हंगामे के बीच थमा मानसून सत्र, लोकसभा में पहली बार हुआ वंदे मातरम का पूर्ण गान

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज समाप्त हो गया। गुरुवार को सत्र के आखिर दिन सदन में एक ऐतिहासिक और भावुक दृश्य देखने को मिला यहां पहली बार ऐसा हुआ है, जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पूर्ण गायन हुआ। इस विशेष क्षण के तुरंत बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

इसे भी पढ़ें- मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह में तीन बड़े बिलों पर घमासान, कांग्रेस ने तेज किया विरोध

पीएम मोदी रहे मौजूद

सत्र के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह समेत सत्तापक्ष के तमाम वरिष्ठ नेता सदन में मौजूद रहे। आज सुबह ठीक 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, स्पीकर ओम बिरला ने सदन से राष्ट्रीय गीत गाने का आग्रह किया। इसके बाद सभी सदस्यों ने सदन में खड़े होकर वंदे मातरम गाया, जो लोकसभा के इतिहास में अपनी तरह का पहला अवसर माना जा रहा है।

Vande Mataram

उल्लेखनीय है कि, इस पूरे मानसून सत्र के दौरान सदन में कुल मिलाकर मात्र 15 घंटे ही कामकाज हुआ बाकी पूरा समय हंगामे में ही बीता है, जो संसदीय कार्यवाही की दृष्टि से बेहद कम माना जा रहा है।

हंगामे की भेंट चढ़ा पूरा सत्र

इस बार का मानसून सत्र शुरू से आखिर तक हंगामे और व्यवधानों से घिरा रहा। विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनी रही, जिसका सीधा असर सदन की कार्यवाही पर पड़ा। हालांकि, इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा भी हुई। नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में उठा और इस पर चर्चा भी हुई।

इसी चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, छात्रों के शांतिपूर्ण मार्च पर पैलेट गन के इस्तेमाल के आदेश दिए गए थे। इस आरोप के बाद लोकसभा में भारी हंगामा खड़ा हो गया और सत्तापक्ष व विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस हंगामे का असर सदन की आगे की कार्यवाही पर भी पड़ा और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो पाई।

सुर्ख़ियों में रहे मुद्दे

सत्र के दौरान एक और मुद्दा जो लगातार सुर्खियों में रहा, वह था अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर संसद परिसर में कई बार प्रदर्शन किए और सरकार से जवाबदेही की मांग की।

इसके साथ ही छात्रों पर बल प्रयोग के आदेश को लेकर विपक्ष लगातार गृह मंत्री अमित शाह से सदन में जवाब देने की मांग करता रहा। कई दिनों तक विपक्ष का यही एक स्वर रहा कि, आखिर गृह मंत्री सदन में आकर इस विषय पर स्पष्टीकरण क्यों नहीं दे रहे।

इस दबाव के बीच बुधवार को अमित शाह ने स्वयं इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, यदि विपक्ष सदन को सुचारू रूप से चलने दे, तो सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उनके इस आश्वासन के बावजूद सदन में हंगामे का सिलसिला थमा नहीं और कार्यवाही बाधित होती रही।

 फिर टूटीं विपक्ष की उम्मीदें

इन तमाम घटनाक्रमों के बाद गुरुवार यानी सत्र के अंतिम दिन राजनीतिक हलकों में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि, सरकार की ओर से इन तमाम विवादित मुद्दों पर कोई ठोस बयान या स्पष्टीकरण आ सकता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित समय के अनुसार सुबह 11 बजे शुरू तो हुई, लेकिन इस बार परिदृश्य कुछ अलग था।

स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही शुरू होते ही सदन से राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम गाने का अनुरोध किया। इसके तुरंत बाद सदन में इस राष्ट्रीय गीत का संपूर्ण गान हुआ, जो लोकसभा के इतिहास में पहली बार हुआ। इस विशेष क्षण में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी सारे मतभेद और तनाव कुछ समय के लिए थमते नजर आए, और पूरा सदन इस राष्ट्रीय गीत के सम्मान में एकजुट होकर खड़ा हुआ।

सदन में मौजूद रहे शीर्ष नेता

इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित समूचा एनडीए खेमा सदन में उपस्थित रहा। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित समूचा विपक्ष भी इस दौरान सदन में मौजूद रहा। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों पक्षों के सदस्यों ने खड़े होकर राष्ट्रीय गीत का सम्मान किया, जिसने इस पूरे हंगामेदार सत्र के अंत में एक सकारात्मक और गरिमामय दृश्य प्रस्तुत किया।

Vande Mataram

राष्ट्रीय गीत के गान के तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही मानसून सत्र औपचारिक रूप से समाप्त हो गया।

पूरे सत्र में महज 15 घंटे ही हुआ काम

इस पूरे सत्र में महज 15 घंटे कामकाज होने के आंकड़े ने संसदीय गलियारों में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि, बार-बार होने वाले हंगामों और स्थगनों के चलते जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विधेयकों और मुद्दों पर उचित चर्चा नहीं हो पाई। नीट पेपर लीक और छात्रों पर बल प्रयोग जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भले ही सदन में आवाज उठी हो, लेकिन इन पर कोई ठोस निर्णय या सरकार का विस्तृत जवाब सामने नहीं आ सका।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि, सत्र के अंतिम दिन राष्ट्रीय गीत के पूर्ण गान का यह प्रतीकात्मक क्षण भले ही सदन में एकता और सम्मान का संदेश देता हो, लेकिन इससे यह सवाल कम नहीं होता कि, आखिर संसद के महत्वपूर्ण सत्रों में इतना कम कामकाज क्यों हो पा रहा है। आने वाले सत्रों में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बेहतर तालमेल और रचनात्मक संवाद की उम्मीद अब और प्रबल हो गई है, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर ठोस चर्चा और निर्णय हो सकें।

खैर,  यह मानसून सत्र राजनीतिक टकराव, विरोध प्रदर्शनों और हंगामे के लिए तो याद रखा ही जाएगा, लेकिन इसके साथ ही लोकसभा में पहली बार हुए वंदे मातरम के पूर्ण गान के ऐतिहासिक क्षण के लिए भी इसे विशेष रूप से याद किया जाएगा।

 

इसे भी पढ़ें- यूपी मानसून सत्र: सदन में विपक्ष पर गरजे CM योगी, बोले-  ‘सपा ने नहीं चलने दिया सदन’

Related Articles

Back to top button