सुबह उठते ही आती है खट्टी डकार तो हो जाएं सावधान, लीवर दे रहा ये संकेत

सुबह आंख खुलते ही अगर मुंह में खट्टा स्वाद महसूस हो, बार-बार खट्टी डकार आए और सीने में जलन बनी रहे, तो अक्सर लोग इसे मामूली एसिडिटी समझकर कोई घरेलू उपाय कर लेते हैं और आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह लापरवाही आपको भारी पड़ सकती है। दरअसल बार-बार होने वाली खट्टी डकार सिर्फ एसिडिटी की नहीं बल्कि आपके पाचन तंत्र, लिवर और यहां तक कि पेट में बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसी गंभीर समस्याओं की चेतावनी हो सकती है। शरीर जब अंदर से परेशान होता है, तो वह इसी तरह के संकेत देता है और अगर इन संकेतों को समय पर नहीं समझा गया तो बात बड़ी बीमारी तक पहुंच सकती है।

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 क्यों आती है खट्टी डकार

हमारे पेट में खाना पचाने के लिए हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है। यह एसिड जब सामान्य मात्रा में हो तो पाचन सही रहता है, लेकिन जब यही एसिड जरूरत से ज्यादा बनने लगता है या खाना ठीक से नहीं पच पाता तो यह एसिड ऊपर की तरफ भोजन नली तक पहुंच जाता है, जिससे खट्टी डकार, सीने में जलन, मुंह में कड़वाहट और गैस जैसी तकलीफें शुरू हो जाती हैं।

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आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे एसिड रिफ्लक्स या गर्ड की श्रेणी में रखता है जबकि आयुर्वेद में इसे बढ़े हुए पित्त दोष का असर माना जाता है। दोनों ही नजरिए से यह समस्या गंभीरता से लेने वाली है क्योंकि अगर इसका समय पर इलाज न हो तो यह भोजन नली को नुकसान पहुंचा सकती है और लंबे समय में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि, आज के दौर में खट्टी डकार की समस्या इतनी आम होती जा रही है, तो उसके पीछे हमारी बदलती जीवनशैली का सबसे बड़ा हाथ है। देर रात तक जागकर तला-भूना और ज्यादा मसालेदार खाना खाना, कोल्ड ड्रिंक और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों की आदत, शराब और धूम्रपान, जल्दी-जल्दी बिना चबाए खाना और खाने के तुरंत बाद लेट जाना, ये सभी आदतें पेट के पीएच लेवल को बिगाड़ देती हैं।

जब पेट का पीएच लेवल असंतुलित होता है, तो गैस बनने लगती है और खट्टी डकार की समस्या तेजी से बढ़ जाती है। इसके अलावा तनाव और खराब नींद भी इस समस्या को और गंभीर बना देते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ये दोनों चीजें लगभग हर किसी के जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं, इसीलिए यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।

बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी हो सकती है वजह

यहां एक और अहम बात जो बहुत कम लोग जानते हैं वह यह है कि, कुछ मामलों में खट्टी डकार का कारण पेट में बैक्टीरियल इन्फेक्शन भी हो सकता है। हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक एच. पाइलोरी नामक बैक्टीरिया पेट में इन्फेक्शन फैलाता है जिससे बदबूदार डकार, पेट फूलना और एसिड रिफ्लक्स की शिकायत हो सकती है। यह बैक्टीरिया दुनिया भर में पेट की बीमारियों का एक बड़ा कारण माना जाता है और भारत में भी इसके मामले काफी अधिक हैं।

इसके अलावा इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम यानी आईबीएस, लैक्टोज इनटोलरेंस और पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी बार-बार डकार आने की वजह बन सकती हैं, इसलिए जब भी यह समस्या लगातार बनी रहे तो खुद से इलाज करने की बजाय किसी विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी है।

ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से करें संपर्क

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि, अगर हफ्ते में कई बार लगातार खट्टी डकार आ रही है और उसके साथ पेट दर्द, उल्टी, दस्त, अचानक वजन कम होना या खाना निगलने में दिक्कत जैसे लक्षण भी नजर आ रहे हैं तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये सब मिलकर किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। लंबे समय तक एसिडिटी बनी रहने पर भोजन नली से जुड़ी गंभीर बीमारी जैसे इसोफेगाइटिस या बैरेट्स इसोफेगस का खतरा भी बढ़ सकता है

घरेलू उपाय

अच्छी बात यह है कि अगर समस्या शुरुआती दौर में है तो कुछ आसान घरेलू उपायों से राहत मिल सकती है। आयुर्वेद में इस समस्या से निपटने के लिए कई सरल नुस्खे बताए गए हैं। भोजन के बाद सौंफ और मिश्री खाने से पाचन बेहतर होता है और गैस की समस्या कम होती है। गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीना भी फायदेमंद माना गया है। खाली पेट नारियल पानी पीने से पेट का एसिड नियंत्रित रहता है और शरीर हाइड्रेट भी रहता है।

अपनाएं ये आदतें

एक्सपर्ट्स कुछ सरल लेकिन असरदार आदतों को अपनाने की सलाह देते हैं, जो इस समस्या से बचाव में काफी मददगार साबित होती हैं। खाने के तुरंत बाद लेटने से बचना चाहिए और खाने के बाद थोड़ी देर टहलना पाचन के लिए बेहद फायदेमंद होता है। रात में सोते समय बाईं करवट सोने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या कम होती है क्योंकि इस पोजीशन में पेट का एसिड ऊपर की तरफ नहीं जा पाता।

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पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, कार्बोनेटेड ड्रिंक से दूरी बनाए रखना और एक बार में ज्यादा खाने की बजाय दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा खाना भी पाचन को दुरुस्त रखने में बड़ी भूमिका निभाता है। तनाव को कम करने के लिए योग और ध्यान को दिनचर्या में शामिल करना भी इस समस्या से बचाव में सहायक है।

खट्टी डकार को कभी भी मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह आपके शरीर की वह भाषा है जिसमें वह आपको कुछ जरूरी बातें बताने की कोशिश कर रहा है। समय रहते इसे समझें, जीवनशैली सुधारें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से मिलने में देर न करें।

 

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