
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और लखनऊ विश्वविद्यालय की कुलपति आनंदीबेन पटेल ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र भाषा और अपशब्दों कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश की शैक्षणिक और सांस्कृतिक परंपराओं के विपरीत बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
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राज्यपाल ने कहा, जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन ने उनकी आंखें खोल दी हैं। उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि आज के समय में लोगों को इतनी हिम्मत और आजादी महसूस हो रही है कि, वे प्रधानमंत्री तक को खुलेआम गालियां देने से नहीं हिचकिचाते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि, आखिर इसके परिणामस्वरूप अब जो लोगों को कानूनी नोटिस मिल रहे हैं, क्या यही उनकी शिक्षा और संस्कार हैं?
दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल
यह बयान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए दिया। समारोह में उपस्थित छात्रों, शिक्षकों और अन्य गणमान्य लोगों के समक्ष उन्होंने कहा कि, जंतर-मंतर का विरोध-प्रदर्शन वाकई आंखें खोलने वाला घटनाक्रम था।

उन्होंने सीधे सवाल किया कि, क्या यही हमारी शिक्षा और संस्कृति की पहचान है? उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री और अन्य जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है, चाहे विरोध का कारण कुछ भी हो।
प्रधानमंत्री तक को मिल रहीं गालियां
अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आगे कहा कि, पत्रकार मित्र अक्सर उनसे इस विषय पर सवाल पूछते हैं। उन्होंने कहा कि, आज के दौर में सभी को बोलने की पूरी आजादी है, लेकिन इस आजादी का यह मतलब कतई नहीं है कि, प्रधानमंत्री तक को सार्वजनिक रूप से गालियां दी जाएं। उन्होंने चिंता जताते हुए पूछा कि, आखिर हम अपने युवाओं को किस तरह की शिक्षा दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी के विकास एजेंडे की सराहना करते हुए कहा कि, राष्ट्र-निर्माण ही हर व्यक्ति के सार्वजनिक जीवन का मुख्य और सर्वोच्च उद्देश्य होना चाहिए।
गौरतलब है कि, हाल ही में जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था, जिसके बाद नोएडा में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। इस वीडियो में रुचिका सिंह नामक एक युवती पर पीएम के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया। एक शिकायत के आधार पर बीती 29 जुलाई को नोएडा पुलिस ने इस मामले में जीरो एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।
युवती ने मांगी सार्वजनिक माफ़ी
इस पूरे विवाद के बीच शनिवार को आरोपी रुचिका सिंह का एक और वीडियो सामने आया, जिसमें उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गालियां देने के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। अपने बयान में उसने कहा कि, विरोध-प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद अन्य लोगों के प्रभाव में आकर उसने अपशब्दों का इस्तेमाल कर दिया था। उसने यह भी दावा किया कि, प्रदर्शन में केवल वह अकेली नहीं थी, बल्कि प्रधानमंत्री सहित अन्य केंद्रीय मंत्रियों के खिलाफ कई अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया था।
बता दें कि, रुचिका सिंह ने अपनी उम्र महज 15 वर्ष होने का दावा किया है, जबकि पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में उसकी उम्र 25 वर्ष दर्शाई गई है। उम्र को लेकर सामने आए इस विरोधाभास ने मामले को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।
पीएम ने जारी किया बयान, कहा- सबको माफ़ किया
इससे एक दिन पहले, यानी शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक अहम बयान जारी किया था। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान खुद को और अपनी दिवंगत मां को कथित तौर पर गाली देने वाले छात्रों को माफ करने की बात कही थी। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया, वह किसी भी सभ्य समाज की गरिमा के अनुरूप नहीं है। हालांकि, उन्होंने समाज से अपील की, कि इन छात्रों के खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई करने के बजाय उन्हें सुधारने और सही दिशा दिखाने का प्रयास किया जाए।
बदले की भावना से न हो कार्रवाई- पीएम
अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि, कुछ शरारती बच्चों ने अत्यंत आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, जिसमें उन्हें और उनकी दिवंगत मां को भी गालियां दी गईं। उन्होंने स्वीकार किया कि, इस तरह की भाषा को लेकर समाज में स्वाभाविक रूप से आक्रोश पैदा होना लाजमी है। खासकर तब जब कथित तौर पर कुछ युवा महिलाओं द्वारा भी इस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया हो।

हालांकि, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि, अब जरूरत इस बात की है कि इन भटके हुए युवाओं को सही दिशा दिखाई जाए, न कि उन्हें लंबी कानूनी लड़ाई में उलझाकर परेशान किया जाए। उन्होंने कहा कि सजा देने, अदालतों के चक्कर लगवाने या समाज में उन्हें अपमानित करने से परिस्थितियां नहीं बदलतीं, बल्कि इसके लिए संवेदनशील और सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।
बच्चे भटके हैं, उन्हें सुधारना है
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने एक भावनात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि जब गलती से जीभ दांतों के बीच आ जाती है और चोट लग जाती है, तो हम अपने ही दांत नहीं तोड़ते, क्योंकि दांत और जीभ दोनों ही हमारे अपने अंग हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह ये भटके हुए बच्चे भी हमारे अपने ही हैं और उन्हें सुधारना पूरे समाज का सामूहिक दायित्व है।
एक ओर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इस घटनाक्रम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे शिक्षा और संस्कृति से जोड़ा। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने संयम और क्षमाशीलता का परिचय देते हुए युवाओं को सुधार का अवसर देने की बात कही।
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