
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार को सत्ता संभाले करीब नौ वर्ष पूरे हो चुके हैं। मार्च 2017 में जब योगी ने प्रदेश की कमान संभाली थी, तब इसकी पहचान पिछड़ेपन, बदहाल कानून-व्यवस्था और धीमी विकास दर के तौर पर होती थी, लेकिन बीते एक दशक में तस्वीर काफी हद तक बदल गई है। अब ये न तो बीमारू राज्य कहलाता है और न ही पिछड़ा।
सरकारी आंकड़ों और रिपोर्ट कार्ड पर गौर करें तो, अर्थव्यवस्था, इंफ्रास्ट्रक्चर, कानून-व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं के मोर्चे पर प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है। जीएसडीपी में जहां तीन गुने का इजाफा हुआ है, तो वहीं एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट का नेटवर्क भी मजबूत हुआ है। और तो और पर्यावरण के क्षेत्र में भी इस साल प्रदेश ने बड़ी छलांग लगाई है।
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नतीजा ये रहा है कि, स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में यूपी के 16 शहरों ने जगह बनाई और लखनऊ ने इंदौर को पछाड़ते हुए देश में पहले स्थान प्राप्त कर लिया है। सरकार के नौ साल के कार्यकाल का यह लेखा-जोखा बताता है कि, किन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने सबसे ज्यादा प्रगति की और कहां चुनौतियां अभी बरकरार हैं।
अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) करीब 13 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है। यानी बीते नौ वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था करीब ढाई गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय भी लगभग 43 हजार रुपये से बढ़कर एक लाख बीस हजार रुपये से ऊपर पहुंच गई है, जो आम जनता की क्रय शक्ति में इजाफे का संकेत माना जा रहा है।

वर्ष 2026-27 के बजट में उत्तर प्रदेश ने 9.12 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया, जो प्रदेश के इतिहास में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है। इन आंकड़ों के आधार पर सरकार यह दावा करती है कि, उत्तर प्रदेश अब देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो गया है और आने वाले वर्षों में यह और मजबूत स्थिति में पहुंचने की दिशा में अग्रसर है।
निवेश के मोर्चे पर बड़ी उपलब्धि
निवेश के क्षेत्र में भी प्रदेश ने बड़ी सफलता हासिल की है। सरकार को अब तक 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं, जिनमें से 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं और उन पर काम भी शुरू हो चुका है।
योगी सरकार : नौ वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां एक नजर में
| क्षेत्र | 2017 (पहले) | अब (2026) |
|---|---|---|
| जीएसडीपी | ~₹13 लाख करोड़ | ₹36 लाख करोड़+ |
| प्रति व्यक्ति आय | ~₹43,000 | ₹1,20,000+ |
| बजट (2026-27) | — | ₹9.12 लाख करोड़ (सर्वाधिक) |
| निवेश प्रस्ताव | — | ₹50 लाख करोड़+ |
| धरातल पर परियोजनाएं | — | ₹15 लाख करोड़+ |
| एक्सप्रेसवे | 2 | 7+ (देश का सबसे बड़ा नेटवर्क) |
| एयरपोर्ट | 2 | 16-17 (5 अंतरराष्ट्रीय) |
| यूपी-112 रिस्पॉन्स टाइम | 1 घंटा+ | ~6-7 मिनट |
| कृषि विकास दर | ~8% | 18% |
| गन्ना भुगतान | — | ₹3.16-3.23 लाख करोड़ |
| चीनी मिलें (चालू) | — | 122 |
| सरकारी नौकरियां | — | 9 लाख+ (2 लाख+ पुलिस) |
| महिला सरकारी भर्ती | — | 1.75 लाख+ |
| स्टार्टअप | — | 50,000+ |
| पीएम आवास योजना (घर) | — | 62 लाख+ |
| जल जीवन मिशन (नल कनेक्शन) | — | 2.5 करोड़+ घर |
| मुफ्त राशन लाभार्थी | — | 15 करोड़ |
| एमबीबीएस सीटें | ~5,390 | 12,700 |
| पर्यटक संख्या (2025) | — | 156 करोड़+ |
इसके लिए सरकार ने 36 से अधिक सेक्टरल नीतियां बनाईं, ताकि अलग-अलग उद्योगों को प्रोत्साहन मिल सके। इसके साथ ही लखनऊ में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे बड़े आयोजनों के जरिए देश-विदेश के निवेशकों को उत्तर प्रदेश की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया गया, जिसका असर अब निवेश के आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है।
कानून-व्यवस्था में सख्ती का असर
कानून-व्यवस्था को लेकर योगी सरकार की नीति शुरू से ही जीरो टॉलरेंस की रही है। बुलडोजर कार्रवाई और माफिया तंत्र पर लगाम कसने के प्रयासों को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनाती है और इसे कानून के राज की स्थापना के तौर पर पेश करती है। पुलिस आपातकालीन सेवा यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम, जो पहले एक घंटे से भी ज्यादा हुआ करता था, अब घटकर करीब छह से सात मिनट रह गया है, जिससे आपात स्थिति में जनता को त्वरित सहायता मिल पा रही है। इसके अलावा प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में कमिश्नरेट प्रणाली लागू की गई है, जिससे पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक प्रभावी व जवाबदेह बनाया गया है।
एक्सप्रेसवे और कनेक्टिविटी का विस्तार
इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की तस्वीर सबसे ज्यादा बदली हुई नजर आती है। वर्ष 2017 में प्रदेश में महज दो एक्सप्रेसवे संचालित थे, जो अब बढ़कर सात से अधिक हो चुके हैं। यह देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क माना जाता है, जिसका हिस्सा राष्ट्रीय स्तर पर करीब 55 से 60% तक है।

