
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र खत्म होने में अब महज 4 दिन शेष बचा है और इन चार दिनों में सरकार को तीन अहम बजट पेश करने हैं, लेकिन इस बार जब से सत्र शुरू हुआ है, तब से लगातार गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में इन तीन अहम विधेयकों महिला आरक्षण संशोधन विधेयक, परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक और विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक का भविष्य अधर में लटकता हुआ नजर आ रहा है। सोमवार, 10 अगस्त को लोकसभा की कार्यसूची में इनमें से एक भी विधेयक शामिल नहीं किया गया, जिससे यह अटकलें और तेज हो गई हैं कि सरकार इन्हें पारित कराने के लिए किस रणनीति पर काम कर रही है।
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हालांकि सूत्रों के अनुसार, सरकार के सतत प्रयासों के बाद कुछ विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों के प्रति अपने रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। इसके बावजूद कांग्रेस और उसके अधिकतर सहयोगी दल इन दोनों कानूनों के साथ-साथ एफसीआरए संशोधन विधेयक का भी कड़ा विरोध करते आ रहे हैं।
अप्रैल में गिर चुका है संविधान संशोधन विधेयक
गौरतलब है कि, यह संविधान संशोधन विधेयक 2029 से महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने और सीटों की संख्या बढ़ाने के मकसद से लोकसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण यानी परिसीमन का प्रस्ताव करता है। इससे पहले अप्रैल महीने में यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रहने के कारण सदन में गिर चुका था, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में किसी विधेयक के गिरने की पहली घटना थी।
FCRA विधेयक पर कांग्रेस क्यों उग्र
एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 को इस वर्ष 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। अब इस पर चर्चा कर इसे पारित कराया जाना शेष है। कांग्रेस इस विधेयक के प्रावधानों को लेकर विशेष रूप से आक्रामक रुख अपनाए हुए है। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि, यदि केंद्र सरकार शेष बचे दो-तीन दिनों में इस विधेयक को लाने की योजना बना रही है, तो उसे यह इरादा त्याग देना चाहिए।

वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि, यह प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यक समुदायों और गैर-सरकारी संगठनों (NGO) को निशाना बनाने के इरादे से लाया जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि विपक्ष किसी भी सूरत में इसे पारित नहीं होने देगा। यदि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं इस “जनविरोधी” विधेयक को पारित कराने के लिए सामने आते हैं, तो उन्हें संसद में कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस नेता ने इस विधेयक को असंवैधानिक और जनहित के खिलाफ करार दिया है।
सहमति जुटाने में जुटी सरकार
बीते सप्ताह सरकार ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर विपक्ष का समर्थन हासिल करने के लिए गंभीर प्रयास किए, हालांकि, इन कोशिशों को अब तक नाममात्र की ही सफलता मिली है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गतिरोध समाप्त करने के उद्देश्य से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से दो बार आमने-सामने मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, रिजिजू ने राहुल गांधी से फोन पर भी बातचीत की।
सूत्रों के मुताबिक, जब रिजिजू ने महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को पारित कराने में सहयोग मांगा, तो राहुल गांधी ने इन प्रस्तावित कानूनों पर सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने पर जोर दिया। इस मुद्दे को लेकर दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें महिला कोटा और परिसीमन विधेयक ही चर्चा के केंद्र में रहे।
अकाली दल देगा समर्थन
इस बीच सरकार समाजवादी पार्टी और द्रमुक (डीएमके) सहित विपक्ष के अन्य दलों से भी इन विधेयकों पर उनका रुख जानने का प्रयास कर रही है। उल्लेखनीय है कि डीएमके अब औपचारिक रूप से ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा नहीं है। लोकसभा में 22 सांसदों के साथ यह सदन की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि राज्यसभा में इसके आठ सदस्य इसे दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनाते हैं।
शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार को महिला आरक्षण और परिसीमन, दोनों विधेयकों को अपना समर्थन देने की घोषणा की। हालांकि पंजाब में पार्टी का लोकसभा में केवल एक ही सांसद है। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की।
तमिलनाडु का परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव
परिसीमन विधेयक को लेकर दक्षिण भारत में विरोध और तीखा होता जा रहा है। शनिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (विजय) की अगुवाई में बुलाई गई एक बैठक में राज्य के कई सांसदों की मौजूदगी में परिसीमन के खिलाफ एक औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि लोकसभा सीटों की कुल संख्या मौजूदा 543 पर ही बनाए रखी जाए, ताकि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण की उनकी सफलता का खामियाजा सीट-संख्या घटने के रूप में न भुगतना पड़े। हालांकि विपक्षी दलों डीएमके और एआईएडीएमके ने इस बैठक का विरोध किया।
वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने शनिवार को परिसीमन विधेयक पर फिलहाल कोई सीधी टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने केवल इतना कहा कि जब भी यह विधेयक सदन में पेश होगा, पार्टी अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर इस पर विचार-विमर्श करेगी।
कांग्रेस ने जारी की व्हिप
यहां यह याद दिलाना जरूरी है कि इससे पहले अप्रैल में 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए 16 से 18 अप्रैल के बीच विशेष रूप से एक अतिरिक्त सत्र बुलाया गया था, लेकिन आवश्यक बहुमत न जुटने के कारण तब यह विधेयक गिर गया था। फिलहाल संसद में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 299 सांसद हैं, जो संविधान संशोधन के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत यानी 360 के आंकड़े से अब भी काफी दूर है।
इसी रणनीतिक तनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने शुक्रवार को अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी करते हुए उन्हें राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। कुल मिलाकर, मानसून सत्र के अंतिम दिनों में यह साफ है कि, सरकार और विपक्ष के बीच खींचतान और तेज होने वाली है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सत्ता पक्ष इन तीनों विवादास्पद विधेयकों में से किसी को भी पारित कराने में सफल हो पाता है या नहीं।
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