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मेडिकल स्टोर से दवा खरीदते समय बरतें सावधानी, नहीं तो जा सकती है जान

अहमदाबाद। गुजरात के अहमदाबाद से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने लोगों की सेहत को खतरे में डाल दिया है। यहां दिल की बीमारी में इस्तेमाल होने वाली एक बेहद जरूरी दवा की नकली खेप पकड़ी गई हैं। जांच एजेंसियों ने Nicardia Retard 10 MG नाम की दवा की करीब 7.20 लाख नकली टैबलेट बरामद की हैं। यह दवा हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को दी जाती है। इतनी बड़ी तादाद में नकली दवा का बाजार में पहुंचना यह साफ दर्शाता है कि नकली दवाओं का यह पूरा रैकेट कितने बड़े और संगठित स्तर पर काम कर रहा था।

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 जांच में जुटीं एजेंसियां

फिलहाल इस पूरे मामले में आगे की जांच जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि, आखिर ये लाखों नकली टैबलेट कहां-कहां तक सप्लाई हो चुकी थीं और कितने मरीजों तक ये पहुंची होंगी।

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ऐसे गंभीर मामलों के सामने आने के बाद यह जानना आम लोगों के लिए बेहद जरूरी हो जाता है कि, नकली दवा की पहचान कैसे की जाए, इसके इस्तेमाल से क्या-क्या गंभीर नुकसान हो सकते हैं और अगर किसी को गलती से नकली दवा मिल गई हो तो उसकी शिकायत कहां और कैसे दर्ज करानी चाहिए।

कैसे पहचाने दवा नकली है

विशेषज्ञों का कहना है कि, नकली दवा को पहचानना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर इसका अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है। सबसे पहले दवा की पैकिंग को गौर से देखना चाहिए। असली दवा की पैकिंग पर छपाई हमेशा एकदम साफ, स्पष्ट और सही होती है, जबकि नकली दवा के पैकेट पर अक्षर धुंधले, स्पेलिंग गलत या पैकेजिंग का रंग हल्का अलग नजर आ सकता है।

इसके साथ ही दवा के पैकेट पर दिए गए बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट को भी जरूर चेक करना चाहिए। अगर यह जरूरी जानकारी मिटी हुई नजर आए या पूरी तरह गायब हो या ठीक से प्रिंट न हुई हो, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है कि दवा नकली है।

QR कोड से करें पता

आज कल कई प्रतिष्ठित दवा कंपनियां अपने पैकेट पर QR कोड या होलोग्राम भी दे रही हैं, जिन्हें मोबाइल से स्कैन करके यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि, दवा असली है या नकली। साथ ही यह भी सलाह दी जाती है कि, अगर कोई दवा हमेशा से जानी-पहचानी और भरोसेमंद दुकान के बजाय किसी अनजान जगह से या बहुत ही सस्ते दाम पर मिल रही हो, तो वहां से दवा खरीदने से पहले पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए।

इतना ही नहीं, दवा खाने के बाद अगर उसका असर सामान्य से अलग महसूस हो या शरीर में कोई नई तरह की दिक्कत सामने आए, तो यह भी नकली दवा मिलने का एक अहम संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही उस दवा के इस्तेमाल को तत्काल बंद कर देना चाहिए।

 हो सकते हैं गंभीर नुकसान

नकली दवा के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान बेहद गंभीर हो सकते हैं, खासतौर पर तब, जब बात दिल की बीमारी जैसी नाजुक और जानलेवा स्थिति की हो। हार्ट पेशेंट्स को दी जाने वाली दवाएं आमतौर पर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और दिल की धड़कन को सामान्य बनाए रखने का काम करती हैं। ऐसे में अगर किसी मरीज को गलती से नकली दवा मिल जाए, तो उससे न सिर्फ बीमारी नियंत्रण में नहीं आती, बल्कि मरीज की स्थिति और भी ज्यादा बिगड़ सकती है।

इसके साथ ही कई बार नकली दवाओं में गलत या शरीर के लिए हानिकारक केमिकल भी मिला दिए जाते हैं, जो सीधे तौर पर शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। हार्ट पेशेंट्स के मामले में यह खतरा और भी ज्यादा बढ़ जाता है, क्योंकि सही समय पर सही और असरदार दवा न मिलने की वजह से हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थिति भी बन सकती है, जो सीधे तौर पर मरीज की जान के लिए खतरा साबित हो सकती है।

 कहां करें शिकायत?

अगर किसी व्यक्ति को यह शक हो कि, उसे नकली दवा मिली है, तो सबसे पहली और जरूरी सलाह यही है कि, उस दवा का इस्तेमाल तुरंत बंद कर दिया जाए और बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क किया जाए। इसके बाद इससे जुड़ी शिकायत संबंधित राज्य के फूड एंड ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन यानी एफडीसीए में दर्ज कराई जा सकती है।

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देश के हर राज्य में यह विभाग मौजूद होता है और नकली, मिलावटी या अवैध रूप से बेची जा रही दवाओं से जुड़ी शिकायतें इसी विभाग में दर्ज कराई जाती हैं। इसके अलावा इस तरह की शिकायत केंद्रीय स्तर पर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन यानी सीडीएससीओ के पास भी की जा सकती है, जिसकी आधिकारिक वेबसाइट पर आम लोगों के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

बिल संभालकर रखें

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि, जिस दुकान या मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी गई है, उसका बिल हमेशा संभालकर रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि शिकायत दर्ज कराते समय यह बिल एक अहम सबूत के तौर पर काम आता है। बिना बिल के शिकायत को साबित करना और जांच एजेंसियों के लिए दोषी दुकानदार या सप्लायर तक पहुंचना काफी मुश्किल हो सकता है। इसके साथ ही अगर मामला गंभीर लगे, तो नजदीकी पुलिस थाने में भी इसकी विधिवत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, क्योंकि नकली दवा बनाना और बेचना भारतीय कानून के तहत एक बेहद गंभीर अपराध माना जाता है, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।

 

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