
वाशिंगटन। मध्य-पूर्व में एक बार फिर से आग धधकने लगी है। यहां अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव तेजी से बढ़ गया है, जिसकी आंच पूरी दुनिया में महसूस की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ताजा बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक से बड़ा उछाल आ गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता का माहौल बन गया है। ब्रेंट क्रूड का भाव 96 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं, एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
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वैश्विक समुदाय में हलचल
बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि, सामरिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब अमेरिका का नियंत्रण लगभग स्थापित हो चुका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि, ईरान की अर्थव्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। अब वह पतन के कगार पर है। इसके साथ ही ट्रंप ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी सिरे से नकार दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि, अमेरिका ईरान को बातचीत की टेबल पर लाने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखी गई पोस्ट में स्पष्ट किया कि, वे ईरान के साथ किसी बातचीत की पहल नहीं कर रहे और उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि, तेहरान किसी समझौते पर दस्तखत करता है या नहीं। उनका कहना था कि, मौजूदा हालात, जिसमें अमेरिका का होर्मुज पर लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरानी अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है, उन्हें कहीं अधिक बेहतर लगते हैं। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी और निवेशकों में घबराहट फैल गई।
तेजी से उछले कच्चे तेल के दाम
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। रिपोर्ट लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुकी थी। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड का भाव भी बढ़कर करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक जा पहुंचा। इससे भी ज्यादा तेजी मर्बन क्रूड ऑयल में देखने को मिली, जिसकी कीमत उछलकर 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। तेल कीमतों में यह उछाल इस आशंका को बल दे रहा है कि, आने वाले दिनों में वैश्विक महंगाई और अधिक बढ़ सकती है, खासकर उन देशों में जो ऊर्जा आयात पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं।
एशियाई शेयर बाजारों में भूचाल
तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों पर साफ नजर आया। जापान का प्रमुख सूचकांक निक्केई करीब 1800 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ कारोबार करता देखा गया। हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी करीब 300 अंकों की गिरावट के साथ रेड जोन में रहा। इससे भी ज्यादा नुकसान दक्षिण कोरिया के बाजार को हुआ, जहां कॉस्पी इंडेक्स में करीब 4 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई।
इस वैश्विक बिकवाली का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी के लिए संकेतक माने जाने वाला गिफ्ट निफ्टी भी गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करता देखा गया, जिससे संकेत मिलता है कि, बुधवार को घरेलू बाजार में भी बिकवाली का दबाव बना रह सकता है।
अमेरिका के ईरान पर लगातार हमले
इस बीच अमेरिकी सेना की ओर से ईरान के भीतर सैन्य ठिकानों पर लगातार हमले जारी हैं। बताया जा रहा है कि, अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों पर किए गए हमलों के दौरान सिरिक क्षेत्र में एक विवाह समारोह को भी निशाना बनाया, जिससे नागरिक हताहतों को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस घटनाक्रम के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया गया है। ईरान का कहना है कि उसने जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।

अमेरिकी सेंट्रल कमान यानी CENTCOM की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि, अमेरिकी सेना ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें हवाई सुरक्षा प्रणालियां, रडार सिस्टम, नौसैनिक संपत्तियां, समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता वाले ठिकाने और संचार तंत्र से जुड़े स्थल शामिल हैं।
अमेरिकी सेना का कहना है कि, यह कार्रवाई हाल ही में IRGC द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की कोशिशों के जवाब में की गई है।
दुनिया पर पड़ेगा टकराव का असर
विश्लेषकों का मानना है कि, अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य टकराव इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के एक बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करती है। फिलहाल दुनिया भर के निवेशक और सरकारें इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का माहौल बने रहने की आशंका जताई जा रही है।
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