
मेरठ। बहुजन समाज पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद की सियासी राह में उतार-चढ़ाव थमने का नाम ही नहीं ले रहे। साल 2017 में पहली बार सियासी मंच पर कदम रखने वाले आकाश आनंद को इसके बाद कई बार उसी मंच से नीचे उतारा जा चुका है, और हर बार यह फैसला किसी और ने नहीं, बल्कि खुद उनकी बुआ और बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने लिया है।
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गुरुवार को एक बार फिर मायावती ने आकाश आनंद को जोरदार झटका दे दिया। लखनऊ में बुलाई गई पार्टी की राष्ट्रीय स्तर की बैठक में मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि आकाश आनंद अभी सियासी तौर पर परिपक्व नहीं हुए हैं, उन्हें अभी और समय लगेगा, इसलिए फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

इस फैसले को सियासी हलकों में मायावती की तरफ से आकाश आनंद को पूरी तरह किनारे किए जाने के तौर पर देखा जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि, इससे चार दिन पहले हुई बैठक और गुरुवार को बुलाई गई इस राष्ट्रीय बैठक, दोनों में ही मायावती ने आकाश आनंद को बुलाना तक जरूरी नहीं समझा।
हालांकि, इन बैठकों में आकाश के चाचा आनंद कुमार और उनके भाई ईशान आनंद जरूर मौजूद रहे। गुरुवार को हुई इसी बैठक में आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से भी हटा दिया गया। लगातार तीसरी बार मिले इस सियासी झटके के बाद अब बीएसपी में आकाश आनंद की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
निभा रहे थे नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी
गौरतलब है कि, आकाश आनंद इससे पहले पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर की अहम भूमिका निभा रहे थे। हाल ही में मायावती ने उन्हें साल 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम तय करने और उनका ऐलान करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। इसी क्रम में 10 अगस्त को उन्होंने हाथरस के सादाबाद में अपनी पहली जनसभा करते हुए उम्मीदवार का नाम घोषित किया था। इस सभा को उत्तर प्रदेश में पार्टी के चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के तौर पर देखा गया था।
इस जनसभा में आकाश आनंद ने भाजपा की प्रदेश और केंद्र सरकार के साथ-साथ समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर भी तीखे राजनीतिक हमले बोले थे। इतना ही नहीं, उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहकर संबोधित भी किया था। इस पर सफाई देते हुए आकाश ने कहा था कि, उनकी उम्र महज 30 साल है जबकि अखिलेश यादव करीब 50 साल के हैं, ऐसे में उन्हें ‘अंकल’ कहना किसी भी तरह से अनादर नहीं माना जाना चाहिए।
आकाश आनंद का सियासी सफर
आकाश आनंद की सियासी कहानी साल 2017 से जुड़ी है, जब सहारनपुर के शब्बीरपुर में हुई जातीय हिंसा के बाद आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद तेजी से चर्चा में आए थे। उसी दौर में मायावती ने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देकर सहारनपुर का दौरा किया था। यही वह मौका था जब वे पहली बार आकाश आनंद को अपने साथ सियासी मंच पर लेकर आई थीं। उसी वक्त से आकाश को मायावती का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाने लगा था। हालांकि, इसके बाद से आकाश आनंद की सियासी राह कई बार उतार-चढ़ाव से होकर गुजरी।
शादी के बाद बढ़े थे विवाद
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सबसे पहले आकाश आनंद को पार्टी के प्रचार अभियान की कमान सौंपी गई थी। उस दौरान उन्होंने भाजपा सरकार पर जमकर हमले बोले और सरकार के खिलाफ बेहद मुखर होकर अपनी बात रखी। यहां तक कि, उन्होंने जूता मारकर सरकार हटाने जैसी विवादित टिप्पणी तक कर दी थी, जिसके बाद उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश में एक मुकदमा भी दर्ज हुआ। इस मुकदमे के तुरंत बाद मायावती ने उन्हें सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया था। हालांकि कुछ ही दिनों बाद उन्हें दोबारा नेशनल कोऑर्डिनेटर बना दिया गया।
इसी बीच आकाश आनंद की शादी बीएसपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बेटी से हुई, लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद मायावती ने अशोक सिद्धार्थ पर पार्टी के कामकाज में दखल देने का आरोप लगाते हुए उन्हें बीएसपी से बाहर कर दिया। इसका सीधा असर आकाश आनंद पर भी पड़ा और उन्हें भी किनारे कर दिया गया। हालांकि, लंबे इंतजार और आकाश आनंद व उनके ससुर, दोनों की तरफ से माफी मांगे जाने के बाद उनकी पार्टी में वापसी हो सकी थी।
24 घंटे में ही वापस ले लिया गया अधिकार
पिछले महीने ही आकाश आनंद को एक बार फिर उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रचार और उम्मीदवार चयन की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि अगले ही दिन मायावती ने उम्मीदवार चयन का पूरा अधिकार अपने पास सुरक्षित रखते हुए आकाश आनंद को केवल तय किए गए उम्मीदवारों के नाम की सार्वजनिक घोषणा करने भर की जिम्मेदारी दी। इसी सीमित जिम्मेदारी के तहत आकाश आनंद ने 10 अगस्त को हाथरस की सादाबाद और उसके बाद 25 अगस्त को गौतमबुद्ध नगर की जेवर विधानसभा सीट पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया था।

इसी दौरान मायावती ने एक और बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को दोबारा बीएसपी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। ससुर के बाद अब दामाद आकाश आनंद के भी सियासी पर कतर दिए गए हैं। चार दिन पहले बुलाई गई उत्तर प्रदेश की बैठक और गुरुवार को हुई राष्ट्रीय बैठक, दोनों में मायावती ने आकाश आनंद को जानबूझकर दूर रखा और आखिरकार उन्हें अपरिपक्व करार देते हुए उनकी सभी जिम्मेदारियां पूरी तरह वापस ले लीं।
भविष्य पर संकट
पार्टी के भीतर लगातार मिल रहे इन झटकों के बाद यह सवाल गहराता जा रहा है कि, आखिर बीएसपी में आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाएगा। एक वक्त मायावती के करीबी और उनके संभावित उत्तराधिकारी माने जाने वाले आकाश आनंद के लिए यह सिलसिला किसी बड़े झटके से कम नहीं है। पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह अब इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह सिर्फ एक अस्थायी सियासी रणनीति है, या फिर मायावती वाकई अपने भतीजे को उत्तराधिकार की दौड़ से पूरी तरह बाहर करने के मूड में हैं। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर बीएसपी की आगे की रणनीति और स्पष्ट हो सकेगी।
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