
नमक हर रसोई की जान होती है, इसके बिना खाने का स्वाद बेकार रहता है, लेकिन यही आम सी दिखने वाली चीज सेहत के लिए बड़ा खतरा भी बन सकती है। बाजार में मिलने वाले पैकेट फूड से लेकर घर के खाने तक, नमक हर जगह का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसे रोजाना कितनी मात्रा में खाया जाना चाहिए इसकी जानकारी शायद ही किसी को होती हो। इसी को समझने के लिए हमने डॉक्टरों की सलाह और स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्टों को खंगाला,तो जो नतीजे निकल कर आये वह चौंकाने वाले हैं।
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ज्यादा नमक कई बीमारियों की जड़
डॉ. राजा रविचंद्रन के अनुसार, जरूरत से ज्यादा नमक खाना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

नमक सिर्फ ब्लड प्रेशर की समस्या को नहीं , बल्कि इसका असर शरीर के कई अंगों और मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ता है। डॉक्टर की सलाह है कि, इन तमाम समस्याओं से बचने के लिए नमक का सेवन शुरू से ही सीमित मात्रा में रखा जाए, न कि बीमारी होने के बाद इसे अचानक कम करने की कोशिश की जाए।
रोजाना कितना नमक खाना चाहिए
जब बात इस सवाल की आती है कि, रोजाना कितना नमक खाना सही है, तो डॉक्टर विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की गाइडलाइन का हवाला देते हैं। डॉ. रविचंद्रन बताते हैं कि, WHO की सलाह है कि, वयस्कों को रोजाना 5 ग्राम यानी करीब एक चम्मच से कम नमक खाना चाहिए। यह आंकड़ा कई अन्य स्वास्थ्य रिपोर्टों में भी दोहराया गया है, जिससे यह साफ होता है कि, यह कोई मनगढ़ंत सीमा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध पर आधारित सिफारिश है।
यह सीमा सिर्फ खाने में ऊपर से डाले जाने वाले नमक तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें दाल-सब्जी बनाते वक्त डाला गया नमक, अचार, पापड़, नमकीन और पैकेज्ड फूड से मिलने वाला सोडियम, सब कुछ शामिल है।
पोटेशियम की भूमिका भी है अहम
सिर्फ नमक कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर में पोटेशियम का भी स्तर सही होना चाहिए। डॉ. रविचंद्रन बताते हैं कि, उचित मात्रा में पोटेशियम का सेवन ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मददगार साबित होता है, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं को शिथिल करने और शरीर से अतिरिक्त सोडियम बाहर निकालने में सहायक होता है। यानी अगर आप अपने खाने में केले, पालक, संतरे जैसी पोटेशियम युक्त चीजें शामिल करते हैं, तो यह नमक के नकारात्मक असर को कुछ हद तक बैलेंस कर देता है। हालांकि, किडनी के मरीजों को पोटेशियम बढ़ाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
हाई बीपी के मरीजों के लिए खास सावधानी
डॉ. अजय कुमार के अनुसार, हाई बीपी के मरीजों के मामले में स्थिति थोड़ी अलग और संवेदनशील होती है। वे बताते हैं कि हाई बीपी के मरीजों में अक्सर सोडियम का स्तर कम हो जाता है, जिससे कई तरह की परेशानियां पैदा हो सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि नमक बिल्कुल बंद कर देना चाहिए।

डॉ. कुमार के मुताबिक, बेहतर तरीका यही है कि नमक का सेवन सीमित मात्रा में रखा जाए, साथ ही प्रोसेस्ड फूड, अचार, पापड़ और पैक्ड स्नैक्स से परहेज किया जाए, और डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह से डाइट में बदलाव किया जाए ताकि शरीर को जरूरी सोडियम भी मिले और ब्लड प्रेशर भी नियंत्रण में रहे। यानी नमक पूरी तरह छोड़ना खुद अपने आप में एक गलत कदम हो सकता है — जरूरत है सिर्फ संतुलन की, वो भी डॉक्टर की निगरानी में।
ज्यादा नमक खाने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?
विशेषज्ञों की मानें तो अत्यधिक नमक के सेवन का असर सिर्फ हृदय और किडनी तक सीमित नहीं रहता। रिपोर्टों के अनुसार, ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी जमा होने लगता है, जिसकी वजह से हाथ, पैर और चेहरे पर सूजन महसूस हो सकती है। इसके अलावा हड्डियों की मजबूती पर भी इसका नकारात्मक असर देखा गया है। लंबे समय तक ज्यादा नमक खाने की आदत हड्डियों से कैल्शियम के रिसाव को बढ़ा सकती है, जिससे भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
कम सोडियम वाले विकल्पों को लेकर सावधानी जरूरी
आजकल बाजार में लो-सोडियम सॉल्ट यानी कम सोडियम वाले नमक के विकल्प भी उपलब्ध हैं, जिनमें सोडियम की जगह पोटेशियम की मात्रा ज्यादा रखी जाती है। हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि, इस तरह के लो सोडियम सॉल्ट का सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए और बिना सलाह के खुद से किसी तरह का बदलाव नहीं करना चाहिए। खासकर किडनी की समस्या वाले मरीजों के लिए पोटेशियम की अधिकता भी खतरनाक साबित हो सकती है, इसलिए यह बदलाव हमेशा मेडिकल सलाह के दायरे में ही किया जाना चाहिए।
नमक कम करने के व्यावहारिक तरीके
अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट से जुड़ी रिसर्च टीम की डायटीशियन एलिसन ब्राउन के हवाले से यह भी सामने आया है कि ज्यादातर लोगों के लिए हाई-सोडियम फूड्स से बचना मुश्किल होता है, क्योंकि नमक हर जगह छिपा होता है और लोगों को अक्सर पता ही नहीं चलता कि किन खाद्य पदार्थों में इसकी मात्रा ज्यादा है, इसलिए विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि, खाना खरीदते समय पैकेट पर लिखे न्यूट्रिशन लेबल जरूर पढ़ें, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड कम से कम खाएं, और घर के ताजा भोजन को प्राथमिकता दें। स्वाद बढ़ाने के लिए नमक की जगह नींबू, अदरक, लहसुन और अन्य मसालों का इस्तेमाल एक कारगर और सेहतमंद तरीका माना जाता है।
डॉक्टर से सलाह लें ये लोग
डॉक्टरों और स्वास्थ्य संगठनों की सलाह को मिलाकर देखें तो एक बात साफ हो जाती है नमक शरीर के लिए जरूरी जरूर है, लेकिन इसकी अधिकता धीरे-धीरे शरीर को अंदर से कमजोर करती चली जाती है। WHO की सलाह के मुताबिक, रोजाना 5 ग्राम से कम नमक का सेवन एक सुरक्षित सीमा मानी जाती है, लेकिन जिन लोगों को पहले से हाई बीपी, हृदय रोग या किडनी की समस्या है, उनके लिए यह मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय होनी चाहिए।
सही जानकारी और थोड़ी सी सजगता के साथ इस आदत को बदला जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि हम अपने खाने की आदतों पर ध्यान दें, न कि सिर्फ स्वाद पर।
नोट: यह लेख डॉक्टरों की सार्वजनिक सलाह और स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्टों पर आधारित है। किसी भी बीमारी की स्थिति में अपने आहार में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या डायटीशियन से जरूर सलाह लें।
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