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US-Iran Tension: ट्रंप का दावा- खार्ग द्वीप तबाह, ईरान ने जार्डन में ध्वस्त किए अमेरिकी सैन्य ठिकाने

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह महीने से जारी जंग ने सोमवार को एक बार फिर से भयानक रूप ले लिया है। बीते करीब एक महीने में ऐसा पहली बार हुआ है, जब अमेरिकी सेना ने सीधे ईरान के अंदर घुसकर हमला किया और इसके कुछ ही घंटों बाद तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सनसनीखेज दावा किया कि, ईरान का सबसे अहम तेल निर्यात केंद्र, खार्ग द्वीप, अब पूरी तरह तबाह हो चुका है।

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ट्रंप का दावा

ट्रंप ने रविवार देर रात अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ पर एक छोटी-सी पोस्ट डाली, जिसमें उन्होंने लिखा कि, खार्ग द्वीप के परखच्चे उड़ चुके हैं। इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया, जिसे लेकर मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि यह वीडियो असल फुटेज नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से तैयार किया गया एनिमेटेड क्लिप है।

US-Iran Tension

इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र सबूत अब तक सामने नहीं आया है और न ही ईरान की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया दी गई है। व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से भी फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ है।

गौरतलब है कि, यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने खार्ग द्वीप को लेकर बड़े-बड़े दावे किए हों। मार्च 2026 में भी अमेरिकी वायुसेना ने खार्ग द्वीप पर एक बड़ा हवाई हमला किया था, जिसमें द्वीप पर मौजूद 90 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। हालांकि उस समय भी अमेरिका ने जानबूझकर तेल और गैस के बुनियादी ढांचे को बख्श दिया था। उसके बाद से ट्रंप कई मौकों पर खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी भी दे चुके हैं।

लारक द्वीप पर हमला

ताजा तनाव की शुरुआत रविवार को हुई, जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थित लारक द्वीप पर मौजूद दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया। सेंटकॉम के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के जवान समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस रॉकेट लॉन्च करने की तैयारी करते देखे गए थे, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। यह हमला बीते करीब एक महीने में ईरानी क्षेत्र पर पहला पुष्ट अमेरिकी हमला माना जा रहा है।

हॉकिन्स ने यह भी कहा कि, अमेरिकी सेना इस पूरे इलाके पर करीबी नजर बनाए हुए है और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से होकर गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तैयार है। उल्लेखनीय है कि, बीते सप्ताह ही अमेरिकी सेना ने इस जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से बारूदी सुरंगें साफ करने का काम पूरा किया था। खबरों के मुताबिक इस हमले में दो लोगों की मौत भी हुई और दो अन्य घायल हुए।

जॉर्डन में ईरान का पलटवार

अमेरिकी हमले के कुछ ही घंटों बाद ईरान की आईआरजीसी ने बयान जारी कर कहा कि, उसने जॉर्डन में मौजूद दो अमेरिकी सैन्य हवाई अड्डों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है, जिसमें भारी नुकसान होने का दावा किया गया। राज्य प्रसारक आईआरआईबी के मुताबिक, यह हमला अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए ताजा हमले के जवाब में किया गया। रिपोर्टों के अनुसार निशाना बनाई गई जगहों में अम्मान के पूर्व में स्थित मुवफ्फक सल्ती एयरबेस भी शामिल था, जहां अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

जॉर्डन की सेना ने पुष्टि की कि सोमवार तड़के उसके हवाई क्षेत्र में दाखिल हुई आठ मिसाइलों को उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने रोक लिया, हालांकि सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये मिसाइलें कहां से दागी गई थीं। एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि जॉर्डन की ओर दागी गई लगभग सभी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया है और फिलहाल किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

छह महीने से जारी है संघर्ष

यह ताजा टकराव उस व्यापक जंग का हिस्सा है जो 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई से शुरू हुई थी। इसके बाद से यह संघर्ष कई मोर्चों पर फैल चुका है। ईरान की ओर से जॉर्डन के अलावा संयुक्त अरब अमीरात पर भी बार-बार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा चुके हैं, जिनमें अब तक कई नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान जा चुकी है। दूसरी ओर, अमेरिका और उसके सहयोगी देश लगातार ईरान के सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते रहे हैं।

US-Iran Tension

खार्ग द्वीप की अहमियत इस पूरे संघर्ष में खास तौर पर बनी हुई है, क्योंकि यह द्वीप ईरान के करीब 90 फीसदी तेल निर्यात को संभालता है। यहां स्थित बड़े तेल भंडारण केंद्र पाइपलाइनों के जरिए ईरान के सबसे बड़े तेल और गैस क्षेत्रों से जुड़े हैं। इससे पहले 1980 के दशक में सद्दाम हुसैन के नेतृत्व वाले इराक ने ईरान-इराक युद्ध के दौरान इस द्वीप पर भारी बमबारी की थी।

 कई बार हुईं शांति की कोशिशें 

इस पूरे टकराव के बीच कई बार अस्थायी संघर्षविराम और बातचीत की कोशिशें भी हुई हैं, लेकिन हर बार कुछ समय बाद तनाव फिर भड़क उठा है। ट्रंप प्रशासन का कहना रहा है कि वाशिंगटन ईरान में एक नई और अधिक उदार सरकार के साथ गंभीर बातचीत में जुटा है, लेकिन साथ ही यह चेतावनी भी दी जाती रही है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सामान्य कारोबार के लिए तुरंत नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट, तेल कुओं और खार्ग द्वीप को पूरी तरह तबाह कर देगा।

फिलहाल स्थिति यह है कि अमेरिका के ताजा दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, जबकि जमीन पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। वैश्विक तेल बाजार, जो पहले से ही इस लंबे खिंचे संघर्ष से प्रभावित है, इस नई घटना के बाद और अस्थिर हो सकता है। दुनिया भर के देश और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, और आने वाले दिनों में इस संघर्ष के और आगे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

 

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