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अमेरिकी नाकेबंदी से तिलमिलाया ईरान, होर्मुज के पास बनाएगा नया ‘नो-एंट्री जोन’

काहिरा। मध्य-पूर्व में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से न हो पाने से ईरान बुरी तरह भड़क उठा है। इसी बौखलाहट के बीच ईरान ने अब एक बड़ा और आक्रामक कदम उठाने का संकेत दिया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नए प्रमुख मोहसिन रेज़ाई ने रविवार को साफ शब्दों में कहा कि तेहरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहरी हिस्से में एक नया ‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्र’ घोषित करने की योजना बना रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गहराता जा रहा है।

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किस मकसद से बनाया जाएगा नया प्रतिबंधित क्षेत्र

ईरान के सरकारी प्रसारण माध्यम से बातचीत करते हुए मोहसिन रेज़ाई ने इस प्रस्तावित क्षेत्र के मकसद पर भी रोशनी डाली। उनके अनुसार, इस नए क्षेत्र को स्थापित करने का उद्देश्य उन तमाम जहाजों की गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखना और उन्हें रोकना होगा, जिनके बारे में ईरान को यह शक है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने की कोशिश कर रहे हैं।

Hormuz

हालांकि, रेज़ाई ने इस योजना को लेकर अधिक तकनीकी या ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की, लेकिन उनके बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि, ईरान अब समुद्री रास्ते पर अपनी पकड़ और सख्त बनाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि, रेज़ाई का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब इससे ठीक एक दिन पहले ही अमेरिका ने ईरान के तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए हमला किया था, जिसके बाद क्षेत्र में हालात और भी तनावपूर्ण हो गए हैं।

अमेरिकी सैन्य बेड़े को निशाना बना रहा ईरान

अमेरिका द्वारा ईरानी तेल टैंकरों पर की गई यह कार्रवाई कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि यह ईरान की ओर से अमेरिकी युद्धपोतों पर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों का सीधा जवाब बताया जा रहा है। रक्षा और सामरिक मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान द्वारा किए गए ये मिसाइल हमले क्षेत्र में तनाव को और भड़काने वाला बेहद खतरनाक कदम साबित हो सकते हैं।

ध्यान देने वाली बात यह है कि, इससे पहले तक समुद्र में ईरान की ओर से किए जाने वाले हमलों का मुख्य निशाना आमतौर पर वाणिज्यिक यानी व्यापारिक जहाज ही हुआ करते थे, लेकिन अब सीधे अमेरिकी सैन्य बेड़े को निशाना बनाए जाने से यह टकराव एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंच गया है।

रेज़ाई ने यह भी संकेत दिया कि, इस नए ‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्र’ की औपचारिक घोषणा आने वाले दिनों में की जा सकती है। उन्होंने इस प्रस्तावित क्षेत्र की भौगोलिक सीमा को लेकर भी एक अहम बयान दिया। उनके मुताबिक, यह क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी की मौजूदा सीमा से शुरू होकर होर्मुज जलडमरूमध्य की दिशा में आगे बढ़ेगा और इसी रास्ते से होते हुए फारस की खाड़ी तक विस्तृत होगा। रेज़ाई ने साफ चेतावनी देते हुए कहा कि जो भी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने के स्पष्ट इरादे के साथ इस निषिद्ध क्षेत्र में दाखिल होगा और जिसकी पहचान की जा सकेगी, उसे ईरान की प्रतिबंध सूची में शामिल कर लिया जाएगा।

कई हफ्तों से जारी है नाकेबंदी

फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरान वर्तमान में जारी अमेरिकी नाकाबंदी की सीमा को वास्तव में किस भौगोलिक क्षेत्र तक मानता है। बता दें कि अमेरिका ने यह सख्त नाकाबंदी मुख्य रूप से ईरान के महत्वपूर्ण बंदरगाहों को निशाना बनाने और तेहरान को अपने तेल भंडार को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों तक पहुंचाने से रोकने के मकसद से लागू की है।

अमेरिकी सेना की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस पूरी नाकाबंदी अभियान में 20 से भी अधिक अमेरिकी युद्धपोत सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहे हैं। रविवार तक की स्थिति के अनुसार, इस सख्त नाकाबंदी की वजह से करीब 92 वाणिज्यिक जहाजों को अपना तय मार्ग बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जबकि तीन जहाजों को पूरी तरह निष्क्रिय भी कर दिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच संघर्ष को रोकने के मकसद से हुई कूटनीतिक बातचीत विफल हो चुकी है, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक और सैन्य, दोनों ही मोर्चों पर दबाव बढ़ाने के लिए नए और सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हालांकि इन तमाम कोशिशों के बावजूद क्षेत्र में रुक-रुककर जारी इस लड़ाई का फिलहाल कोई निकट भविष्य में अंत होता नज़र नहीं आ रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी लगातार बढ़ती जा रही है।

 जहाजों पर लगातार हो रहे हमले

इस बीच ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश कर रहे कुछ जहाजों पर हमलों का सिलसिला अब भी लगातार जारी है। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य तेहरान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने का एक बेहद अहम और प्रभावी हथियार बनकर उभरा है, क्योंकि दुनिया के एक बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति इसी जलमार्ग से होकर गुज़रती है। गौरतलब है कि यह पूरा युद्ध अमेरिका और इज़राइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए हमलों के साथ शुरू हुआ था, जिसके बाद से क्षेत्र में हालात लगातार बिगड़ते चले गए हैं।

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रविवार को इससे पहले ईरान ने एक और बड़ा दावा किया था, जिसमें उसने कहा था कि, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे एक अमेरिकी मानवरहित यानी बिना चालक दल वाले जहाज पर सफलतापूर्वक हमला किया है। हालांकि अमेरिकी सेना ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘पूरी तरह झूठा’ करार दिया है। इस तरह के परस्पर विरोधाभासी दावे इस बात का संकेत देते हैं कि दोनों पक्षों के बीच सूचना के स्तर पर भी एक अलग तरह की जंग छिड़ी हुई है।

पीछे हटने के मूड में नहीं है तेहरान

ईरान द्वारा नए ‘प्रवेश निषिद्ध क्षेत्र’ की घोषणा किए जाने की योजना इस बात का साफ संकेत है कि तेहरान अब पीछे हटने के मूड में बिल्कुल नहीं है और वह अमेरिकी दबाव के जवाब में उतनी ही आक्रामकता से जवाबी रणनीति अपनाने को तैयार है। विशेषज्ञों की मानें तो अगर यह नया क्षेत्र वास्तव में घोषित कर दिया जाता है, तो इससे न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव और बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका सीधा और गहरा असर पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में ईरान इस योजना को लेकर आधिकारिक तौर पर क्या घोषणा करता है और अमेरिका इसका किस तरह से जवाब देता है।

 

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