
लखनऊ। एक्सप्रेसवे, डिजिटल पेमेंट, वक्फ संपत्ति, सरकारी भर्तियों और कानून-व्यवस्था से जुड़े अखिलेश यादव के आरोपों का कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि, अखिलेश यादव सत्ता हासिल करने के लिए बेचैन हैं। यही वजह है कि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकास कार्य उन्हें रास नहीं आते। राजभर के मुताबिक, सड़कें बनती हैं तो समय के साथ टूटती भी हैं, और टूटने पर संबंधित ठेकेदार उनकी मरम्मत भी करवाता है। उन्होंने सलाह दी कि, अगर अखिलेश को सड़कों की इतनी ही फिक्र है तो उन्हें अपने कार्यकाल में बनी सड़कों की हालत पर भी नजर डालनी चाहिए।
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‘डिजिटल पेमेंट पर टैक्स की बात कर भ्रम फैला रहे अखिलेश’
ऑनलाइन भुगतान पर शुल्क लगाए जाने के अखिलेश यादव के आरोप पर राजभर ने कहा कि, उन्हें इसकी सही जानकारी नहीं है। उनके अनुसार, 95 फीसदी आम जनता पर इसका कोई असर नहीं पड़ता, केवल सक्षम वर्ग के 5 फीसदी लोगों पर ही यह भार आता है। राजभर ने कहा कि विपक्ष इसी तरह की भ्रामक बातें फैलाकर जनता को गुमराह करने में जुटा है।

सीएए-एनआरसी का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि, इसके खिलाफ विपक्षी दलों ने जोरदार आंदोलन छेड़ा था और दिल्ली का शाहीन बाग देशभर में सुर्खियों में रहा, बावजूद इसके यह कानून लागू हो गया। राजभर ने दावा किया कि, कानून लागू होने के तीन साल बाद भी किसी मुसलमान को देश से बाहर नहीं निकाला गया।
वक्फ संपत्ति का हिसाब मांगते ही घबरा गया विपक्ष
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर राजभर ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि, नया कानून आते ही विपक्षी दल हायतौबा मचाने लगे। उनका कहना था कि, अब संपत्ति ‘उम्मीद’ पोर्टल पर दर्ज होने से इसकी चोरी संभव नहीं रह जाएगी।
राजभर ने आरोप लगाया कि, सपा, बसपा और कांग्रेस के शासनकाल में वक्फ की करोड़ों रुपये की संपत्ति को औने-पौने दामों में हासिल कर किसी ने होटल खड़ा कर दिया, तो किसी ने मॉल बना डाला या फिर उसे बेच दिया गया। उनके मुताबिक अब रिकॉर्ड दर्ज होने की नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
अखिलेश राज में बिकती थी सरकारी नौकरी
सरकारी भर्तियों पर अखिलेश यादव के दावों को खारिज करते हुए राजभर ने कहा कि उन्हें असल तथ्यों की जानकारी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि, योगी सरकार अब तक साढ़े नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दे चुकी है। वहीं, अखिलेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि, उस दौर में नौकरियां खुलेआम बिका करती थीं।
राजभर के अनुसार, जैसे ही किसी नौकरी का विज्ञापन निकलता था, शिवपाल यादव और उनका गुट तुरंत सक्रिय हो जाता था। दावा किया गया कि, पांच लाख से लेकर पंद्रह लाख रुपये तक की बोली लगाई जाती थी। पैसा वसूलने के बाद उम्मीदवारों की सूची तैयार होती थी, जिसे शिवपाल यादव बनाते थे और अखिलेश यादव उस पर मुहर लगा देते थे, फिर संबंधित विभाग उसी सूची के आधार पर नियुक्ति जारी कर देता था।
बिना पैसे नौकरी मिलने से परेशान हैं अखिलेश
राजभर ने कहा कि, अब योगी सरकार बिना किसी लेन-देन के पारदर्शी तरीके से नौकरियां दे रही है। इसी वजह से अखिलेश यादव बेचैन हैं। सत्ता में आने पर रोजगार देने के अखिलेश के वादे पर तंज कसते हुए उन्होंने सवाल किया, “आखिर कहां से देंगे नौकरी, क्या अपने घर से देंगे?” उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश खुलकर यह स्वीकार नहीं कर पा रहे कि सरकार बनने पर वे केवल अपनी जाति के लोगों को ही नौकरियां देंगे।
राजभर के मुताबिक, अखिलेश यादव ने अपने पांच साल के शासनकाल में सिर्फ अपनी बिरादरी को आगे बढ़ाने का काम किया, और अब उन्हें यह चिंता सता रही है कि योगी सरकार लगातार नौकरियां देती रही तो सत्ता वापसी पर उनके समर्थकों को रोजगार कैसे मिल पाएगा।
अखिलेश को दी आत्म मंथन की नसीहत
साइबर अपराध और महिला सुरक्षा से जुड़े अखिलेश यादव के आरोपों पर राजभर ने पलटवार करते हुए उन्हें आत्ममंथन की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार को उस दौर में गुंडों की सरकार कहा जाता था। मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए राजभर ने आरोप लगाया कि, जब मुजफ्फरनगर आग की लपटों में था और निर्दोष लोगों की जान जा रही थी, उस वक्त सैफई में नाच-गाने का आयोजन चल रहा था।
राजभर ने दावा किया कि, सपा सरकार के कार्यकाल में करीब एक हजार सांप्रदायिक दंगे हुए, जगह-जगह कर्फ्यू लगाना पड़ा और इन घटनाओं में 1,200 से अधिक लोगों की जान गई। उन्होंने बताया कि, उस दौर में हर जिले में एक न एक माफिया सक्रिय रहता था, गैंगवार आम बात थी और लोग हथियार लहराते हुए सरेआम सड़कों पर घूमते नजर आते थे।
राजभर ने सवाल उठाया कि, क्या अखिलेश यादव प्रदेश में फिर से वैसा ही माहौल चाहते हैं। उन्होंने योगी सरकार को कानून-व्यवस्था के मामले में सख्त बताते हुए कहा कि, आज अपराध करने वाला व्यक्ति महज 48 घंटे के भीतर सलाखों के पीछे पहुंच जाता है।
मंदिर भी बनाएंगे और मौलाना संग नमाज भी पढ़ेंगे
अखिलेश यादव के मंदिर निर्माण संबंधी बयान पर भी राजभर ने चुटकी ली। उन्होंने कहा कि जो नेता मंदिर बनवाने की बात करते हैं, वही दूसरी तरफ मौलानाओं के साथ बैठकर नमाज भी अदा करते हैं। राजभर ने तंजिया अंदाज में पूछा कि क्या वे मंदिर बनाकर वहां पूजा-अर्चना भी करेंगे और माथे पर तिलक लगाकर नमाज पढ़ने भी जाएंगे?
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