
नई दिल्ली। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बिश्केक समिट में भारत की तरफ से अपनाए गए कूटनीतिक रुख ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में हलचल मचा दी है। अमेरिका के कड़े दबाव के बावजूद भारत ने ईरान पर हुए हमले की निंदा का समर्थन किया। वहीं, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के साथ अलग से द्विपक्षीय बैठक कर दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई गति देने का संकेत भी दिया। भारत के इस साहसिक कदम को रणनीतिक स्वायत्तता की मिसाल बताते हुए अब पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल जीडी बख्शी (रिटायर्ड) ने भी प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की है।
इसे भी पढ़ें- मध्य एशिया दौरे पर PM मोदी, SCO समिट में पुतिन-जिनपिंग से होगी मुलाकात
ब्रिक्स में भी होगी चर्चा
मेजर जनरल जीडी बख्शी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि, बिश्केक में हुए SCO समिट में मजबूत और साहसी रुख अपनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि, आने वाले समय में नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS समिट में भी इस मुद्दे पर आगे विस्तृत चर्चा हो सकती है।

अपनी पोस्ट में मेजर जनरल बख्शी ने बताया कि, भारत ने न सिर्फ ईरान पर हुए हमले और उसकी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा का समर्थन किया, बल्कि इससे आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान के साथ हुई अलग बैठक में ईरान के साथ व्यापारिक और कमर्शियल संबंधों को फिर से मजबूत करने की इच्छा भी जताई। उनके अनुसार, यह कदम भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है।
बड़े बदलाव के संकेत
मेजर जनरल बख्शी ने अपनी पोस्ट में इस घटनाक्रम को वैश्विक राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर बताया। उनके शब्दों में, भारत का यह साहसी रुख दुनिया में एक अहम शक्ति केंद्र और ‘ग्लोबल साउथ’ के नेता के तौर पर भारत की स्थिति और हैसियत को सही साबित करता है। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय जिस बदलाव को देख रही है, वह एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक बदलाव है, यानी मल्टीपोलैरिटी यानी बहु-ध्रुवीयता की शुरुआत हो चुकी है।
उनके मुताबिक, अब दुनिया एकध्रुवीय व्यवस्था से आगे बढ़कर एक ऐसी दिशा में जा रही है, जहां कई देश और क्षेत्रीय शक्तियां अपने-अपने हितों के अनुसार स्वतंत्र फैसले लेने में सक्षम हो रही हैं, और भारत इस बदलाव में एक अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
अमेरिका की धमकियों को किया दरकिनार
मेजर जनरल जीडी बख्शी ने अपने बयान में इस बात पर खास जोर दिया कि, भारत ने यह रुख अमेरिका की धमकियों और दबाव की परवाह किए बगैर अपनाया है। उन्होंने कहा कि यह वाकई एक साहसी कदम था, क्योंकि इसमें सेकेंडरी प्रतिबंधों और सजा जैसी कार्रवाई की आशंका से जुड़े अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने पीछे हटने के बजाय अपने रुख पर कायम रहने का फैसला किया।
उनके अनुसार, यह घटनाक्रम भारत की रणनीतिक स्वायत्तता यानी ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ को बनाए रखने की दिशा में एक मजबूत संकेत है। मेजर जनरल बख्शी ने इस संदर्भ में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने ट्रंप प्रशासन की तथाकथित अनुचित मांगों और दबाव के आगे झुकने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने के अपने मजबूत संकल्प को दिखाया है।
कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज
भारत के इस रुख को लेकर कूटनीतिक और सामरिक विश्लेषकों के बीच भी चर्चा तेज हो गई है। SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर भारत की ओर से इतनी स्पष्टता के साथ रुख अपनाना कई विशेषज्ञों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। खासतौर पर उस समय जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर विभिन्न देशों पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान के बीच हुई द्विपक्षीय मुलाकात को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच आपसी व्यापार, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की जानकारी सामने आई है।
BRICS समिट पर टिकीं निगाहें
मेजर जनरल बख्शी ने अपनी पोस्ट में आने वाले BRICS समिट का भी जिक्र किया, जो नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है। उनके अनुसार, SCO समिट में भारत ने जो रुख दिखाया है, उसकी और विस्तृत चर्चा आगामी BRICS समिट के दौरान होने की संभावना है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ इस आगामी सम्मेलन को लेकर भी विशेष रुचि दिखा रहे हैं।
गौरतलब है कि, SCO और BRICS जैसे मंच पिछले कुछ वर्षों में वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए हैं, जहां सदस्य देश आपसी सहयोग के साथ-साथ अपने-अपने रणनीतिक हितों को लेकर भी अपनी बात रखते हैं। भारत की भूमिका इन मंचों पर लगातार अहम होती जा रही है।
नई बहस को मिली नई बहस
SCO समिट में भारत के रुख को लेकर मेजर जनरल जीडी बख्शी की यह टिप्पणी एक पूर्व सैन्य अधिकारी के नजरिए से भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता पर उनकी राय को दर्शाती है। हालांकि यह उनका व्यक्तिगत आकलन है, लेकिन इसने भारत की कूटनीतिक स्थिति को लेकर एक नई बहस को जन्म जरूर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस रुख को आगे किस तरह से आगे बढ़ाता है और BRICS समिट में इस पर क्या नई दिशा तय होती है।
इसे भी पढ़ें- आतंकवाद का हर कृत्य आपराधिक, इसके खात्मे के लिए SCO का एकजुट होना जरूरी : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह



