पूर्वांचल के बाहुबली बृजेश सिंह ने ठोकी ताल, यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने का किया ऐलान

वाराणसी। पूर्वांचल की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला नाम एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। बाहुबली और पूर्व माफिया डॉन के रूप में पहचाने जाने वाले बृजेश सिंह ने उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार होने का ऐलान कर दिया है। वाराणसी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के पास पप्पू की चाय की मशहूर दुकान पर मीडिया से बातचीत करते हुए बृजेश सिंह ने यह घोषणा की। हालांकि, वे किस पार्टी के टिकट पर और किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे, इसका खुलासा नहीं करेंगे। उनके इस ऐलान ने पूर्वांचल की राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

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बोले- जनता की सेवा करनी है

यह ऐलान किसी बड़े मंच या प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं हुआ। बृजेश सिंह ने रविवार को वाराणसी के जगन्नाथ मंदिर के पास स्थित मशहूर चाय की दुकान पप्पू की चाय पर मीडिया के सामने अपनी चुनावी मंशा जाहिर की। यह अपने आप में एक दिलचस्प संकेत था, एक ऐसे नेता की आम जनता से जुड़ने की कोशिश जो खुद को अब राजनीति के जरिये समाज सेवा करने का इच्छुक बता रहे हैं।

Brijesh Singh Assembly Election

बृजेश सिंह ने कहा कि आम लोगों की सेवा के लिए राजनीति में आना जरूरी है। उन्होंने कहा, मैं रघुवंशी हूं, वचन देता हूं कि, आपकी किसी भी पीड़ा में सहभागी बनूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि, उन्हें धन-दौलत की कोई जरूरत नहीं है, बस जनता की सेवा करनी है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

बृजेश सिंह ने पार्टी और सीट का खुलासा नहीं किया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। बृजेश सिंह के परिवार की बीजेपी से पुरानी और गहरी नजदीकियां हैं। उनके भतीजे सुशील सिंह चंदौली जिले की सैयदराजा विधानसभा सीट से लगातार चार बार बीजेपी के विधायक चुने गए हैं। उनकी पत्नी अन्नपूर्णा सिंह भी एमएलसी हैं। इसके बावजूद सूत्रों की मानें तो बृजेश सिंह बीजेपी के बजाय एनडीए के किसी सहयोगी दल के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा ओमप्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी यानी SBSP के टिकट से चुनाव लड़ने की है। हालांकि इस पर भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह भी तय माना जा रहा है कि, वे पूर्वांचल की किसी विधानसभा सीट से ही मैदान में उतरेंगे।

बृजेश सिंह अकेले नहीं बल्कि उनके बेटे सिद्धार्थ सिंह के भी जौनपुर से विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चाएं हैं। अगर ऐसा हुआ, तो बाप-बेटे की जोड़ी एक साथ चुनाव मैदान में होगी जो पूर्वांचल की राजनीति में एक नया और दिलचस्प अध्याय जोड़ेगा। हालांकि, बृजेश सिंह ने अपने बेटे के चुनाव लड़ने की बात को अफवाह बताकर खारिज किया है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, यह चर्चा बेवजह नहीं है।

तीन दशक से है परिवार का कब्जा

बृजेश सिंह का परिवार पूर्वांचल की राजनीति में कोई नया चेहरा नहीं है। वाराणसी की एमएलसी सीट पर इस परिवार का तीन दशकों से कब्जा बना हुआ है और यह अपने आप में एक अनोखा राजनीतिक रिकॉर्ड है। बृजेश सिंह के बड़े भाई उदयभान सिंह उर्फ चुलबुल सिंह 1998 से 2004 तक वाराणसी से बीजेपी के एमएलसी रहे।

उनकी मृत्यु के बाद 2010 में बृजेश सिंह की पत्नी अन्नपूर्णा सिंह वाराणसी से एमएलसी बनीं, फिर 2016 में एक ऐतिहासिक घटना हुई, बृजेश सिंह जेल में बंद थे और तब भी वे निर्विरोध एमएलसी चुन लिए गए। 2022 में अन्नपूर्णा सिंह ने बीजेपी उम्मीदवार को हराकर दोबारा एमएलसी की सीट जीतीं, तब भी बृजेश सिंह जेल में थे। इस परिवार की राजनीतिक पकड़ का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा।

बृजेश सिंह की कहानी पूर्वांचल के उस दौर की कहानी है जब बाहुबल और राजनीति के बीच की रेखा बेहद धुंधली थी। अस्सी के दशक में वे पूर्वांचल में बाहुबली के रूप में उभरे। उन पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। मकोका, गैंगस्टर एक्ट, हत्या और अपहरण जैसे तीस से अधिक गंभीर मामलों में उनके खिलाफ केस दर्ज थे।

लंबे समय तक काट चुके हैं फरारी

पूर्वांचल में माफिया मुख्तार अंसारी उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी थे। दोनों के बीच कई सालों तक गैंगवार चला, जिसमें कई लोगों की जानें गईं और पूरे पूर्वांचल में दहशत का माहौल रहा। बृजेश सिंह लंबे समय तक फरार रहे और अंततः 2008 में ओडिशा के भुवनेश्वर में उनकी गिरफ्तारी हुई।

गिरफ्तारी के बाद बृजेश सिंह के खिलाफ 30 से अधिक गंभीर आपराधिक मामलों की अदालत में सुनवाई हुई, लेकिन धीरे-धीरे एक के बाद एक केस खत्म होते गए। हर मामले में गवाह पलटते गए, आरोप साबित नहीं हो सके और केस बंद होते गए। 2022 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी। तब तक वे 13 साल जेल में काट चुके थे। जेल से निकलने के बाद बृजेश सिंह ने खुद को सामाजिक कार्यों में लगा लिया।

सामाजिक गतिविधियों में हुए एक्टिव

जेल से बाहर आने के बाद बृजेश सिंह पूर्वांचल में सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हैं। वे वाराणसी के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करा रहे हैं और इस मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। यह उनकी नई छवि गढ़ने की कोशिश मानी जा रही है, एक ऐसे नेता की छवि जो धर्म, समाज और जनसेवा से जुड़ा हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बृजेश सिंह का चुनाव लड़ने का ऐलान पूर्वांचल की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है। उनके समर्थकों की एक बड़ी संख्या है और उनका जमीनी प्रभाव आज भी बरकरार है। अब देखना यह होगा कि वे किस पार्टी का दामन थामते हैं और किस सीट से मैदान में उतरते हैं।

 

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