यूपी के 20 शहरों में आंधी-पानी से गिरे पेड़, 7 की मौत, सभी 75 जिलों में अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। मंगलवार सुबह से प्रदेश के करीब 20 शहरों में तेज आंधी के साथ रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे राज्य के 75 जिलों में मौसम विभाग (IMD) ने आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। पेड़ गिरने और बिजली गिरने की घटनाओं में कम से कम 7 लोगों की मौत की खबर है। IMD के अनुसार, अगले 24 घंटे में दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर सकता है, जिससे गर्मी से राहत मिलने के साथ ही भारी बारिश की संभावना है।

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कई शहरों में हुई तेज बारिश

मंगलवार सुबह लखनऊ, कानपुर नगर, अयोध्या, गोरखपुर, बरेली, देवरिया, सीतापुर, बहराइच, पीलीभीत, गोंडा, रायबरेली, ललितपुर, चित्रकूट, जौनपुर समेत कई शहरों में तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई।

Stormy rain

गोरखपुर में तेज आंधी के कारण पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। देवरिया और जौनपुर में खेतों में पानी भर गया। रायबरेली में बिजली चमकने के साथ बारिश हुई, जबकि कई इलाकों में बादल छाए रहे और बीच-बीच में हल्की धूप निकली।

आगरा मंगलवार को प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 42.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। हालांकि, बारिश वाले इलाकों में तापमान में 4-8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली।

 पूर्वांचल में हुई बारिश

पिछले 24 घंटों में मौसम की इस उथल-पुथल ने कई परिवारों को प्रभावित किया। फिरोजाबाद में तेज आंधी के दौरान ई-रिक्शा पर पेड़ गिरने से 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हुए। बस्ती और महराजगंज में बिजली गिरने से एक महिला और 9 वर्षीय बच्चे की मौत की सूचना है। कुल मिलाकर पेड़ गिरने और बिजली गिरने की घटनाओं में 7 लोगों की जान गई है। प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिया है। प्रभावित इलाकों में पेड़ हटाने के लिए चेनसॉ और क्रेन का उपयोग किया जा रहा है। बिजली विभाग ने क्षतिग्रस्त लाइनों को ठीक करने के लिए टीमों को तैनात किया है।

 24 घंटे में आयेगा मानसून

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल बिहार के मोतिहारी इलाके से आगे बढ़ रहा है। यह 19 दिन से यूपी-बिहार बॉर्डर पर अटका हुआ था। लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि, अगले 24 घंटे में मानसून यूपी में दस्तक दे सकता है। सबसे पहले तराई इलाकों कुशीनगर, महराजगंज और सिद्धार्थनगर में भारी बारिश होने की संभावना है।सामान्य रूप से मानसून 20 जून तक यूपी पहुंच जाता है, लेकिन इस बार करीब 10 दिन की देरी है।

1 जुलाई से शुरू होगा बारिश का दौर

IMD की भविष्यवाणी के अनुसार, 1 जुलाई से 5 जुलाई के बीच पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो सकता है, जिससे तापमान में 8-10 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आ सकती है। IMD ने आज पूरे प्रदेश के 75 जिलों में आंधी-बारिश का येलो/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 38 जिलों में भारी बारिश, कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी

पूर्वी यूपी में तूफानी हवाओं (40-60 किमी/घंटा) की संभावना जताई गई है। साथ ही लोगों को सलाह दी गई है कि वे खुले में न निकलें, खासकर आंधी-बारिश के समय,  पेड़ों या खंभों के नीचे आश्रय न लें, बिजली के उपकरणों से दूर रहें, खेतों में पानी भरने की स्थिति में फसलों की सुरक्षा करें, ड्राइविंग के दौरान सावधानी बरतें, क्योंकि सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं।

 CMO ने दिए तैयारी के निर्देश

उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून और मानसून की बारिश अक्सर तबाही मचाती रही है। मई 2026 में ही एक तूफान में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी, जिसमें बिजली गिरने और पेड़ गिरने से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था।

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इस बार प्रशासन पहले से अलर्ट मोड में है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत सामग्री, एम्बुलेंस और पावर रिस्टोरेशन टीमों को तैयार रखा जाए।

किसानों की उम्मीदें जगी

मानसून की देरी से खरीफ फसलों (धान, मक्का, सोयाबीन आदि) की बुआई प्रभावित हुई थी। अब बारिश के साथ किसानों में उम्मीद जगी है, लेकिन अचानक भारी बारिश से जलभराव और फसल डूबने का खतरा भी है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि, वे जल निकासी का प्रबंध करें और मौसम अपडेट फॉलो करें।

जलवायु परिवर्तन 

वैज्ञानिकों का कहना है कि, जलवायु परिवर्तन के कारण प्री-मानसून गतिविधियां अधिक तीव्र और अनियमित हो रही हैं। तापमान में वृद्धि से वायुमंडल में नमी बढ़ रही है, जिससे तेज आंधी-बारिश और बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं। उत्तर प्रदेश जैसे घनी आबादी वाले राज्य में यह स्थिति चिंताजनक है।

 खत्म होगा लू का प्रकोप

IMD के अनुसार, मानसून के आने के बाद जुलाई के पहले सप्ताह में पूरे यूपी में अच्छी बारिश होने की संभावना है। इससे लू का प्रकोप पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। हालांकि, कुछ इलाकों में अतिवृष्टि से बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं, खासकर पूर्वी और तराई क्षेत्रों में।

 

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