नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के अपने दो-दिवसीय दौरे के दौरान यूरोपीय संघ (ईयू) के 27 सदस्य देशों के समकक्षों के साथ अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक के दौरान यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया में बढ़ते वैश्विक तनाव जैसे गंभीर मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें भारत ने यूरोप के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया।
ईयू की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास के निमंत्रण पर पहुंची इस उच्च स्तरीय यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते के बाद पहली बड़ी कूटनीतिक मुलाकात है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2026 भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों के लिए एक परिवर्तनकारी वर्ष साबित हो रहा है, जहां दोनों पक्ष व्यापार, निवेश, रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
बैठक के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष अर्सुला फॉन डेर लायन सहित जर्मनी, यूनान और बेल्जियम के विदेश मंत्रियों के साथ अलग से संवाद कर बहुध्रुवीय विश्व में भारत-यूरोपीय संघ के बीच निरंतर बढ़ते तालमेल को रेखांकित किया। चर्चा के केंद्र में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के लिए तैयार किया गया व्यापक ढांचा भी रहा।
इसके अतिरिक्त, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई, क्योंकि वहां उपजे संकट के कारण वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। यह वार्ता न केवल आर्थिक और व्यापारिक हितों को साधने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी भारत और यूरोपीय संघ की साझा प्रतिबद्धता को मजबूती से प्रदर्शित करती है।



