सकती है।
इन लक्षणों को न लें हल्के में
विशेषज्ञों ने कुछ ऐसे लक्षणों का जिक्र किया है, जिन्हें डेंगू के दौरान बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे कि, सीने में तेज दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ महसूस होना, बार-बार चक्कर आना, अचानक बेहोश हो जाना, दिल की धड़कन का बहुत तेज या अनियमित हो जाना और असामान्य रूप से कमजोरी महसूस होना शामिल है। इसके अलावा हाथ-पैरों का ठंडा पड़ जाना और ब्लड प्रेशर का काफी नीचे गिर जाना भी खतरे की घंटी माने जाते हैं।
डॉक्टरों की सलाह है कि, अगर डेंगू से पीड़ित किसी मरीज में इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए और जरूरी जांच व निगरानी करवानी चाहिए। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह लापरवाही जानलेवा भी साबित हो सकती है।
डेंगू शॉक सिंड्रोम बन सकता है जानलेवा
चिकित्सा विशेषज्ञ कहते हैं कि, अगर डेंगू का सही समय पर और उचित इलाज न किया जाए, तो मरीज की हालत बिगड़कर डेंगू शॉक सिंड्रोम तक पहुंच सकती है। यह स्थिति मेडिकल दृष्टि से बेहद गंभीर और जानलेवा मानी जाती है। शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होने लगती है।

ऐसे में अगर मरीज को पहले से ही कोई हृदय संबंधी बीमारी है, तो डेंगू उसके दिल पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो जाती है। डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि, जिन मरीजों में मायोकार्डाइटिस विकसित हो जाता है, उनमें हार्ट फेल्योर होने का खतरा भी बना रहता है।
इन्हें होता है सबसे ज्यादा जोखिम
हर डेंगू मरीज के लिए दिल पर असर पड़ने का खतरा एक समान नहीं होता। कुछ खास वर्गों के लोगों में यह जोखिम अपेक्षाकृत अधिक होता है। इनमें उम्रदराज व्यक्ति सबसे ऊपर आते हैं, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से किसी तरह की हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में भी जटिलताओं की आशंका बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त, जिन मरीजों को सीवियर डेंगू यानी डेंगू का गंभीर रूप हुआ है, उनमें दिल से जुड़ी परेशानियों का खतरा सबसे ज्यादा माना जाता है।
सतर्क रहना ही बचाव
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि, डेंगू के दौरान सिर्फ प्लेटलेट्स की निगरानी पर ही ध्यान केंद्रित नहीं करना चाहिए। मरीज के दिल की धड़कन, ब्लड प्रेशर और सांस लेने की प्रक्रिया पर भी बराबर नजर रखी जानी चाहिए, खासकर उन मरीजों में जो पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी बीमारियों से ग्रसित हैं। सीने में दर्द, हार्ट रेट का असामान्य रूप से बढ़ना, सांस फूलना, चक्कर आना या बेहोशी जैसे किसी भी लक्षण को हल्के में लेने की बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे समझदारी भरा कदम माना जाता है।
मानसून के इस मौसम में जहां डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं जागरूकता ही इससे बचाव का सबसे कारगर तरीका है। घर के आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना और बुखार या शरीर में दर्द जैसे शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से जांच करवाना, ये सभी सावधानियां डेंगू को गंभीर रूप लेने से रोकने में मदद कर सकती हैं। साथ ही, यह समझना भी जरूरी है कि यह बीमारी सिर्फ प्लेटलेट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि समय रहते सही देखभाल न मिलने पर यह दिल जैसे महत्वपूर्ण अंग को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
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नोट- यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी लक्षण या बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।



