
नई दिल्ली। नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से सोमवार, 20 जुलाई को निकाले गए संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर की गई कथित लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतर आई है। इसके बाद मंगलवार, 21 जुलाई को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास तक विरोध मार्च निकाला। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी ने सीधे तौर पर पीएम मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई।
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पीएम आवास के बाहर धरना, नारेबाजी
प्रधानमंत्री आवास के बाहर पहुंचकर कांग्रेस नेताओं ने धरना दिया और जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘प्रधानमंत्री इस्तीफा दो’, ‘नरेंद्र मोदी डाउन-डाउन’ जैसे नारे लगाए और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी तीखे तेवर दिखाए। इस दौरान सरकार पर पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर भी सीधा निशाना साधा गया।

धरने के दौरान माहौल पूरी तरह गरमाया रहा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बनता था। प्रदर्शन के सबसे भावुक और चर्चित पलों में से एक तब देखने को मिला जब कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल लोक कल्याण मार्ग पर प्रधानमंत्री आवास के ठीक बाहर जमीन पर लेटकर अपना विरोध जताते नजर आए। उनके इस अंदाज ने प्रदर्शन को और सुर्खियों में ला दिया।
कौन-कौन से नेता शामिल हुए धरने में
इस विरोध प्रदर्शन और धरने में कांग्रेस के तमाम शीर्ष नेता शामिल हुए। इनमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पंजाब कांग्रेस कैंपेन कमेटी के चेयरपर्सन चरणजीत सिंह चन्नी, वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला और पवन खेड़ा के नाम प्रमुख रहे। इनके अलावा पार्टी के कई अन्य सांसद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी इस मार्च और धरने का हिस्सा बने। नेताओं की इतनी बड़ी मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर पूरी ताकत के साथ आक्रामक रुख अपनाने के मूड में है।
क्यों भड़का कांग्रेस का गुस्सा
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार को हुए घटनाक्रम से हुई, जब नीट परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे पर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में छात्रों ने संसद तक मार्च निकालने की कोशिश की थी। इस दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज किए जाने की खबरें सामने आईं, जिसके बाद विपक्षी खेमे में जबरदस्त नाराजगी देखी गई।
कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश करार देते हुए इसे तानाशाही रवैया बताया। पार्टी का कहना है कि, सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त खामियों और परीक्षा पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय, आवाज उठाने वाले छात्रों पर बल प्रयोग करा रही है।
प्रधानमंत्री और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर डालते हुए दोनों के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक शिक्षा मंत्रालय पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में विफल साबित होता रहेगा, और छात्रों की शांतिपूर्ण मांगों का जवाब लाठियों से दिया जाता रहेगा, तब तक कांग्रेस अपना विरोध जारी रखेगी। नेताओं ने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर बढ़ाई गई सुरक्षा
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के अचानक प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच करने की खबर मिलते ही सुरक्षा एजेंसियां हरकत में आ गईं और आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल बढ़ा दिया गया। जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेताओं के बीच दोपहर में यह रणनीति बनाई गई थी कि संसद भवन से मार्च शुरू कर सीधे प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा जाए।

जैसे ही इस योजना की भनक दिल्ली पुलिस को लगी, प्रशासन ने अपनी रणनीति में तुरंत बदलाव करते हुए एहतियातन अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए। इसके बावजूद कांग्रेस नेता तय योजना के मुताबिक प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचने में कामयाब रहे और वहां धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया।
सियासी माहौल गरमाया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजधानी दिल्ली का सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। एक तरफ कांग्रेस लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। वहीं सत्तापक्ष की ओर से भी इस मुद्दे पर जल्द प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि नीट पेपर लीक और छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर, दोनों जगह और तूल पकड़ सकता है।
विपक्ष इस मुद्दे को शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा से जोड़कर आगे भी सरकार को घेरने की तैयारी में नजर आ रहा है। फिलहाल, कांग्रेस पार्टी के तेवर देखकर यह साफ है कि, यह मुद्दा जल्द ठंडा पड़ने वाला नहीं है।
आगे और भी प्रदर्शन हो सकते हैं
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मसले पर और बड़े प्रदर्शन आयोजित किए जा सकते हैं। साथ ही संसद सत्र के दौरान भी विपक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय की तरफ से भी लाठीचार्ज की घटना को लेकर स्पष्टीकरण या जांच के आदेश की उम्मीद जताई जा रही है। कुल मिलाकर, नीट पेपर लीक विवाद और उससे जुड़ा सियासी घमासान आने वाले दिनों में और अधिक गरमा सकता है।
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