
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मेटा को डीपफेक कंटेंट के खिलाफ ठोस और तत्काल कार्रवाई करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। सरकार का रुख साफ है कि, अगर कंपनी इस दिशा में गंभीरता से कदम नहीं उठाती, तो उसे इसकी जवाबदेही के लिए भी तैयार रहना होगा। बताया जा रहा है कि, मेटा के साथ हुई बैठकों के नतीजों की गहन समीक्षा करने के बाद सरकार आगे उठाए जाने वाले कानूनी कदमों को लेकर विधि विशेषज्ञों से राय लेगी।
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सरकार की जांच का केंद्र बिंदु
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में सरकार की जांच का मूल सवाल यह है कि, क्या मेटा भारतीय कानून के तहत मध्यस्थों यानी ‘इंटरमीडियरी’ के लिए तय किए गए प्रावधानों का पालन कर रही है या फिर वह इन नियमों का उल्लंघन कर रही है। इस अहम पहलू की गहन जांच फिलहाल सरकार के स्तर पर चल रही है। सूत्रों ने यह भी बताया कि, सरकार सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में अन्य बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को भी बुलाकर यह जांचा जाएगा कि क्या वे भी भारतीय कानून के तहत ‘मध्यस्थ’ की तय परिभाषा के दायरे में आते हैं।
‘प्रकाशन’ के बराबर हो सकती है कंटेंट की अनुशंसा
सूत्रों के मुताबिक, अगर मेटा जैसे प्लेटफॉर्म खुद यह तय करते हैं कि उनके यूजर्स को किस तरह की सामग्री दिखाई जाएगी, तो यह प्रक्रिया एक तरह से ‘प्रकाशन’ के समान मानी जा सकती है। ऐसी स्थिति में इन कंपनियों को अपने द्वारा दिखाई गई सामग्री की जिम्मेदारी भी लेनी होगी।

सरकार का मानना है कि, जब किसी प्लेटफॉर्म की अनुशंसा प्रणाली यानी ‘रिकमेंडेशन सिस्टम’ यह तय करती है कि किस व्यक्ति को कौन-सी सामग्री दिखाई जाए और जब वह भुगतान के आधार पर किसी खास कंटेंट को बढ़ावा देती है, तो उसके ‘मध्यस्थ’ के दर्जे को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
इसी आधार पर सरकार यह आकलन कर रही है कि, क्या मेटा जैसी कंपनियां पारंपरिक अर्थों में सिर्फ एक मंच हैं या फिर वे कंटेंट के प्रकाशक की भूमिका भी निभा रही हैं।
कानूनी राय के बाद तय होगी रणनीति
सूत्रों ने स्पष्ट किया कि, सरकार ने मेटा को डीपफेक की समस्या से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दे दिया है। कंपनी के साथ अब तक हुई विभिन्न बैठकों में जो भी परिणाम सामने आए हैं, उनकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस समीक्षा के बाद ही सरकार यह तय करने के लिए विधिक राय लेगी कि मेटा के खिलाफ आगे क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार इस मामले को हल्के में नहीं ले रही और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में रहते हुए सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
मेटा की टीम से दो दिन तक हुई पूछताछ
केंद्र सरकार ने मेटा की टीम को इस मामले में तलब किया था, जहां पहले दो दिनों तक कंपनी के अधिकारियों से कड़ी पूछताछ की गई। इसके बाद शुक्रवार को तीसरे दिन सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर एक विस्तृत बैठक हुई। इस बैठक में मुख्य रूप से तीन गंभीर मुद्दों पर चर्चा केंद्रित रही, डीपफेक कंटेंट, बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी सीएसएएम और बिना लेबल के प्रसारित हो रही एआई-जनित सामग्री। सरकार ने मेटा से इन तीनों मुद्दों पर उसकी ठोस कार्ययोजना को लेकर विस्तार से जानकारी मांगी।
पीएम मोदी की पोस्ट पर रोक के बाद बुलाई गई थी बैठक
गौरतलब है कि, मेटा के साथ सरकार की यह अहम बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी रूप से लगी रोक के बाद बुलाई गई थी। यह घटना उस समय सुर्खियों में आई जब मेटा के प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी की एक पोस्ट को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। हालांकि, बाद में मेटा ने स्पष्ट किया कि यह घटना उसके एआई आधारित ‘कंटेंट फिल्टर’ सिस्टम में आई एक तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुई थी।

कंपनी ने इसके लिए माफी मांगते हुए प्रधानमंत्री की पोस्ट को दोबारा बहाल कर दिया था। इस पूरी घटना ने सरकार और मेटा के बीच तकनीकी प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर एक नई और गंभीर बहस को जन्म दिया, जिसके परिणामस्वरूप अब डीपफेक और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर सरकार सख्त रुख अपनाती दिख रही है।
और सख्त हो सकते हैं नियम
फिलहाल सरकार की ओर से मेटा और अन्य बड़ी टेक कंपनियों के खिलाफ आगे की रणनीति को लेकर कानूनी सलाह ली जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने के लिए नियमों को और सख्त बना सकती है, ताकि डीपफेक और भ्रामक एआई कंटेंट पर प्रभावी लगाम लगाई जा सके।
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