LDA में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला उजागर, विजिलेंस ने JE समेत 3 को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोचा

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उस समय उजागर हुआ, जब विजिलेंस विभाग ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के एक जूनियर इंजीनियर सहित कुल तीन लोगों को 7.50 लाख रुपए की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। इस पूरी कार्रवाई को गोमती नगर स्थित एलडीए कार्यालय में उस वक्त अंजाम दिया गया, जब आरोपी शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम वसूल रहे थे। विजिलेंस टीम ने पहले से ही योजना बनाकर शिकायतकर्ता के माध्यम से आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ने का जाल बिछाया था।

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इन्हें किया गया अरेस्ट

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एलडीए के जोन-5 कार्यालय में तैनात जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा, सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश और एक बिचौलिया श्रवण कुमार शामिल हैं। विजिलेंस की जांच में यह बात सामने आई कि, इन तीनों ने मिलकर एक व्यक्ति पर मकान निर्माण के बदले भारी रकम की रिश्वत देने का दबाव बनाया था। इतना ही नहीं उसे लगातार धमकी भी दी जा रही थी। शुरुआत में आरोपियों ने शिकायतकर्ता से पूरे 15 लाख रुपए की मांग की थी।

मकान निर्माण रुकवाने की दी धमकी

विजिलेंस की टीम ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि, पीड़ित ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के लखनऊ सेक्टर के पुलिस अधीक्षक से की थी। अपनी शिकायत में उसने बताया था कि, एलडीए के जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा उसके निर्माणाधीन मकान पर पहुंचे और उसे धमकाते हुए निर्माण कार्य तुरंत बंद करा देने की बात कही।

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इसके बाद शिकायतकर्ता को यह बताया गया कि, उसके मकान निर्माण को लेकर इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) पोर्टल पर एक शिकायत दर्ज की गई है। इस कथित शिकायत का हवाला देते हुए उसे मामले को निपटाने के बहाने एलडीए के दफ्तर बुलाया गया, जहां उससे मोटी रकम ऐंठने की बात की गई।

पहले 15 लाख मांगे थे

शिकायतकर्ता का कहना है कि, जब वह एलडीए कार्यालय पहुंचा, तो वहां जूनियर इंजीनियर दिनेश कुमार वर्मा और सुपरवाइजर चंद्र प्रकाश ने उससे 15 लाख रुपए की मांग की। इसके साथ ही यह धमकी भी दी कि, अगर रकम नहीं दी गई, तो निर्माण कार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और निर्माण रोक दिया जायेगा।

शिकायतकर्ता ने जब इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई और रकम कम करने की विनती की तब जाकर किसी तरह से 7.50 लाख पर मामला सेटल हुआ। यह पूरी बातचीत और सौदेबाजी किसी सरकारी दफ्तर के भीतर सरेआम भ्रष्टाचार की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

रिश्वत वसूलने लेने में बिचौलिये की भूमिका

जांच के दौरान विजिलेंस टीम को यह पता चला कि, आरोपी जूनियर इंजीनियर और सुपरवाइजर ने रिश्वत की रकम वसूलने के लिए एक बाहरी व्यक्ति श्रवण कुमार को बिचौलिये के तौर पर अपने साथ रखा था। यह पूरा गिरोह मकान बनवा रहे आम नागरिकों को आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कथित शिकायतों का डर दिखाकर उनसे रिश्वत वसूलने का काम करता था। तीनों आरोपी मिलकर इस पूरे रैकेट को अंजाम दे रहे थे।

गौर करने वाली बात यह है कि, शिकायतकर्ता ने पूरी सूझबूझ का परिचय देते हुए विजिलेंस टीम को रिश्वत मांगे जाने से जुड़ी मोबाइल कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य महत्वपूर्ण सबूत भी मुहैया कराए थे, जिससे जांच एजेंसी को कार्रवाई करने में काफी मदद मिली।

पूरी रकम बरामद

शिकायतकर्ता की शिकायत की गहनता से जांच करने और उसे सही पाए जाने के बाद विजिलेंस विभाग ने रिश्वतखोर जूनियर इंजीनियर और उसके साथियों को रंगे हाथों गिरफ्तार करने की योजना बनाई। इसी योजना के तहत शनिवार को शिकायतकर्ता तय हुई रकम यानी 7.50 लाख रुपए लेकर एलडीए कार्यालय पहुंचा।

जैसे ही आरोपियों ने शिकायतकर्ता से रिश्वत की पूरी रकम अपने हाथों में ली, पहले से घात लगाकर बैठी विजिलेंस टीम ने मौके पर छापा मारकर तीनों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया और रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली।

 की जा रही पूछताछ 

फिलहाल, विजिलेंस टीम तीनों गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि, क्या इस तरह के भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में भी यही गिरोह शामिल रहा है?, क्या इसमें अन्य अधिकारियों की भी संलिप्तता है? विजिलेंस विभाग द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

यह घटना एक बार फिर सरकारी दफ्तरों में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को उजागर करती है, जहां आम नागरिकों को अपने वैध कार्यों के लिए भी रिश्वत देने पर मजबूर किया जाता है। विजिलेंस विभाग की इस त्वरित और सफल कार्रवाई से जहां आम जनता में राहत का माहौल है। वहीं यह अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए भी एक कड़ी चेतावनी साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी इस तरह के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, ताकि सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

 

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