Gallbladder Stones: पित्त की थैली में कैसे बनती है पथरी? जानें लक्षण और बचाव के उपाय

Gallbladder Stones: आजकल की भागदौड़ भरी और अनियमित जीवनशैली के बीच पित्त की थैली में पथरी यानी गॉलस्टोन की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह बीमारी उम्र देखकर नहीं आती है बल्कि किसी भी उम्र और वर्ग के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लेती है। हालांकि, अधिक वजन वाले लोगों, महिलाओं और गलत खान-पान की आदत वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। शुरुआती दौर में यह बीमारी अक्सर बिना किसी लक्षण के शरीर में पनपती रहती है, जिसकी वजह से समय रहते इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि, आखिर पित्त की थैली में पथरी बनती कैसे है, इसके क्या लक्षण होते हैं और इससे बचाव के क्या उपाय क्या हैं।

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क्या होती है पित्त की थैली और उसका काम

चिकित्सकों का कहना है कि, पित्त की थैली यानी गॉलब्लैडर हमारे शरीर में लीवर के ठीक नीचे मौजूद एक छोटी सी थैलीनुमा संरचना होती है। इस थैली के भीतर पित्त रस नाम का एक तरल पदार्थ जमा रहता है, जो हमारे शरीर में खाए गए भोजन को पचाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।

Gallbladder Stones

यह पित्त रस मुख्य रूप से लीवर द्वारा उत्पादित किया जाता है और भोजन के दौरान आंतों में छोड़ा जाता है, ताकि वसा युक्त भोजन को आसानी से पचाया जा सके, लेकिन कई बार इसी पित्त रस के भीतर छोटे-छोटे कठोर टुकड़े या पत्थरनुमा संरचनाएं बनने लगती हैं, जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में पित्त की पथरी या गॉलस्टोन कहा जाता है।

 क्यों बनती है पथरी

चिकित्सा विशेषज्ञ बताते हैं कि, पित्त रस में मुख्य रूप से कोलेस्ट्रॉल और कुछ अन्य आवश्यक पदार्थ मौजूद होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में इन सभी तत्वों के बीच एक संतुलन बना रहता है, लेकिन जब किसी कारणवश यह संतुलन बिगड़ जाता है, तो पथरी बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे आम कारण यह है कि, जब पित्त रस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो यह धीरे-धीरे जमा होकर ठोस रूप लेने लगता है और अंततः पथरी का आकार ले लेता है। चिकित्सकों का कहना है कि, अधिकांश मामलों में पथरी बनने की यही मुख्य वजह होती है।

इसके अलावा लीवर से जुड़ी कुछ बीमारियां भी पथरी बनने के खतरे को बढ़ा सकती हैं। जब लीवर संबंधी परेशानियों के चलते शरीर में बिलिरुबिन नामक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, तो इससे भी पित्त की पथरी बनने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। इसके साथ ही यदि किसी वजह से पित्त की थैली पूरी तरह खाली नहीं हो पाती और उसके भीतर पित्त रस लंबे समय तक जमा रहता है, तो यह रस धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगता है, जिससे भी पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि, मोटापा और अनियमित या तैलीय भोजन की आदतें भी पथरी बनने में अहम भूमिका निभाती हैं।

शुरुआत में नहीं दिखते लक्षण

डॉक्टर कहते हैं कि, सबसे चिंताजनक बात यह है कि, बहुत से मरीजों में जब पथरी का आकार छोटा होता है, तो उन्हें इसका कोई लक्षण महसूस नहीं होता। ऐसे में उन्हें यह पता ही नहीं चल पाता कि, उनके शरीर में पथरी बन चुकी है। यह समस्या कई सालों तक बिना पहचाने ही बनी रहती है। हालांकि, जब यही पथरी किसी नली में फंस जाती है, तब शरीर में कुछ स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं, जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी है।

इन प्रमुख लक्षणों में पेट के ऊपरी हिस्से में दाईं तरफ तेज दर्द होना शामिल है, जो कई बार पीठ या कंधे तक भी फैल सकता है। इसके अलावा मरीज को जी मिचलाने या उल्टी होने की शिकायत भी हो सकती है। भोजन करने के बाद पेट में दर्द या भारीपन महसूस होना, पेट फूलना और खाना ठीक से न पच पाना भी इसके सामान्य लक्षणों में गिने जाते हैं।

कई मामलों में मरीज को बुखार आना या ठंड लगना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। इसके अलावा गंभीर स्थितियों में आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ना, पेशाब का रंग गहरा हो जाना और मल का रंग हल्का पड़ जाना जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं, जो सीधे तौर पर लीवर और पित्त प्रणाली में गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।

कब जाएं डॉक्टर के पास

अगर किसी व्यक्ति को तेज पेट दर्द के साथ-साथ बुखार आ रहा हो या फिर आंखों और त्वचा का रंग पीला पड़ रहा हो, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। पित्त की पथरी का सटीक पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर मरीज का पेट का अल्ट्रासाउंड करवाते हैं।

Gallbladder Stones

इस जांच के जरिए यह स्पष्ट रूप से पता चल जाता है कि पथरी शरीर में कहां है और उसका आकार कितना बड़ा है। इसके अलावा अगर जरूरत महसूस हो, तो डॉक्टर मरीज की अन्य आवश्यक जांचें भी करवा सकते हैं, ताकि बीमारी की सही स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके और उचित इलाज शुरू किया जा सके।

पथरी से बचाव के उपाय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ सामान्य लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखकर पित्त की पथरी बनने के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सबसे पहले तो तला-भुना और अत्यधिक तेल वाला भोजन खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रभावित करता है। इसके साथ ही रोजाना की डाइट में फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ानी चाहिए और भोजन में फाइबर युक्त चीजों को शामिल करना चाहिए। नियमित रूप से हल्का व्यायाम करना भी शरीर के समुचित पाचन तंत्र और वजन को संतुलित बनाए रखने में मददगार साबित होता है।

इसके अलावा अपने शरीर के वजन को संतुलित बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अचानक और बहुत तेजी से वजन कम करने की कोशिश भी पथरी बनने के खतरे को बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि, लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए और समय पर भोजन करने की आदत डालनी चाहिए, क्योंकि अनियमित खान-पान भी पित्त प्रणाली की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

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नोट: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि, व्यायाम या डाइट को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।

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