
प्रयागराज। ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी की अग्रिम जमानत याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में कल, 27 फरवरी को सुनवाई होने वाली है। यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है, जिसके तहत POCSO एक्ट के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच में होगी।
यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर 72 में फ्रेश कॉज लिस्ट में क्रमांक 142 पर सूचीबद्ध है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने झूंसी थाने में दर्ज एफआईआर से संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की मांग की है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार समेत पांच अन्य पक्षकारों को शामिल किया गया है।
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ये है मामला
प्रयागराज के झूंसी थाने में गत 21 फरवरी को विशेष POCSO अदालत के आदेश पर अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य) ने अदालत में दो नाबालिगों (14 और 17 वर्षीय) को पेश कर गंभीर आरोप लगाए थे, जिसके मुताबिक, पिछले एक वर्ष में माघ मेले के दौरान और अन्य अवसरों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उनका यौन शोषण किया गया।

अदालत ने पुलिस की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करने और विवेचना का आदेश दिया था। एफआईआर में POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के अलावा अन्य आपराधिक धाराएं भी लगाई गई हैं। पुलिस ने एक नाबालिग पीड़ित का मेडिकल परीक्षण कराया है, जबकि दूसरे पीड़ित के बयान और साक्ष्यों की जांच जारी है। जांच में नार्को टेस्ट की भी मांग उठी है, जिस पर आगे विचार हो सकता है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया साजिश
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आरोपों को पूरी तरह निराधार और साजिशपूर्ण बताया है। उन्होंने दावा किया है कि, यह मामला झूठा है और राजनीतिक या अन्य उद्देश्यों से प्रेरित है। स्वामी ने कहा है कि, जांच में सारा सच सामने आ जाएगा और दोषियों को सजा मिलेगी। कुछ रिपोर्टस में यह भी उल्लेख है कि स्वामी ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी पर पुलिस के साथ मिलकर फर्जी आरोप लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने नार्को टेस्ट की मांग भी की है ताकि सच्चाई सामने आ सके। एक अन्य व्यक्ति रामाकांत दीक्षित ने दावा किया कि, आशुतोष ने उन्हें झूठे आरोप लगाने के लिए दबाव डाला था, बदले में पैसे और सुरक्षा का लालच दिया गया। इससे मामला और विवादास्पद हो गया है।
धर्म जगत में हलचल
यौन शोषण के आरोप और मेडिकल में पुष्टि होने के बाद धर्म जगत में हलचल मच गई है। कुछ संतों और संगठनों ने स्वामी के पक्ष में बयान दिए हैं और सभी आरोपों को साजिश बताया। वहीं कुछ ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। शंकराचार्य पर इस तरह के आरोप के लगते ही उत्तर प्रदेश सरकार पर भी सवाल उठने लगे हैं। सवाल है कि, क्या यह राजनीतिक दबाव का नतीजा है। सपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने मामले को धार्मिक भावनाओं से जोड़कर टिप्पणियां की हैं।
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बता दें कि, माघ मेले के दौरान स्नान व्यवस्था और प्रशासनिक दखल के दौरान उपजे विवाद के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और राज्य सरकार के बीच तनातनी चल रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि, मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। ऐसे में जांच की निष्पक्षता भी सवालों के घेरे में हैं।
शंकराचार्य ने दायर की अग्रिम जमानत याचिका
फ़िलहाल, स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी है, जिस पर 27 फरवरी को सुनवाई होगी। दरअसल, POCSO मामलों में गिरफ्तारी अनिवार्य होती है। ऐसे में अग्रिम जमानत की अर्जी महत्वपूर्ण है। कल अगर शकंराचार्य को अग्रिम जमानत मिल जाती है, तो जांच सामान्य रूप से चलेगी, अन्यथा गिरफ्तारी की संभावना बढ़ जाएगी। चूंकि मामला संवेदनशील और हाई प्रोफाइल है, तो पुलिस भी फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ा रही है।
साथ आए श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष
हालांकि, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थन में अब संत समाज के लोग आ गये हैं और उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने इस मामले में शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी (आशुतोष पांडेय) और आरोप लगाने वाले छात्रों पर नार्को टेस्ट एवं पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की मांग की है।
फलाहारी महाराज ने इस संबंध में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि, आशुतोष ब्रह्मचारी एक हिस्ट्रीशीटर है, जो पहले गौकशी कराने में शामिल रहा है। फलाहारी बाबा का आरोप है कि आशुतोष ने शंकराचार्य को फंसाने के लिए साजिश रची है और 125 करोड़ हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें भी दूसरे मोबाइल नंबर से धमकी मिली है कि फर्जी केस में फंसाया जाएगा।
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