Gold-Silver Rate: सोना-चांदी के दामों में आई भारी गिरावट, सर्राफा बाजार में मचा हड़कंप

नई दिल्ली। सोना और चांदी के भाव में एक दिन के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार दोनों में कीमती धातुओं के दामों में तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी एक ही झटके में 16,600 रुपये प्रति किलो तक टूट गई, जबकि सोने की कीमत में भी करीब 4,000 रुपये की भारी गिरावट आई। कमोडिटी बाजार बंद होने तक MCX पर चांदी के भाव 16,000 रुपये से अधिक टूट चुके थे। इस गिरावट ने पूरे सर्राफा बाजार को प्रभावित किया है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में सोने-चांदी अब काफी सस्ते हो गए हैं।

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MCX पर रिकॉर्ड गिरावट

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने के भाव 3,947 रुपये गिरकर 1,55,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए। वहीं, चांदी की कीमत में 16,595 रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई और यह 2,48,201 रुपये प्रति किलो पर आ गई।

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यह गिरावट पिछले कई वर्षों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। बाजार बंद होने के बाद स्थानीय सर्राफा बाजारों में भी इसी अनुपात में दाम घाटे में रहे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में उथल-पुथल

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में और भी तेज गिरावट देखी गई। 5 जून को स्पॉट गोल्ड 3.2 से 3.4 प्रतिशत तक गिरकर 4,330.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। सिल्वर की कीमत में तो 7.1 प्रतिशत की भारी गिरावट आई और यह 68.63 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। भारत में सोने के भाव करीब 2 प्रतिशत और चांदी के करीब 7 प्रतिशत टूटे। वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया।

गिरावट की मुख्य वजहें

इस भारी गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी आर्थिक आंकड़े और भू-राजनीतिक स्थिति है। अमेरिका में जारी हुए जॉब डेटा अनुमान से बेहतर आए। मजबूत रोजगार आंकड़ों से यह संकेत मिला कि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है। इससे बॉन्ड यील्ड बढ़ी और डॉलर इंडेक्स में तेजी आई।

सोना और चांदी दोनों ही डॉलर में कारोबार किए जाते हैं, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर इनकी कीमतें स्वाभाविक रूप से गिरती हैं। दूसरी बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ती उम्मीदें हैं। बाजार अब मान रहा है कि, फेड इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। महंगाई पर काबू पाने के लिए फेड को ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं। उच्च ब्याज दरों की स्थिति में निवेशक सोने जैसी गैर-उपजाऊ परिसंपत्तियों से दूर जाते हैं, क्योंकि उस स्थिति में बैंकों में जमा पैसा या बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं।

स्थानीय बाजारों पर असर

देशभर के सर्राफा बाजार इस गिरावट से सीधे प्रभावित हुए हैं। दिल्ली में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,43,860 रुपये प्रति 10 ग्राम है। चेन्नई में यह 1,45,525 रुपये, मुंबई में 1,42,752 रुपये और बेंगलुरु में 1,43,220 रुपये के आसपास पहुंच गई है। इन शहरों में चांदी के भाव भी तेजी से घाटे में रहे। ज्वेलर्स एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि अचानक आई इस गिरावट से खरीदारों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन अनिश्चितता के कारण बड़े निवेशक फिलहाल रुक गए हैं।

 18 जून को होगी फेड की बैठक  

18 जून को फेडरल रिजर्व की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, जिसकी अध्यक्षता नए फेड चेयरमैन केविन वॉर्श करेंगे। बाजार का अनुमान है कि, दिसंबर तक 25 बेसिस पॉइंट्स की रेट हाइक की संभावना है। अक्टूबर तक यह बढ़ोतरी 60 प्रतिशत संभावना के साथ देखी जा रही है। जॉब डेटा आने से पहले उम्मीद थी कि, इस साल ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी, लेकिन अब परिदृश्य बदल गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर फेड दरें बढ़ाता है तो सोने-चांदी पर और दबाव पड़ सकता है। हालांकि, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा तो ये धातुएं फिर से सुरक्षित आश्रय के रूप में खरीदी जा सकती हैं।  वर्तमान में अमेरिका-ईरान संघर्ष, मध्य पूर्व में अस्थिरता और तेल की ऊंची कीमतें एक तरफ महंगाई का खतरा बढ़ा रही हैं, तो दूसरी तरफ आर्थिक अनिश्चितता भी पैदा कर रही हैं।

 बढ़ सकती  है मांग

सोना और चांदी भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शादी-ब्याह, त्योहार और निवेश दोनों के लिए इनकी मांग रहती है। इस गिरावट से छोटे निवेशक और मध्यम वर्ग के लोग खरीदारी के मौके तलाश रहे हैं।

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कई ज्वेलर्स ने कहा कि अगले कुछ दिनों में मांग बढ़ सकती है, खासकर अगर दाम स्थिर हो जाएं। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंक सोने की खरीदारी कर रहे थे, लेकिन इस गिरावट ने उस गति को भी प्रभावित किया है। भारत में सोने का आयात बिल बढ़ने से रुपया भी दबाव में आ सकता है। सरकार और रिजर्व बैंक को इस स्थिति पर नजर रखनी होगी।

अचानक फैसला ने लें निवेशक

 सोने और चांदी में आई यह एक दिन की भारी गिरावट मुख्य रूप से अमेरिकी आर्थिक ताकत और फेड की नीतियों की आशंकाओं का नतीजा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3-7 प्रतिशत की गिरावट ने घरेलू बाजार को भी हिला दिया। हालांकि, कीमती धातुओं का लंबी अवधि का आउटलुक अभी भी सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि महंगाई, भू-राजनीतिक जोखिम और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ ये सदियों से सुरक्षा का माध्यम बने हुए हैं।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि, वे अचानक फैसले न लें। बाजार की अस्थिरता बनी हुई है। 17 जून की फेड बैठक के फैसले के बाद ही अगले रुझान स्पष्ट होंगे। फिलहाल, गिरावट ने खरीदारों को मौका दिया है, लेकिन जोखिम भी साथ है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब अमेरिकी आंकड़ों, तेल की कीमतों और फेड के संकेतों पर टिकी हुई है।

 

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