एयरपोर्ट की संख्या भी दो से बढ़कर 16-17 हो गई है, जिनमें पांच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट शामिल हैं, जिनमें बहुप्रतीक्षित जेवर एयरपोर्ट भी शामिल है, जिसके उद्घाटन की तैयारियां चल रही हैं। इसके साथ ही प्रदेश की सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और शहरों में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार पर भी लगातार काम हुआ है, जिससे आम जनता की आवागमन सुविधा में इजाफा हुआ है।
कृषि क्षेत्र में सुधार
कृषि क्षेत्र में भी विकास दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो करीब आठ प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। गन्ना किसानों को इस अवधि में 3.16 से 3.23 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है, जिसे सरकार किसानों के हित में उठाया गया बड़ा कदम मानती है। प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हो रही हैं, जिससे गन्ना किसानों को समय पर भुगतान और रोजगार दोनों सुनिश्चित हुए हैं। खाद्यान्न उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज हुई है और दुग्ध उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर बना हुआ है, जो प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
रोजगार सृजन पर जोर
रोजगार के मोर्चे पर सरकार का दावा है कि, नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां प्रदेश के युवाओं को दी गई हैं, जिनमें दो लाख से ज्यादा भर्तियां अकेले पुलिस विभाग में हुई हैं। इसके अलावा एक लाख 75 हजार से अधिक महिलाओं को भी सरकारी नौकरियों में नियुक्ति दी गई है, जो महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में भी लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। वहीं प्रदेश में 50 हजार से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे युवाओं में उद्यमिता को बढ़ावा मिला है।
कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार
कल्याणकारी योजनाओं की बात करें तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 62 लाख से अधिक गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। जल जीवन मिशन के जरिए ढाई करोड़ से ज्यादा घरों तक शुद्ध पेयजल के लिए नल कनेक्शन पहुंचाया गया है। कोविड काल से लेकर अब तक करीब 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन का लाभ लगातार मिल रहा है, जिससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बड़ी राहत मिली है। इसके अलावा कन्या सुमंगला योजना और सामूहिक विवाह जैसी योजनाओं के जरिए भी सामाजिक कल्याण और बेटियों के उत्थान को बढ़ावा दिया गया है।
स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार
स्वास्थ्य क्षेत्र में एमबीबीएस की सीटें करीब 5,390 से बढ़कर 12,700 तक पहुंच गई हैं, जिससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के अवसरों में बड़ा विस्तार हुआ है। आयुष्मान भारत और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत करोड़ों लोगों को मुफ्त और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिला है। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड व्यवस्था लागू की गई है, ताकि मरीजों का इलाज सुगम और पारदर्शी हो सके। इसके साथ ही स्कूली छात्रों को टैबलेट व स्मार्टफोन वितरित किए गए हैं, जिससे डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा मिला है।
पर्यटन और संस्कृति को नई पहचान
पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और वर्ष 2025 में आयोजित महाकुंभ, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया, इस दिशा में बड़ी उपलब्धियां रही हैं।

इन आयोजनों ने न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दी। वर्ष 2025 में प्रदेश में एक सौ 56 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे, जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है।
वर्षवार प्रमुख घटनाक्रम
- वर्ष 2017 में सरकार गठन के साथ ही लघु और सीमांत किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया गया था और कानून-व्यवस्था सुधार की शुरुआत हुई। साथ ही वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना की नींव रखी गई।
- 2018-19 में नोएडा में सैमसंग का बड़ा प्लांट स्थापित हुआ और डिफेंस कॉरिडोर की नींव रखी गई। वहीं एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य में भी तेजी आई और गन्ना भुगतान व्यवस्था में सुधार हुआ।
- 2020-21 के कोविड काल में मुफ्त राशन वितरण और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही राम मंदिर के भूमि पूजन और निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और कई सिंचाई परियोजनाएं पूरी की गईं।
- 2022 में सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ और नई पर्यटन नीति लागू की गई, साथ ही निवेश समिट की तैयारियां शुरू हुईं और कृषि-एमएसएमई क्षेत्र में वृद्धि दर्ज हुई।
- 2023 में लखनऊ में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का भव्य आयोजन हुआ, जिसमें बड़े पैमाने पर समझौते हुए। वहीं पूर्वांचल और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे भी आम जनता के लिए शुरू किए गए और डिफेंस कॉरिडोर की प्रगति भी आगे बढ़ी।
- 2024 में जनवरी माह में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था, इसके अलावा गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य आगे बढ़ा और गन्ना भुगतान का सिलसिला जारी रहा।
- 2025 में प्रयागराज में महाकुंभ का सफल आयोजन हुआ, जिसमें रिकॉर्ड भीड़ जुटी और पर्यटकों की संख्या में भारी उछाल दर्ज देखने को मिला। साथ ही कृषि विकास दर भी ऊंची रही।
- 2026 में जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के उद्घाटन की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है, सरकार ने अपने नौ वर्षों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया है और साथ ही निवेश ग्राउंडिंग की प्रक्रिया भी लगातार जारी है।
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