
भारत में गैस, एसिडिटी और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं आज हर घर की आम बात बन गई हैं। चाहे शहर हो या गांव, युवा हों या बुजुर्ग, ज्यादातर लोग इन समस्याओं से परेशान रहते हैं। पेट फूलना, सीने में जलन, खट्टी डकार, भारीपन और कभी-कभी कब्ज या डायरिया जैसी शिकायतें रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं।
इसे भी पढ़ें- सुबह उठते ही आती है खट्टी डकार तो हो जाएं सावधान, लीवर दे रहा ये संकेत
60 से 70% भारतीयों को होती है शिकायत
पबमेड की रिसर्च बताती है कि, भारत की करीब 15 से 30 प्रतिशत आबादी नियमित रूप से गैस और एसिडिटी की समस्या झेल रही है। कुछ नए अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि 60 से 70 प्रतिशत भारतीयों को हफ्ते में कम से कम एक बार पाचन संबंधी कोई न कोई दिक्कत का सामना करना पड़ता है।

ये समस्याएं कभी कुछ घंटों तक तो कभी कई दिनों तक परेशान करती रहती हैं, जिससे काम की क्षमता घटती है, मूड खराब रहता है और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
क्यों होती है एसिडिटी
एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स तब होता है जब पेट की ग्रंथियां खाने को पचाने के लिए जरूरत से ज्यादा हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनाती हैं। यह अतिरिक्त एसिड पेट की नाजुक परत को नुकसान पहुंचाता है या फिर ऊपर की ओर रिफ्लक्स होकर भोजन नली में जलन पैदा करता है। नतीजतन, सीने में जलन, गले में खटास, मुंह में एसिड का स्वाद या बार-बार डकार आना।
यह समस्या अकेले नहीं होती। यह हमारे खान-पान, दिनचर्या, तनाव और कई आदतों का परिणाम होती है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा होती है चाय की। ज्यादातर भारतीय सुबह उठते ही चाय का कप हाथ में ले लेते हैं और दिन भर में 3-4 कप या उससे ज्यादा चाय पी लेते हैं, लेकिन क्या चाय वाकई एसिडिटी का कारण बन सकती है?
चाय
हेल्थ एक्सपर्ट कहते हैं कि, अक्सर लोग दूध वाली चाय पीने के बाद गैस और एसिडिटी की शिकायत करते हैं। इसका एक बड़ा कारण लैक्टोज इंटॉलरेंस हो सकता है। हमारे शरीर में लैक्टेज नाम का एंजाइम दूध की लैक्टोज चीनी को पचाने में मदद करता है। अगर इस एंजाइम की मात्रा कम हो जाए (जो भारतीय आबादी में काफी आम है), तो दूध ठीक से पच नहीं पाता। नतीजतन, आंतों में फर्मेंटेशन होता है, गैस बनती है और एसिडिटी बढ़ जाती है। कुछ लोगों में यह समस्या इतनी गंभीर होती है कि दूध पीने के बाद डायरिया या पेट दर्द भी हो जाता है।
कैफीन
चाय में मौजूद कैफीन पेट में एसिड स्राव को बढ़ा सकता है। खासकर खाली पेट चाय पीने वाले लोगों को एसिड रिफ्लक्स की समस्या ज्यादा होती है। कैफीन पेट की मांसपेशियों को ढीला कर सकता है, जिससे एसिड ऊपर की ओर आ जाता है। अगर कोई व्यक्ति दिन भर में 4-5 कप से ज्यादा चाय पीता है, तो यह समस्या लगातार बनी रहती है।
चाय पीने का सही तरीका और टाइमिंग
हेल्थ एक्सपर्ट करन जोर देकर कहते हैं कि चाय पीने की टाइमिंग और तरीका बहुत मायने रखता है। सुबह उठकर सबसे पहले खाली पेट चाय न पिएं। इसके बजाय पहले कुछ हल्का नाश्ता जैसे फल, सूखे मेवे या बिस्किट ले लें फिर चाय पिएं।
