राहुल गांधी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया सावरकर पर टिप्पणी वाला मामला

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दरअसल, स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि की शिकायत को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया है। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी किया गया समन और उससे जुड़ी पूरी कार्रवाई भी कर हो गई। इस फैसले के साथ पिछले करीब चार वर्षों से चल रही यह कानूनी लड़ाई थम गई है।

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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि, शिकायत दर्ज कराने से पहले जो जरूरी कानूनी मंजूरी ली जानी चाहिए थी, वह इस मामले में हासिल नहीं की गई। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, शिकायतकर्ता के वकील और उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से दाखिल किए गए हलफनामे में इस मंजूरी को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी या दस्तावेज पेश नहीं किए गए।

Rahul Gandhi

अदालत ने इसे प्रक्रियागत खामी मानते हुए टिप्पणी की कि आवश्यक वैधानिक अनुमति के बिना शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकती। इसी आधार पर बेंच ने मजिस्ट्रेट द्वारा पारित समन आदेश को रद्द करते हुए पूरी शिकायत को ही खारिज कर दिया।

गौरतलब है कि, इससे पहले भी अप्रैल 2025 में इसी मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा था कि स्वतंत्रता सेनानियों पर की गई टिप्पणियों को लेकर वह किसी को छूट नहीं देगा और भविष्य में ऐसी बयानबाजी दोहराई गई तो अदालत स्वतः संज्ञान ले सकती है। उस समय अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ चल रही कार्यवाही पर रोक तो लगा दी थी, लेकिन साथ ही उन्हें सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणियों से परहेज करने की सलाह भी दी थी। शुक्रवार का फैसला उसी लंबित मामले का अंतिम पटाक्षेप माना जा रहा है।

कब और कहां हुआ था विवाद

यह पूरा मामला नवंबर 2022 का है, जब राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला जिले से गुजर रहे थे। 17 नवंबर 2022 को एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने सावरकर से जुड़ी एक टिप्पणी की थी, जिसे लेकर देशभर में जबरदस्त राजनीतिक बवाल मच गया था। भारतीय जनता पार्टी और सावरकर के परिवार से जुड़े लोगों ने इस बयान को स्वतंत्रता सेनानी के अपमान के तौर पर देखा और इसका कड़ा विरोध किया था। इसी विवाद के बाद राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का आपराधिक मामला दर्ज कराया गया।

इस मामले में शिकायतकर्ता के तौर पर अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे सामने आए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि, राहुल गांधी ने रैली के दौरान जान-बूझकर सावरकर की छवि खराब करने और उन्हें बदनाम करने के इरादे से टिप्पणी की। शिकायतकर्ता का यह भी कहना था कि, यह टिप्पणी कोई आकस्मिक बयान नहीं थी, बल्कि सावरकर को बदनाम करने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा थी। इसी शिकायत के आधार पर लखनऊ की एक अदालत ने राहुल गांधी को समन जारी करते हुए मामले में कार्यवाही शुरू की थी।

निचली अदालतों में क्या हुआ

राहुल गांधी ने अपने खिलाफ जारी समन को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का रुख किया था, लेकिन 4 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया और कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट का हस्तक्षेप उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने सुझाव दिया कि राहुल गांधी को इसके लिए सत्र न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका (रिवीजन पिटीशन) दाखिल करनी चाहिए।

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इसके अलावा शिकायतकर्ता नृपेंद्र पांडे की ओर से जून 2023 में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उनकी शिकायत खारिज किए जाने के खिलाफ भी एक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी, जिसे सत्र न्यायालय ने बाद में स्वीकार कर लिया था। इस तरह मामला लंबे समय तक अलग-अलग अदालतों के बीच उलझा रहा।

अपनी सुरक्षा और कार्यवाही से राहत पाने के लिए राहुल गांधी ने आखिरकर निचली अदालत के समन आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। मामले की सुनवाई के दौरान उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की और अदालत के सामने यह दलील रखी कि उनके मुवक्किल का इरादा किसी को आहत करने का नहीं था। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पर भी सवाल उठाया था कि एक जिम्मेदार राजनेता होने के नाते ऐसी टिप्पणियों से बचना चाहिए।

 केस को नहीं मिली थी कानूनी मंजूरी

शुक्रवार के फैसले के साथ ही सावरकर मानहानि मामले में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पूरी तरह समाप्त हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि जब तक मामले में जरूरी कानूनी मंजूरी हासिल नहीं की जाती, तब तक इस तरह की शिकायत पर कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। इसे कांग्रेस नेता और उनकी पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक और कानूनी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में राहुल गांधी को कई मानहानि से जुड़े मामलों का सामना करना पड़ा है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बावजूद यह सवाल बना रहेगा कि क्या शिकायतकर्ता पक्ष उचित मंजूरी हासिल करने के बाद दोबारा नई शिकायत दर्ज करा सकता है या नहीं। फिलहाल कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रियागत खामी के आधार पर मामला खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में उचित प्रक्रिया अपनाकर नई कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती। बहरहाल, अभी के लिए राहुल गांधी को इस मामले में बड़ी राहत मिल गई है और उनके खिलाफ जारी समन तथा शिकायत, दोनों को अदालत ने रद्द कर दिया है।

 

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