
जिमी शेरगिल, दीया मिर्जा, सिद्धार्थ और आदिल हुसैन जैसे कलाकारों से सजी वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ इन दिनों दर्शकों और मनोरंजन जगत, दोनों में खूब चर्चा का विषय बनी हुई है। एक सच्ची घटना पर आधारित यह सीरीज 7 अगस्त को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। रिलीज के बाद से यह सीरीज अपनी दमदार कहानी और बड़े स्तर पर की गई भव्य शूटिंग को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। अब इस सीरीज से जुड़ी एक और अहम खबर सामने आई है, जो केवल मनोरंजन जगत ही नहीं बल्कि आर्थिक हलकों में भी दिलचस्पी का विषय बन गई है।
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800 से ज्यादा वेंडर्स के साथ हुआ काम
एक रिपोर्ट के अनुसार, नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस ने हाल ही में एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि, इस प्रोडक्शन ने भारतीय अर्थव्यवस्था में करीब 215 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। यह आंकड़ा अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि, सीरीज की शूटिंग किस पैमाने पर की गई थी। बताया जा रहा है कि, यह भारत में नेटफ्लिक्स की अब तक की सबसे बड़ी प्रोडक्शंस में से एक मानी जा रही है, जिसने न केवल मनोरंजन उद्योग बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सीधा फायदा पहुंचाया है।

टेड सारंडोस ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए बताया कि ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की शूटिंग के दौरान प्रोडक्शन टीम ने देश के नौ से भी अधिक शहरों में फैले 800 से अधिक वेंडर्स के साथ मिलकर काम किया। यह सीरीज की शूटिंग की व्यापकता को दर्शाता है, जिसमें अलग-अलग राज्यों और शहरों के छोटे-बड़े कारोबारियों की भागीदारी रही।
115 दिनों तक चली शूटिंग
सारंडोस ने बताया कि, सीरीज की शूटिंग करीब 115 दिनों तक लगातार चली, जो किसी भी बड़े प्रोडक्शन के लिए एक लंबा और चुनौतीपूर्ण समय माना जाता है। इतने बड़े स्तर पर और इतने लंबे समय तक चली शूटिंग की वजह से इससे जुड़े कई स्थानीय लोगों और छोटे कारोबारियों को भी सीधे तौर पर काम मिला। प्रोडक्शन के दौरान करीब 200 स्थानीय कास्ट और क्रू मेंबर्स को रोजगार के अवसर मिले, जिनमें कलाकारों से लेकर तकनीकी टीम तक के सदस्य शामिल थे।
इसके अलावा, शूटिंग के दौरान अलग-अलग जरूरतों के लिए लगभग 4,000 डेली हायर यानी दिहाड़ी पर काम करने वाले कामगारों को भी नियुक्त किया गया। इस आंकड़े से यह साफ हो जाता है कि, सीरीज की शूटिंग का आर्थिक फायदा केवल फिल्म और ओटीटी इंडस्ट्री तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और छोटे व्यवसायों की आमदनी तक भी पहुंचा।
VFX पर हुआ भारी खर्च
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की खासियत इसमें बड़े पैमाने पर किया गया विजुअल इफेक्ट्स यानी VFX का इस्तेमाल भी है। टेड सारंडोस के मुताबिक, सीरीज के प्रोडक्शन के दौरान अकेले VFX पर करीब 49 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इतनी बड़ी राशि इस बात का संकेत देती है कि, सीरीज के विजुअल्स को यथासंभव वास्तविक और प्रभावशाली बनाने के लिए तकनीकी टीम ने काफी मेहनत की है। युद्ध और हवाई कार्रवाई से जुड़े दृश्यों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से दिखाने के लिए VFX की अहम भूमिका मानी जा रही है, जिसने सीरीज की कुल लागत को भी काफी हद तक प्रभावित किया है।
क्या है ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी?
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ कारगिल युद्ध की घटनाओं पर आधारित एक वेब सीरीज है, जिसमें उस दौर में भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण भूमिका को पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है। सीरीज की कहानी में उस समय वायुसेना के सामने आई चुनौतियों, उनके संघर्ष और युद्ध में उनके अहम योगदान को विस्तार से दिखाने का प्रयास किया गया है। निर्माताओं ने कहानी को यथासंभव प्रामाणिक बनाने के लिए इसे कई वास्तविक लोकेशंस पर शूट किया।

सीरीज के कुछ हिस्सों की शूटिंग सीधे भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल बेस पर की गई है, जबकि कुछ दृश्य हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में फिल्माए गए हैं। इस तरह की वास्तविक और चुनौतीपूर्ण लोकेशंस पर शूटिंग करने से निर्माताओं को कहानी को अधिक यथार्थवादी और प्रभावशाली तरीके से दर्शकों के सामने पेश करने में मदद मिली है।
अर्थव्यवस्था को भी मिला फायदा
फिल्म और ओटीटी इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ जैसी बड़े बजट की प्रोडक्शंस न केवल दर्शकों को अच्छी कहानी और मनोरंजन प्रदान करती हैं, बल्कि इनका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। शूटिंग के दौरान होटल, ट्रांसपोर्ट, केटरिंग, लोकल क्रू और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबारियों को भी बड़े पैमाने पर काम मिलता है। इस तरह की प्रोडक्शंस भारत को वैश्विक स्तर पर एक बड़े और भरोसेमंद शूटिंग डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में भी मदद करती हैं।
नेटफ्लिक्स की ओर से आए इस खुलासे के बाद से मनोरंजन और आर्थिक, दोनों क्षेत्रों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि किस तरह बड़े बजट की वेब सीरीज और फिल्में सिर्फ पर्दे पर ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ी होती हैं। ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का यह आर्थिक योगदान आने वाले समय में अन्य बड़े प्रोडक्शन हाउसों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है, जो भारत में इसी तरह की बड़े पैमाने की परियोजनाओं पर काम करने पर विचार कर रहे हैं।
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