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पाकिस्तान की साजिश बेनकाब, मौलाना ने माना- हाफिज सईद ने भारत में भेजे 10 हजार आतंकी

नई दिल्ली। पाकिस्तान की सरजमीं से एक बार फिर भारत विरोधी आतंकी साजिशों की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। सीमा पार बैठी आतंकी ताकतों और उनके मंसूबों की सच्चाई अब खुद पाकिस्तान के भीतर से ही सामने आ रही है, जिसने भारत के उन दावों पर मुहर लगा दी है, जिन्हें वह वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।

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बेनकाब हुआ पाकिस्तान

दरअसल, हाल ही में दिल का दौरा पड़ने के बाद लंबे समय तक इलाज करा रहे पाकिस्तानी धर्मगुरु नसीर मदनी अब स्वस्थ होकर एक बार फिर सार्वजनिक मंचों पर एक्टिव हो गए हैं। अब मदनी ने खुलेआम यह स्वीकार किया है कि, लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और वैश्विक आतंकवादी हाफिज सईद ने जम्मू-कश्मीर में हिंसा फैलाने के मकसद से करीब 10,000 आतंकवादी भेजे थे।

Hafiz Saeed

अब जैसे  ही ये  बयान सामने आया हर किसी के पैरों तले जमीन खिसक गई। इसके साथ ही  पाकिस्तान की उस पुरानी रणनीति भी बेनकाब हो गई जिसके तहत वह लगातार कश्मीर में आतंकवाद फैलाने से इनकार करता रहा है।

 प्रतिबंधित संगठन के मंच से दिया बयान

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि, मौलाना नसीर मदनी ने यह विवादित बयान 14 अगस्त को पाकिस्तान के बहावलनगर शहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। खास बात यह है कि, यह कार्यक्रम एक ऐसे संगठन के मंच से आयोजित किया गया था, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। इस तरह के मंच से दिए गए इस बयान ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की  जमीन पर प्रतिबंधित संगठन आज भी बेखौफ होकर आतंकी गतिविधियां चला रहे है और वहां की सरकार व सुरक्षा एजेंसियां इन पर कार्रवाई करने के बजाय मूकदर्शक बनी हुई हैं या यूं कहें कि उन्हें संरक्षण दे रही हैं।

मदनी के इस बयान को भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और कूटनीतिक हलकों में बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट हो गया है कि, जम्मू-कश्मीर में पिछले कई दशकों से जो खून-खराबा और अस्थिरता फैलाई गई, उसके पीछे सुनियोजित तरीके से हाफिज सईद और उसके आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सीधा हाथ रहा है।

कौन है हाफिज सईद

हाफिज सईद का नाम भारत में हुए कई बड़े और खौफनाक आतंकी हमलों से जुड़ा रहा है। वह लश्कर-ए-तैयबा जैसे कुख्यात आतंकी संगठन का सरगना है। उसके अल-कायदा जैसे वैश्विक आतंकी नेटवर्क से गहरे संबंध हैं। इन्हीं संबंधों की वजह से संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2005 में लश्कर-ए-तैयबा को प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट में डाल दिया था। इसके कुछ वर्षों बाद, 2008 में अमेरिका ने भी हाफिज सईद को आधिकारिक रूप से वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया था।

Hafiz Saeed

26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमलों की जांच में भी हाफिज सईद का नामा सबसे ऊपर आता है। इस हमले में पाकिस्तान से समुद्री रास्ते भारत में घुसे 10 आतंकियों ने मुंबई के कई इलाकों में अंधाधुंध गोलीबारी और बम धमाके किये थे। इस आतंकी हमले में 166 लोगों की मौत हो गई थी। यह हमला भारत के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में गिना जाता है, और इसकी साजिश रचने में हाफिज सईद की भूमिका को लेकर कई सबूत सामने आ चुके हैं।

छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ चल रहा मुकदमा

इसी कड़ी में एक बड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस ने हाल ही में इस मामले में फरार चल रहे छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ ‘अनुपस्थिति में मुकदमा’ यानी ‘ट्रायल इन एब्सेंशिया’ की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी है। भारतीय कानून के इस प्रावधान के तहत, भले ही आरोपी अदालत में मौजूद न हों, फिर भी उनके खिलाफ सुनवाई होगी। अगर इस सुनवाई में आरोपी दोषी करार दिए जाते हैं, तो अदालत उन्हें सजा सुनाएगी। हालांकि, यह सजा उसी समय अमल में लाई जाएगी, जब इन आरोपियों को किसी भी तरह भारत लाया जाएगा और भारतीय कानून के दायरे में पेश किया जाएगा।

पहलगाम हमले में भी हाफिज सईद का नाम

हाफिज सईद और उसके आतंकी नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा यहीं खत्म नहीं होता। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए जिस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था, उसमें भी हाफिज का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस हमले में 26  लोगों को उनका धर्म पूछकर मौत के घाट उतार दिया गया था।  इससे ये स्पष्ट हो जाता है कि, हाफिज सईद आज भी एक्टिव है और भारत में आतंकवाद फ़ैलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

इस मामले में जम्मू की एक अदालत ने जुलाई 2025 में हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था। गैर-जमानती वारंट जारी होने का मतलब यह है कि अदालत इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत के समक्ष पेश किए जाने तक उसे किसी भी परिस्थिति में जमानत नहीं दी जा सकती।

भारत को मिला मजबूत सबूत

मौलाना नसीर मदनी के इस खुले और बेबाक बयान ने एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ आतंकवाद को शह देता आ रहा है। भले ही वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इससे इनकार करता रहा हो। भारत वर्षों से यह आरोप लगाता रहा है कि, पाकिस्तान की धरती से संचालित आतंकी संगठन कश्मीर में अस्थिरता फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं, और अब खुद पाकिस्तान के भीतर से आए इस बयान ने भारत के इन दावों को और मजबूती दी है।

विश्लेषकों का मानना है कि, इस तरह के बयान न केवल पाकिस्तान की आतंकवाद को लेकर दोहरी नीति को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि वहां की सरजमीं पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन आज भी बेरोकटोक अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। ऐसे में भारत की सुरक्षा एजेंसियां इस बयान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के खिलाफ एक मजबूत सबूत के तौर पर पेश कर सकती हैं, ताकि वैश्विक समुदाय पर यह दबाव बनाया जा सके कि वह पाकिस्तान को आतंकवाद के इस्तेमाल से बाज आने के लिए मजबूर करे।

 

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