
नई दिल्ली। ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों में तैनात भारतीय सेना के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। सेना और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने संयुक्त रूप से एक विशेष प्रकार का डीजल तैयार किया है, जो अत्यंत कम तापमान में भी नहीं जमेगा। इस एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल को माइनस 42 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में तरल अवस्था में बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है। शुक्रवार को थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने इस नए ईंधन को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर लॉन्च किया।
इसे भी पढ़ें- अब गाजा में आयेगी शांति, हमास डालेगा हथियार, पीछे हटेगी इजराइली सेना!
हाई-एल्टीट्यूड इलाकों की बड़ी चुनौती
भारतीय सेना दुनिया के सबसे दुर्गम और मौसम की दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में तैनात है। सर्दियों में तापमान माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, जबकि गर्मियों में कुछ इलाकों में यह प्लस 50 डिग्री तक पहुंच जाता है। इतने विस्तृत तापमान दायरे में भारी हथियारों, टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और अन्य सैन्य साजो-सामान का संचालन बनाए रखना अपने आप में एक बड़ी चुनौती रही है।

लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती इलाकों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है, जहां सामान्य डीजल अत्यधिक ठंड में जमने लगता है। परिणामस्वरूप, टैंकों और बीएमपी जैसे बख्तरबंद वाहनों को युद्ध के लिए हमेशा तैयार रखने के उद्देश्य से रातभर बार-बार स्टार्ट करना पड़ता था, ताकि इंजन और पूरा सिस्टम सक्रिय बना रहे। यह प्रक्रिया न सिर्फ ईंधन की अतिरिक्त खपत करती थी, बल्कि इसमें तैनात जवानों के लिए भी अत्यंत थकाऊ और कठिन साबित होती थी।
सेना प्रमुख ने शेयर किए अनुभव
कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल धीरज सेठ ने इस नई तकनीक को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़ते हुए बताया कि, वे मूल रूप से आर्मर्ड कोर से जुड़े रहे हैं और अपने करियर के शुरुआती दो दशकों में, कमांडिंग ऑफिसर बनने से पहले तक, उनका पूरा कार्यक्षेत्र ईंधन, तेल और लुब्रिकेंट्स, विशेष रूप से डीजल के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रहा।
उन्होंने कहा कि, सैन्य जीवन का हर पहलू डीजल की उपलब्धता पर टिका होता था। टैंक में बचे ईंधन की मात्रा, बैरल में उपलब्ध तेल और वाहन की अंतिम क्रूजिंग रेंज, यह सब कुछ डीजल के इर्द-गिर्द घूमता रहता था। उन्होंने बताया कि, सेना में सेवा के दौरान अधिकतर समय डीजल के बैरल गिनने और उन्हें टैंकों तक पहुंचाने में ही बीता।
भारी और हल्के वाहनों दोनों के लिए फायदेमंद
सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि ,यह विशेष एक्सडब्ल्यूजी डीजल न केवल टैंक और अन्य भारी बख्तरबंद वाहनों यानी ‘ए’ श्रेणी के उपकरणों के लिए उपयोगी साबित होगा, बल्कि ट्रक और हल्के सैन्य वाहनों जैसे ‘बी’ श्रेणी के साजो-सामान के लिए भी अत्यधिक ठंड वाले क्षेत्रों में बेहद लाभदायक रहेगा। उन्होंने बताया कि, भारतीय सेना की एक बड़ी टुकड़ी उत्तरी सीमाओं और ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में तैनात रहती है, जहां इस तरह की तकनीकी प्रगति सीधा असर डालेगी।
अपने अनुभव साझा करते हुए जनरल सेठ ने बताया कि, हालांकि उन्हें अपनी रेजिमेंट के साथ इन क्षेत्रों में सेवा करने का सीधा अवसर नहीं मिला, लेकिन जिन दो रेजिमेंटों की उन्होंने कमान संभाली, वे शुरुआती दौर में न्योमा क्षेत्र में पायनियर रेजिमेंट के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने बताया कि इस लॉन्च समारोह से एक दिन पहले शाम को वे अपने साथियों के साथ इसी विषय पर चर्चा कर रहे थे। जब उन्होंने अपने साथियों से यह सुना कि, इस नए ईंधन के आने से पहले उन्हें किन परिस्थितियों में काम करना पड़ता था, तो उन्हें एहसास हुआ कि वह वाकई एक बेहद कठिन और थकान भरा अनुभव रहा होगा।
चालकों की मुश्किलें होंगी कम
जनरल सेठ ने विशेष रूप से वाहन चालकों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक चालकों को रातभर जागकर वाहनों को तीन-चार बार बार-बार स्टार्ट और बंद करना पड़ता था, ताकि सुबह वे बिना किसी दिक्कत के चालू हो सकें। इतनी मेहनत के बावजूद उनसे यह अपेक्षा की जाती थी कि वे अगली सुबह पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ अपने कर्तव्यों के लिए तैयार रहें। उन्होंने कहा कि यह स्थिति शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से जवानों पर भारी असर डालती थी।
सेना प्रमुख के अनुसार, नए एक्सडब्ल्यूजी डीजल से यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि, यह ईंधन सिर्फ सेना की परिचालन क्षमता को ही नहीं बढ़ाएगा, बल्कि सीमा पर तैनात जवानों का मनोबल भी ऊंचा करेगा। साथ ही, अत्यधिक ठंड की वजह से होने वाली शारीरिक और मानसिक थकान को भी काफी हद तक कम करेगा।
रणनीतिक दृष्टि से अहम
रक्षा विशेषज्ञों की मानें, तो यह पहल न केवल तकनीकी दृष्टि से बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत की उत्तरी सीमाएं, विशेष रूप से लद्दाख और उससे सटे इलाके, पिछले कुछ वर्षों में सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में सैन्य वाहनों की परिचालन तत्परता (ऑपरेशनल रेडीनेस) बनाए रखना किसी भी समय बेहद जरूरी हो जाता है।

पारंपरिक डीजल के जमने की समस्या के कारण अक्सर आपातकालीन स्थितियों में वाहनों को तुरंत चालू करने में देरी होने का खतरा बना रहता था। नए एक्सडब्ल्यूजी डीजल के आने से यह जोखिम काफी हद तक कम होने की उम्मीद है, जिससे सीमा पर तैनात सैन्य टुकड़ियां हर मौसम में और भी अधिक तत्परता से जवाब देने में सक्षम होंगी।
बढ़ेगी ऑपरेशनल क्षमता
बीपीसीएल और भारतीय सेना के इस संयुक्त प्रयास को रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीकी नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इस ईंधन का व्यापक उपयोग हाई-एल्टीट्यूड क्षेत्रों में तैनात सभी सैन्य इकाइयों तक पहुंचाए जाने की योजना है, जिससे न सिर्फ ऑपरेशनल दक्षता बढ़ेगी बल्कि सीमा पर डटे जवानों की जिंदगी भी कुछ आसान होगी।
इसे भी पढ़ें- PLA खेल रहा माइंडगेम, भारत के S-400 को तबाह कर सकता है चीनी सेना का रॉकेट?



