
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर विपक्ष लगातार हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गृहमंत्री अमित शाह को पद से हटाने की मांग दोहराई है। गुरुवार को उन्होंने संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार को घेरा था और शाह के इस्तीफे की मांग की।
वहीं, शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा। खरगे का आरोप है कि, केंद्र सरकार आंदोलनकारियों से किए गए वादों से मुकर रही है और अब बदले की कार्रवाई की जा रही है। छात्रों को बिना वजह परेशान किया जा रहा है।
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पीएम मोदी को संबोधित पोस्ट लिखी

कांग्रेस अध्यक्ष ने एक्स पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए एक पोस्ट लिखी। इस पोस्ट में खरगे ने गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफा लेने की मांग की। साथ ही सरकार की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा, जिस तरह से युवाओं के साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए शोभनीय नहीं है।
पहले लाठीचार्ज, अब कार्रवाई का आरोप
खरगे ने आरोप लगाया कि, प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर पहले ही लाठी-डंडे बरसाए गए, उन्हें काबू में करने के लिए पैलेट गन तक का इस्तेमाल किया गया और अब सरकार बदले की भावना से काम कर रही है। आंदोलन में शामिल होने वाले युवाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही हैं, उन्हें हिरासत में भी लिया जा रहा है। सरकार के लोग उन्हें धमका रहे हैं
कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि, प्रदर्शनकारियों ने इस भरोसे पर अपना आंदोलन समाप्त किया था कि, उनके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जाएगी और सरकार ने इसका भरोसा भी दिया था, लेकिन अब सरकार अपनी ही दी हुई गारंटी से मुकरती नजर आ रही है। खरगे ने इसे सरकार की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बताया और कहा कि यह रवैया युवाओं के साथ किए गए वादाखिलाफी जैसा है।
लड़कियों की डॉक्सिंग का आरोप
खरगे के आरोपों में सबसे गंभीर बिंदु वह रहा, जिसमें उन्होंने दावा किया कि आंदोलन से जुड़े युवाओं के सोशल मीडिया खाते बंद कराए जा रहे हैं। इससे भी आगे बढ़कर लड़कियों की निजी जानकारी सार्वजनिक करने यानी डॉक्सिंग की जा रही है। यह आरोप बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि ये युवतियों की सुरक्षा और निजता से जुड़ा सवाल है।
.@narendramodi जी,
10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया।
जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं।
युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उनपर कार्रवाई नहीं होगी,…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) July 31, 2026
कांग्रेस अध्यक्ष ने इसे लेकर सीधे गृहमंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि, उनमें इतना अहंकार है कि, वे सदन में जवाब देने के लिए भी उपस्थित नहीं हुए। खरगे ने कहा कि, गृहमंत्री जवाबदेही से जुड़े किसी भी बयान से बचते नजर आए। उन्होंने आगे कहा कि यह सारी कोशिशें सिर्फ अपनी छवि बचाने और चेहरा बचाने की रणनीति भर हैं, जो अब काम नहीं आने वाली, क्योंकि देश का युवा वर्ग सच्चाई को समझ चुका है।
राज्यसभा में उठा था मुद्दा
गौरतलब है कि, खरगे ने गुरुवार को भी राज्यसभा में इसी मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया था। उन्होंने सदन में गृहमंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर सीधे सवाल उठाते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। दरअसल, यह पूरा विवाद 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित हुए ‘संसद चलो’ मार्च से जुड़ा है, जिसके दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई की गई थी। इसी घटना को लेकर विपक्ष लगातार गृहमंत्री अमित शाह को निशाने पर ले रहा है।
राहुल गांधी के बयान पर हंगामा
इस पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम बुधवार को लोकसभा में देखने को मिला था, जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी की थी। यह बयान इतना विवादित माना गया कि, उसे संसद की कार्यवाही से हटाना पड़ा। इस घटना के बाद से सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी और बढ़ गई है। यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में गूंजता रहा है।
विपक्ष की एकजुट रणनीति
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रणनीति अपना रही है और इसे आगामी सत्रों में भी प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। खरगे का यह ताजा हमला ऐसे समय पर आया है जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस का कहना है कि, जब तक गृहमंत्री इस पूरे मामले पर सदन में स्पष्ट जवाब नहीं देते, तब तक विरोध जारी रहेगा।
सरकार ने नहीं दी प्रतिकिया
खरगे के इन गंभीर आरोपों पर अब तक गृह मंत्रालय या भाजपा की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि, क्या सरकार इस पूरे मामले पर सदन में स्पष्टीकरण देगी या नहीं। विपक्ष का कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, आंदोलन और राजनीतिक दबाव जारी रहेगा।
राजनीतिक तापमान बढ़ाएगा मुद्दा
यह पूरा प्रकरण आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकता है। कांग्रेस जहां इसे युवाओं और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रही है। वहीं, सत्तापक्ष की खामोशी इस विवाद को और गहरा बना रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि, सरकार इस दबाव के आगे अपना रुख स्पष्ट करती है या मामला यूं ही तूल पकड़ता रहता है।
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