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आंगनबाड़ी बहनें बच्चों के पोषण का ध्यान रख विकसित भारत की नींव रखें: बेबी रानी मौर्य
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केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा, योगी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को बनाया विकास की आधारशिला
वाराणसी। नौवें राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश की महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि, इस वर्ष पोषण माह की थीम ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि, बच्चों के पोषण की अहम जिम्मेदारी आंगनबाड़ी बहनों के कंधों पर है और वे बच्चों के पोषण तथा शुरुआती विकास का ख्याल रखते हुए विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करने में जुटी हैं।
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मंत्री ने बताया कि, आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्म पका हुआ भोजन, सामुदायिक भागीदारी और जवाबदेही, पोषण के साथ-साथ बच्चों के शुरुआती विकास, और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के जरिए मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं को जमीनी स्तर पर लागू किया जा रहा है। साथ ही केंद्रों पर बच्चों के लिए किताबें और खिलौने भी मुहैया कराए जा रहे हैं।
तेजी से बढ़ा जन भागीदारी अभियान
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि, पोषण माह अभियान कुपोषण को खत्म करने और स्वस्थ तथा सशक्त भारत बनाने का संकल्प है। उन्होंने याद दिलाया कि, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2018 में इस पोषण अभियान की शुरुआत की थी और आज जनभागीदारी के बल पर यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जब सरकारी नीतियां सीधे जनता के जीवन से जुड़ती हैं, तो वे समय के साथ समाज की संस्कृति का हिस्सा बन जाती हैं।

अन्नपूर्णा देवी ने बताया कि, देशभर में 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ और सशक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने जनविश्वास को ही विकास की मजबूत नींव बना दिया है। उन्होंने आगे कहा कि, एक दौर था जब उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जाती थीं, लेकिन साल 2017 में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो उन्होंने महिला सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल किया।
गर्भवती महिलाओं को दो जा रही आर्थिक सहायता
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री तथा मध्य प्रदेश के धार से सांसद सावित्री ठाकुर ने कार्यक्रम की शुरुआत में बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी को नमन किया। उन्होंने बताया कि, बीते आठ वर्षों में पोषण अभियान के तहत देशभर में 150 करोड़ से अधिक जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है, जबकि सुकन्या समृद्धि योजना के जरिए बेटियों का भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आईं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। गुजरात के गांधीनगर से आईं भावना ने बताया, अब आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति काफी सुधर गई है। लोगों का भरोसा बढ़ने से वे अपने बच्चों को नियमित रूप से केंद्रों पर भेजने लगे हैं।

गर्भवती महिलाएं पोषाहार को लेकर कार्यकर्ताओं से सलाह लेती हैं। बच्चों के जन्म के बाद भी अभिभावक उनके खानपान को लेकर मार्गदर्शन मांगते हैं। भावना ने यह भी बताया कि, कई बच्चे पहले घर पर खाना खाने में आनाकानी करते थे, लेकिन केंद्र पर उनकी जरूरतों के अनुसार भोजन दिए जाने पर वे चाव से खाना खाने लगे।
शिशुओं के स्वास्थ्य पर खास ध्यान
तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई से आईं आर. शंकरी ने बताया कि, जन्म से लेकर छह माह तक शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास पर खास ध्यान दिया जाता है। उन्होंने कहा, बच्चों का बेहतर विकास देखकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को यह संतोष मिलता है कि उनकी मेहनत से देश का भविष्य संवर रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पोषण और बाल विकास के क्षेत्र का ‘फ्रंटलाइन वॉरियर’ बताया।
गोरखपुर के बसियाखोर आंगनबाड़ी केंद्र की संध्या सिंह ने बताया कि केंद्र पर बच्चों का वजन और लंबाई समय-समय पर मापी जाती है, जिससे उनकी पोषण स्थिति का सही आकलन हो पाता है। उन्होंने बताया कि जो बच्चे कुपोषण की ओर बढ़ते नजर आते हैं, उन पर विशेष निगरानी रखी जाती है और उनके अभिभावकों से मिलकर खानपान व देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जाती है।
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