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चुनाव से पहले एक्शन मोड में योगी सरकार, विरोधियों को चित करने के लिए करेगी ‘BSP’ फार्मूले पर काम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में अब एक साल से भी कम का समय रह  गया है। प्रदेश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछानी भी शुरू कर दी है। सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा ने चुनाव में संभावित सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी-इनकंबेंसी को ध्यान में रखते हुए एक खास रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी ने इसके लिए ‘बीएसपी’ यानी बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं फोकस करने का फैसला लिया है।

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10 साल से सत्ता में है बीजेपी

गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश में पिछले 10 वर्षों से बीजेपी का शासन है, जो प्रदेश में पार्टी के लिए अब तक का सबसे लंबा और अभूतपूर्व शासनकाल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पार्टी ने वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की सरकार बनाई, लेकिन लगातार 10 साल तक सत्ता में रहने के बाद स्वाभाविक रूप से एंटी-इनकंबेंसी यानी सरकार विरोधी माहौल बनने की आशंका बनी रहती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने अब इससे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विशेष योजना तैयार की है।

Yogi Adityanath

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, किसी भी सत्ताधारी पार्टी के लिए एक दशक तक सत्ता में बने रहने के बाद जनता के बीच थकान या असंतोष की भावना पैदा होना एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है। ऐसे में बीजेपी की कोशिश है कि, चुनाव से पहले ही जनता की बुनियादी शिकायतों का समाधान कर लिया जाए, ताकि मतदान के समय पार्टी को किसी नकारात्मक माहौल का सामना न करना पड़े।

क्या है BJP का ‘BSP’ फॉर्मूला

पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, बीजेपी ने अपनी रणनीति के तहत तीन प्रमुख बुनियादी सुविधाओं बिजली, सड़क और पानी पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। यही है पार्टी क ‘BSP’  फार्मूला,  जहां B का मतलब बिजली, S का मतलब सड़क और P का मतलब पानी से है। पार्टी का मानना है कि ,ये तीनों मुद्दे सीधे तौर पर आम जनता के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े हुए हैं और इन पर बेहतर काम करके ही जनता का भरोसा बरकरार रखा जा सकता है।

राज्य सरकार ने मांगी प्रगति रिपोर्ट

इसी रणनीति के तहत राज्य सरकार ने हाल ही में पेयजल योजनाओं की प्रगति को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही सरकार ने प्रदेश भर के ग्रामीण इलाकों में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करने और बिजली वितरण में हो रहे घाटे यानी लाइन लॉस को कम करने के लिए भी कई नई पहलों की घोषणा की है।

उत्तर प्रदेश के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने हाल ही में आयोजित एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि, मानसून का सीजन समाप्त होने के बाद, यानी अक्टूबर महीने से प्रदेश भर में सड़क मरम्मत अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया जाए। इस बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को साफ तौर पर हिदायत दी कि इस काम में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पाइपलाइन बिछाने से खोदी गई सड़कों पर भी चर्चा

इसी बैठक के दौरान संबंधित अधिकारियों ने मंत्री को ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को हो रही परेशानियों की जानकारी भी दी। अधिकारियों ने बताया कि, ग्रामीण पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के तहत पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई जगहों पर सड़कों को खोदा गया था, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही है। इस पर मंत्री ने संबंधित विभागों को इन सड़कों की जल्द से जल्द मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इससे पहले भी मंत्री की ओर से एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया जा चुका है, जिसमें कहा गया था कि, प्रदेश के जिन गांवों में पानी की आपूर्ति पहले ही शुरू की जा चुकी है, वहां यदि किसी भी प्रकार की तकनीकी या अन्य समस्या सामने आती है, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी उसका समाधान 24 घंटे के भीतर सुनिश्चित करें। इसका उद्देश्य यह है कि ग्रामीणों को जलापूर्ति से जुडी किसी भी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े।

जनता की बुनियादी समस्याओं पर बीजेपी का पूरा फोकस

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि, बीजेपी इस बार चुनाव से पहले जनता की बुनियादी समस्याओं और मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने पर विशेष जोर दे रही है, ताकि, चुनाव प्रचार के दौरान जब पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जनता के बीच जाएं, तो उन्हें बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर किसी तरह की शिकायत न सुननी पड़े।

यही वजह है कि, पार्टी और सरकार दोनों स्तर पर ‘BSP’ यानी बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी समस्याओं को सबसे पहले प्राथमिकता के आधार पर हल करने पर काम किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बीजेपी चुनाव से पहले इन तीनों बुनियादी मुद्दों पर जमीनी स्तर पर संतोषजनक काम दिखा पाती है, तो इससे पार्टी को एंटी-इनकंबेंसी की चुनौती से निपटने में काफी मदद मिल सकती है।

कितनी प्रभावी होगी बीजेपी की ये रणनीति

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि, बीजेपी अपनी इस ‘BSP’ रणनीति को जमीनी स्तर पर किस हद तक प्रभावी ढंग से लागू कर पाती है। चूंकि उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े राज्यों में से एक है और यहां का चुनावी परिणाम राष्ट्रीय राजनीति को भी सीधे प्रभावित करता है, इसलिए सभी राजनीतिक दलों समेत आम जनता की निगाहें भी इस पर टिकी रहेंगी कि सरकार अपनी घोषणाओं को धरातल पर कितना उतार पाती है। फिलहाल पार्टी और सरकार, दोनों ही स्तर पर बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी गई है, जिसका असर आने वाले विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।

 

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