
नई दिल्ली। आज के आधुनिक दौर में होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना बेहद आवश्यक हो गया है। लोन लेने के बाद हर महीने की एक निश्चित तारीख को ईएमआई चुकाना कर्जदाता के साथ आपके भरोसे को बनाए रखने का सबसे मुख्य जरिया होता है। हालांकि, व्यावहारिक जीवन में कई बार खाते में पर्याप्त बैलेंस न होने, वेतन आने में देरी या किसी अन्य तकनीकी खराबी की वजह से तय तारीख पर ईएमआई का भुगतान नहीं हो पाता।
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वित्तीय विशेषज्ञों और बैंकिंग नियमों के अनुसार, राहत की बात यह है कि, एक-दो दिन की देरी से क्रेडिट स्कोर पर तुरंत कोई बड़ा संकट नहीं आता। हालांकि, यदि यह लापरवाही 30 दिनों से अधिक खिंच जाती है, तो आपके क्रेडिट प्रोफाइल को ऐसा झटका लग सकता है जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं।
जानिए सिबिल स्कोर पर कैसे पड़ता है असर
बैंकिंग प्रणाली में लोन के भुगतान को समय सीमा के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। आपकी लेट पेमेंट का असर इस बात पर निर्भर करता है कि आपने ईएमआई चुकाने में कितने दिनों की देरी की है।
1 से 7 दिन की देरी
यदि आपकी ईएमआई खाते में बैलेंस न होने की वजह से बाउंस हो जाती है और आप उसे 2 से 7 दिनों के भीतर चुका देते हैं, तो इसका आपके सिबिल स्कोर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। क्रेडिट ब्यूरो आमतौर पर इतने कम समय के अंतर को रिपोर्टिंग में शामिल नहीं करते।
नुकसान: हालांकि, सिबिल स्कोर बच जाता है, लेकिन बैंक या वित्तीय संस्थान आपसे ईएमआई बाउंस चार्ज लेट पेमेंट फीस और बकाया राशि पर दंडात्मक ब्याज वसूलते हैं।
30 दिनों या उससे अधिक की देरी
अगर ईएमआई की देय तिथि बीत जाने के बाद भी 30 दिनों तक भुगतान नहीं किया जाता है, तो स्थिति गंभीर होने लगती है। बैंक इसे वित्तीय अनुशासनहीनता मानते हैं। इसके परिणाम स्वरूप बैंक इस देरी की जानकारी ‘Days Past Due’ (DPD) के तहत सिबिल, एक्सपेरियन या इक्विफैक्स जैसी क्रेडिट ब्यूरो संस्थाओं को भेज देते हैं।
केवल एक बार 30 दिन की देरी होने पर ही आपका सिबिल स्कोर 50 से 100 अंक तक गिर सकता है। एक बार सिबिल खराब होने पर भविष्य में नया लोन या क्रेडिट कार्ड मिलना बेहद मुश्किल हो जाता है या फिर बैंक आपसे भारी-भरकम ब्याज दर की मांग करते हैं।
60 से 89 दिनों की देरी
लगातार दो या तीन महीनों तक ईएमआई जमा न करने पर आपका क्रेडिट प्रोफाइल ‘हाई-रिस्क’ श्रेणी में डाल दिया जाता है। इस चरण में बैंक मान लेते हैं कि ग्राहक जानबूझकर या गंभीर आर्थिक तंगी के कारण भुगतान करने में असमर्थ है। ऐसे में सिबिल स्कोर में भारी गिरावट दर्ज की जाती है। इसके साथ ही बैंक और लोन रिकवरी एजेंसियां भुगतान वसूलने के लिए ग्राहक से फोन, ईमेल और पत्राचार के माध्यम से लगातार संपर्क करना शुरू कर देती हैं।
क्या है री-पेमेंट
अधिकांश बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) महीने में एक निश्चित तारीख पर अपने सभी ग्राहकों के रीपेमेंट (पुनर्भुगतान) डेटा को क्रेडिट ब्यूरो के साथ साझा करते हैं। इसे ‘क्रेडिट रिपोर्टिंग चक्र’ कहा जाता है।
यदि आपकी ईएमआई बाउंस हुई है, लेकिन आपने बैंक की मासिक रिपोर्टिंग साइकिल पूरी होने से पहले बकाया राशि और लेट फीस का भुगतान कर दिया है, तो बैंक उस महीने की रिपोर्ट में आपको ‘डिफ़ॉल्टर’ या ‘देर से भुगतान करने वाला’ नहीं दर्शाते। इसलिए, यदि कभी ईएमआई मिस हो जाए, तो महीने की रिपोर्टिंग से पहले उसे तुरंत क्लियर कर देना ही समझदारी है।
खराब सिबिल स्कोर को कैसे सुधारें
अगर किसी गलती या आपात स्थिति की वजह से आपका सिबिल स्कोर कम हो गया है, तो इसे फिर से 750 या उससे अधिक (जो कि एक बेहतरीन स्कोर माना जाता है) करने के लिए निम्नलिखित वित्तीय आदतों को अपनाना चाहिए।
समय पर भुगतान का नियम: अपनी सभी मौजूदा ईएमआई और क्रेडिट कार्ड के बिलों का भुगतान देय तिथि से पहले या उसी दिन करें। भुगतान में एक दिन की भी देरी से बचें।
ऑटो-डेबिट और रिमाइंडर चालू करें: अपने बैंक खाते में ‘ECS’ या ‘NACH’ सुविधा को हमेशा सक्रिय रखें। इसके साथ ही, ईएमआई की तारीख से 2-3 दिन पहले अपने खाते में पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं।
क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) कम रखें: यदि आप क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं, तो अपनी कुल क्रेडिट लिमिट का केवल 30% ही खर्च करें। पूरी लिमिट खत्म करने से बैंकों को लगता है कि आप अत्यधिक कर्ज पर निर्भर हैं।
बार-बार लोन के लिए आवेदन न करें: एक साथ कई बैंकों में लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने से ‘हार्ड इंक्वायरी’ बढ़ती है, जिससे सिबिल स्कोर और नीचे गिरता है।
बकाया राशि का पूर्ण निपटान न करें: लोन का भुगतान हमेशा पूरा करें। कभी भी लोन ‘राइट-ऑफ’ या ‘सेटलमेंट’ न कराएं, क्योंकि इससे सिबिल रिपोर्ट पर वर्षों तक काला धब्बा लगा रहता है।
एक ईएमआई छूटने पर पैनिक (घबराने) होने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसे अनदेखा करना भारी पड़ सकता है। वित्तीय सुरक्षा के लिए हमेशा अपने इमरजेंसी फंड में कम से कम 3 से 6 महीने की ईएमआई का पैसा अलग रखें, ताकि विषम परिस्थितियों में भी आपका क्रेडिट स्कोर और आपकी वित्तीय साख सुरक्षित रहे।
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