इससे कैफीन और दूध दोनों के नुकसान कम हो जाते हैं। दिन भर में ज्यादा मात्रा में चाय न पीएं। दो से तीन कप पर्याप्त हैं। शाम को देर से चाय पीने से भी कई लोगों को रात में एसिडिटी होती है क्योंकि लेटते समय एसिड आसानी से रिफ्लक्स कर सकता है, इसलिए रात के खाने के कम से कम 2-3 घंटे पहले चाय खत्म कर दें। अगर आपको लैक्टोज इंटॉलरेंस है तो ग्रीन टी, हर्बल टी या ब्लैक टी (बिना दूध) ट्राई करें।
लाइफस्टाइल और खान-पान की गलत आदतें
एसिडिटी की समस्या सिर्फ चाय तक सीमित नहीं है। हमारा आधुनिक जीवनशैली और खराब खान-पान इसके बड़े कारण हैं। अधिकतर लोग शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहते। ऑफिस की कुर्सी, स्क्रीन टाइम और व्यायाम की कमी से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ता है और गैस-एसिडिटी बढ़ती है। हेल्थ एक्सपर्ट करन सलाह देते हैं कि, रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम, वॉकिंग या योगासन जरूर करें। खासकर पेट संबंधी आसन जैसे भुजंगासन, पवनमुक्तासन और कपालभाति प्राणायाम फायदेमंद साबित होते हैं।

खान-पान में तला-भुना, मैदा से बनी चीजें (समोसा, पकोड़ा, ब्रेड, नूडल्स), ज्यादा मसालेदार खाना और रिफाइंड ऑयल का इस्तेमाल पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे गट हेल्थ यानी आंतों का स्वास्थ्य बिगड़ता है। अच्छे बैक्टीरिया कम होते हैं और खराब बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे बार-बार एसिडिटी होती है। इसके अलावा अनियमित खाने का समय, रात को देर से भोजन करना, ज्यादा तनाव, नींद की कमी और स्मोकिंग-शराब जैसी आदतें भी समस्या को बढ़ाती हैं।
बचाव के उपाय
डाइट में बदलाव: फाइबर युक्त भोजन लें – सब्जियां, फल (केला, सेब, पपीता), दालें और साबुत अनाज लें। दिन में 3-4 लीटर पानी पियें।
छोटे-छोटे भोजन: एक बार में ज्यादा न खाएं। 3-4 घंटे के अंतराल पर छोटे-छोटे मील लें।
ट्रिगर्स से बचें: चॉकलेट, कॉफी, ज्यादा चटपटा, टमाटर, प्याज, गैस बनाने वाले फल-सब्जियां जैसे बंदगोभी, ब्रोकोली का सेवन कम करें।
वजन नियंत्रण: मोटापा एसिड रिफ्लक्स बढ़ाता है। इसलिए इस पर नियंत्रण रखें।
तनाव प्रबंधन: योग, मेडिटेशन या गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।
घरेलू उपाय: सौंफ, जीरा, अजवाइन, पुदीना और अदरक चाय फायदेमंद हो सकती है, लेकिन किसी भी घरेलू उपाय को लंबे समय तक बिना सलाह के न अपनाएं।
एसिडिटी और गैस कोई छोटी समस्या नहीं है। अगर इसे अनदेखा किया जाए तो यह अल्सर या अन्य गंभीर पाचन विकारों का रूप ले सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट करन का कहना है कि, जागरूकता और छोटी-छोटी आदतों में बदलाव से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। चाय का आनंद लें लेकिन समझदारी से। खान-पान संतुलित रखें, सक्रिय रहें और शरीर की सुनें। अगर समस्या लगातार बनी रहती है तो डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट से सलाह जरूर लें, नहीं तो गंभीर बीमारी का शिकार हो सकते हैं।
इसे भी पढ़ें- हेल्थ टिप्स: क्या सच में प्याज खाने से नहीं लगती लू, जानिए एक्सपर्ट की राय



