
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शुमार कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज तेरह दिनों के भीतर ही विवादों में घिर गया। यात्रियों के सफर को आसान बनाने के मकसद से बनाए गए इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे क्योंकि बारिश होते ही ये एक्सप्रेस वे कई जगहों से धंस गया। अब नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI ने एक बड़ा फैसला लिया है। अथॉरिटी ने फिलहाल इस एक्सप्रेसवे पर टोल टैक्स वसूली पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
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कमियां दूर होने तक नहीं लगेगा टोल
NHAI की ओर से साफ किया गया है कि, सड़क में सामने आई सभी तकनीकी और निर्माण संबंधी खामियों को पूरी तरह दुरुस्त किए जाने तक इस मार्ग पर सफर करने वाले वाहन चालकों से कोई टोल टैक्स नहीं वसूला जाएगा। यानी इस एक्सप्रेसवे से गुजरने वाले यात्रियों को फौरी तौर पर आर्थिक राहत मिल गई है, लेकिन सड़क की गुणवत्ता को लेकर उठे सवाल गंभीर बने हुए हैं।

गौरतलब है कि, करीब 4,200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार किया गया यह एक्सप्रेसवे कानपुर और लखनऊ के बीच सफर को काफी सुगम बनाने के इरादे से बनाया गया था। परियोजना के पीछे मकसद यह था कि, दोनों शहरों के बीच जो सफर पहले करीब 90 मिनट में तय होता था, वह घट जाये, लेकिन उद्घाटन के तुरंत बाद ही सामने आई खामियों ने इस पूरी परियोजना की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उन्नाव में धंसी सड़क
इस पूरे विवाद की शुरुआत 26 जुलाई को हुई, जब उन्नाव जिले के कोरारी इलाके में एक्सप्रेसवे के एक हिस्से की सड़क अचानक धंस गई। यह धंसाव करीब 300 मीटर के दायरे में हुआ, जो अपने आप में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। इस घटना के वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इसके बाद आम लोगों और विशेषज्ञों की ओर से सड़क निर्माण के स्तर को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
हालात को संभालने के लिए एहतियातन प्रभावित हिस्से से गुजरने वाले वाहनों का मार्ग तत्काल बदल दिया गया, जबकि एक्सप्रेसवे के बाकी हिस्सों पर आवागमन पहले की तरह जारी रखा गया। NHAI ने इस मामले में सफाई देते हुए बताया कि, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर शुरू करा दिया गया है और जब तक वह हिस्सा पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक वहां सामान्य यातायात व्यवस्था बहाल नहीं की जाएगी।
निर्माण कंपनी पर गिरी गाज
सड़क धंसने की घटना के बाद NHAI ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए निर्माण करने वाली कंपनी PNC Infratech के खिलाफ सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अथॉरिटी ने कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है।
अगर यह प्रक्रिया पूरी होती है, तो इसका सीधा असर यह होगा कि कंपनी भविष्य में NHAI की किसी भी नई परियोजना के लिए बोली लगाने के योग्य नहीं रह जाएगी। इसके अलावा कंपनी पर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी राशि का 2 फीसदी जुर्माना लगाने की तैयारी है, साथ ही उसे तीन साल के लिए डिबार यानी प्रतिबंधित करने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।
यह कार्रवाई सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रही। परियोजना से जुड़े कई इंजीनियरों और वरिष्ठ अधिकारियों पर भी गाज गिरी है। प्रोजेक्ट मैनेजर, स्वतंत्र इंजीनियर की पूरी टीम और रेजिडेंट इंजीनियर को उनके पद से हटा दिया गया है और उन्हें अगले दो साल तक किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से जुड़ने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही परियोजना के पूर्व और वर्तमान दोनों प्रोजेक्ट डायरेक्टरों के खिलाफ भी लापरवाही बरतने के आरोप में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
IIT खड़गपुर की टीम करेगी तकनीकी जांच
इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए NHAI ने एक विशेषज्ञ तकनीकी समिति का गठन किया है, जिसमें IIT खड़गपुर के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। यह टीम गहन जांच करेगी कि, आखिर किन कारणों से सड़क में इस तरह की खामी आई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए किन तकनीकी और प्रशासनिक कदमों की जरूरत है।

इसके अलावा सिर्फ प्रभावित हिस्से तक ही जांच सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि पूरे एक्सप्रेसवे की अत्याधुनिक मशीनों की मदद से गहन जांच कराई जा रही है, ताकि अगर कहीं और भी कोई छिपी हुई तकनीकी खामी हो, तो उसे समय रहते पहचान कर ठीक किया जा सके।
ठेकेदार से वसूला जाएगा मरम्मत का खर्च
आर्थिक पहलू की बात करें, तो NHAI ने स्पष्ट कर दिया है कि, सड़क की मरम्मत पर होने वाला करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च संबंधित ठेकेदार कंपनी को ही वहन करना होगा। यही नहीं, जब तक टोल वसूली बंद रहेगी, उस दौरान होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी उसी कंपनी से कराई जाएगी। यानी इस पूरी लापरवाही की आर्थिक कीमत निर्माण कंपनी को ही चुकानी होगी।
गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल
फिलहाल, टोल वसूली पर रोक लगने से आम यात्रियों को कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की प्रमुख अधोसंरचना परियोजनाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश सरकार की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता रहा है और इसे लाखों यात्रियों के सफर को सुगम बनाने के मकसद से तैयार किया गया था।
NHAI की ओर से यह भी दोहराया गया है कि, जब तक सभी जरूरी तकनीकी सुधार पूरी तरह से नहीं हो जाते, तब तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली दोबारा शुरू नहीं की जाएगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि, जांच समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकालती है और भविष्य में ऐसी बड़ी परियोजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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