
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जिन खनिजों की जरूरत होती है, उनमें आयोडीन सबसे अहम माना जाता है। हालांकि, शरीर को इसकी बहुत ही कम मात्रा की आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी भूमिका इतनी अहम है कि, इसकी कमी पूरे स्वास्थ्य तंत्र को प्रभावित कर सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन शरीर में थायरॉइड हार्मोन बनाने की प्रक्रिया में मदद करता है। यही हार्मोन मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर तथा शरीर की सामान्य वृद्धि जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
इसे भी पढ़ें- एक्सपर्ट्स की सलाह, दिमाग को हेल्दी और एक्टिव रखने के लिए डाइट में शामिल करें ये फूड्स
बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि, आयोडीन की सबसे ज्यादा जरूरत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को होती है। बच्चों में मस्तिष्क के समुचित विकास और सीखने-समझने की क्षमता को बढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में आयोडीन का सेवन जरूरी माना जाता है। वहीं गर्भावस्था के दौरान भी महिलाओं को आयोडीन की जरूरत पर विशेष ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यह भ्रूण के स्वस्थ विकास में अहम भूमिका निभाता है।
आयोडीन की कमी का शरीर पर असर
स्वास्थ्य जानकारी देने वाली संस्था क्लीवलैंड क्लिनिक की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि शरीर में आयोडीन की कमी लंबे समय तक बनी रहे, तो इसका असर स्वास्थ्य पर अलग-अलग तरीकों से नजर आ सकता है। सबसे पहले, आयोडीन की कमी से गले में थायरॉइड ग्रंथि के बढ़ने की समस्या हो सकती है, जिसे आमतौर पर घेंघा रोग कहा जाता है। इसके अलावा, थायरॉइड हार्मोन का स्तर कम होने पर व्यक्ति को थकान महसूस होना, वजन बढ़ना और सामान्य से ज्यादा ठंड लगने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि, बच्चों में आयोडीन की कमी उनके सामान्य विकास के साथ-साथ मानसिक क्षमताओं को भी प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी आयोडीन की कमी से जुड़ी हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त आयोडीन न मिल पाना भी चिकित्सकों के लिए चिंता का विषय बना रहता है, क्योंकि इसका सीधा असर मां और होने वाले बच्चे, दोनों की सेहत पर पड़ सकता है।
शरीर के लिए क्यों इतना अहम है यह खनिज
चिकित्सा विशेषज्ञ कहते हैं कि, आयोडीन का सबसे महत्वपूर्ण काम थायरॉइड हार्मोन के निर्माण में सहायता करना है। ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ-साथ ऊर्जा के सही इस्तेमाल और सामान्य शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं। बच्चों के विकास की अवस्था में इसका महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसी दौरान शरीर और मस्तिष्क, दोनों की वृद्धि तेजी से होती है। यही वजह है कि, विशेषज्ञ रोजाना के भोजन में आयोडीन के पर्याप्त स्रोतों को शामिल करने की सलाह देते हैं।
आयोडीन की कमी दूर करने के लिए इन चीजों शामिल करें डाइट में
आयोडीन युक्त नमक
शरीर में आयोडीन की जरूरत पूरी करने का सबसे आसान और सुलभ तरीका है आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना। रोजाना खाना बनाते समय सामान्य नमक की जगह आयोडीन युक्त नमक का चुनाव करने से शरीर की आयोडीन संबंधी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी आगाह करते हैं कि नमक का सेवन जरूरत से ज्यादा करना सेहत के लिए ठीक नहीं है। इसलिए बेहतर यही है कि नमक की मात्रा बढ़ाने के बजाय सही प्रकार के नमक का चुनाव किया जाए।
समुद्री खाद्य पदार्थ
समुद्री खाद्य पदार्थों को भी आयोडीन के बेहतरीन स्रोतों में गिना जाता है। समुद्री शैवाल (सी-वीड) में स्वाभाविक रूप से आयोडीन की मात्रा काफी अधिक पाई जाती है। इसके अलावा मछली और अन्य समुद्री खाद्य पदार्थों से भी शरीर को अच्छी मात्रा में आयोडीन मिल सकता है। अपनी सामान्य खानपान की आदतों और स्थानीय उपलब्धता के हिसाब से इन्हें आहार में शामिल किया जा सकता है।
दूध और डेयरी उत्पाद
दूध और उससे बने उत्पाद भी आयोडीन प्रदान करने वाले महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। दूध, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पादों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर आयोडीन की जरूरत पूरी की जा सकती है। ये न सिर्फ आयोडीन बल्कि कैल्शियम और प्रोटीन जैसे अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति में भी मददगार साबित होते हैं।
अंडे और आलू
अंडे को भी आयोडीन का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इनमें प्रोटीन की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है, इसलिए इन्हें रोजाना के भोजन में शामिल करना एक उपयोगी विकल्प हो सकता है। वहीं, आलू में भी कुछ मात्रा में आयोडीन मौजूद होता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक खाद्य पदार्थ पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग खाद्य स्रोतों को मिलाकर संतुलित आहार लेना कहीं ज्यादा फायदेमंद रहता है।
आयोडीन युक्त नमक को सुरक्षित कैसे रखें
आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना जितना जरूरी है, उसे सही तरीके से संभालकर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, आयोडीन नमी, गर्मी और लंबे समय तक रोशनी के संपर्क में रहने से धीरे-धीरे कम हो सकता है, इसलिए नमक को खुले बर्तन में रखने के बजाय सूखी और अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखना बेहतर विकल्प है।

इसके अलावा, खाना बनाते समय नमक को शुरुआत में ही डालने के बजाय खाना लगभग तैयार होने के आसपास डालने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे आयोडीन की मात्रा को बनाए रखने में मदद मिलती है।
कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर बरतें सावधानी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ खाद्य पदार्थों को ‘गोइट्रोजेनिक’ खाद्य पदार्थ कहा जाता है, जो थायरॉइड से जुड़ी प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। इनमें पत्तागोभी, फूलगोभी और सोयाबीन जैसी चीजें प्रमुख रूप से शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इन खाद्य पदार्थों को पूरी तरह से खाना बंद कर दिया जाए। संतुलित मात्रा में इनका सेवन सामान्य आहार का हिस्सा बना रह सकता है, लेकिन जो लोग पहले से आयोडीन की कमी से जूझ रहे हैं, उन्हें अपने खानपान को लेकर किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
इसे भी पढ़ें- क्या है गैस्ट्रो-शील्ड डाइट, जो पेट को देती है आराम, 40 की उम्र के बाद वालों के लिए क्यों जरूरी?
नोट: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई डाइट या स्वास्थ्य संबंधी बदलाव को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।



