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सख्ती का दिखा असर, वितरण हानि 20% से घटकर 13% पर आई
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एटीएंडसी हानि भी घटी, 31.19% से घटकर 17.83% हुई
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हाई लॉस फीडरों में घाटा 21% तक हुआ कम
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की बिजली व्यवस्था को मज़बूत बनाने और वितरण में होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर अब आंकड़ों में स्पष्ट रूप से नज़र आने लगा है। वर्ष 2020-21 में जहां वितरण हानि 20.63 प्रतिशत थी। वहीं वर्ष 2025-26 में यह घटकर 13.04 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इसी अवधि के दौरान एटीएंडसी हानि में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह 31.19 प्रतिशत से घटकर 17.83 प्रतिशत रह गई।
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बढ़ी फीडरों की संख्या
कृषि फीडरों को छोड़ दें तो प्रदेश में कुल फीडरों की संख्या 18,351 से बढ़कर 21,463 हो गई है, जिसमें लाभकारी फीडरों की संख्या 5,772 से बढ़कर 8,104 तक पहुंच गई है यानी 2,332 फीडर नए तौर पर लाभकारी श्रेणी में शामिल हुए हैं। लाभकारी फीडरों की कुल हिस्सेदारी भी 31 प्रतिशत से बढ़कर 38 प्रतिशत हो गई है। डिस्कॉमवार प्रदर्शन देखें तो पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम 53 प्रतिशत लाभकारी फीडरों के साथ प्रदेश में सबसे आगे रहा।

इसके बाद केस्को 39 प्रतिशत पर, दक्षिणांचल और मध्यांचल दोनों 37-37 प्रतिशत पर तथा पूर्वांचल 22 प्रतिशत के साथ रहा। ये आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि, योगी सरकार के कार्यकाल में बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक कुशल, जवाबदेह और आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है।
वसूली और नए कनेक्शन में आई तेजी
बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए योगी सरकार द्वारा लागू किए गए हाई लॉस क्लस्टर मॉडल के तहत प्रदेश में 703 क्लस्टर, 1703 फीडर, 42.21 लाख उपभोक्ता और 76,839 वितरण ट्रांसफार्मर को कवर किया गया, जो कुल उपभोक्ताओं का करीब 11 प्रतिशत बैठता है। इस विशेष अभियान के तहत अब तक 654 करोड़ 31 लाख रुपये की बकाया राशि की वसूली की जा चुकी है, जबकि इसी दौरान 1,01,548 नए बिजली कनेक्शन भी जारी किए गए हैं।
दक्षिणांचल डिस्कॉम का प्रदर्शन भी इस दौरान उल्लेखनीय रहा। यहां वितरण हानि 25.64 प्रतिशत से घटकर 14.78 प्रतिशत और एटीएंडसी हानि 31.03 प्रतिशत से घटकर 19.57 प्रतिशत तक आ गई। इसके साथ ही थ्रू-रेट भी 3.65 रुपये प्रति यूनिट से बढ़कर 4.06 रुपये प्रति यूनिट हो गया। दक्षिणांचल क्षेत्र में वर्ष 2025-26 के दौरान 105 करोड़ रुपये और चालू वित्तीय वर्ष में जुलाई माह तक 155 करोड़ रुपये की वसूली की जा चुकी है।
सख्त कार्रवाई का दिखा असर
ललितपुर के तालबेहट टाउन-2 फीडर पर एटीएंडसी हानि 63 प्रतिशत से घटकर महज़ 11 प्रतिशत रह गई। वहीं कासगंज के मणिकापुर सीरी फीडर पर यह 87 प्रतिशत से घटकर 53 प्रतिशत और मथुरा के राल फीडर पर 83.62 प्रतिशत से घटकर 47.82 प्रतिशत तक पहुंच गई।

आगरा, मथुरा, चित्रकूट, राठ और कोसी के टॉप-10 हाई लॉस फीडरों का कुल घाटा भी 22.53 करोड़ रुपये से घटकर 17.89 करोड़ रुपये रह गया, जो लगभग 21 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है।
मज़बूत हुआ वित्तीय अनुशासन
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह सुधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और यूपीपीसीएल अध्यक्ष के मार्गदर्शन तथा निरंतर निगरानी का ही परिणाम है। फीडर स्तर पर प्रतिदिन की जाने वाली समीक्षा, डेटा आधारित मॉनिटरिंग और फील्ड अधिकारियों की स्पष्ट जवाबदेही तय किए जाने से बिजली विभाग में वित्तीय अनुशासन काफी मज़बूत हुआ है, जिसके चलते राजस्व वसूली में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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