
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में जल्द ही बड़ा मंत्रिमंडल विस्तार होने के प्रबल संकेत मिल रहे हैं। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से आ रहे संकेतों के अनुसार यह फेरबदल संसद के मानसून सत्र शुरू होने से पहले यानी जुलाई के तीसरे सप्ताह से पहले किसी भी वक्त हो सकता है। राजधानी के राजनीतिक गलियारों में इस फेरबदल को लेकर जोरदार चर्चाएं छिड़ी हुई हैं और हर दिन नए नाम और नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।
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बीजेपी अध्यक्ष की नई टीम का ऐलान जल्द
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रिपरिषद में यह फेरबदल बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की नई पार्टी टीम की घोषणा के साथ-साथ किया जाएगा। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने पदाधिकारियों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है और नितिन नवीन की टीम का ऐलान बेहद करीब बताया जा रहा है। संगठन में इस बार युवा और ऊर्जावान चेहरों को प्रमुख भूमिकाएं दी जाने की संभावना है। बताया जा रहा है कि, बीजेपी अध्यक्ष ने पिछले सप्ताह कई केंद्रीय राज्य मंत्रियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया था, जिसमें सांगठनिक और सरकारी स्तर पर होने वाले बदलावों पर गहन मंथन हुआ।

इस पूरे फेरबदल में बीजेपी का एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत सबसे अहम भूमिका निभाएगा। केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश बीजेपी की और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी की संगठनात्मक जिम्मेदारी पहले ही सौंपी जा चुकी है। इस नियम के तहत दोनों मंत्रियों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद से हटना लगभग तय माना जा रहा है। उनकी जगह पार्टी संगठन से आए नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा। यह अदला-बदली मोदी सरकार की रणनीतिक पुनर्संरचना का हिस्सा मानी जा रही है।
धर्मेंद्र प्रधान की कुर्सी संकट में
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की स्थिति को लेकर सबसे अधिक अनिश्चितता बनी हुई है। उनके मंत्रालय से जुड़े कई गंभीर विवाद लगातार सुर्खियों में रहे हैं। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) का प्रश्नपत्र लीक प्रकरण और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में सामने आई अनियमितताएं इनमें सबसे बड़े हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, इन विवादों की छाया प्रधान के भविष्य पर भी पड़ रही है और फेरबदल की स्थिति में उनके विभाग में बदलाव या उनकी विदाई दोनों संभव हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन पर फैसला
केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू की राज्यसभा सदस्यता 21 जून को समाप्त हो चुकी है, क्योंकि पार्टी ने हाल ही में संपन्न राज्यसभा चुनावों में दोनों को उम्मीदवार नहीं बनाया। कुरियन पहले ही अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि बिट्टू अभी भी तकनीकी रूप से मंत्री बने हुए हैं।
रवनीत सिंह बिट्टू के बारे में बताया जा रहा है कि, पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने की जिम्मेदारी सौंपी है। पूर्व प्रधानमंत्री बेअंत सिंह के पौत्र और प्रभावशाली जाट सिख समुदाय के बड़े चेहरे माने जाने वाले बिट्टू पंजाब में पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण चुनावी संपत्ति माने जाते हैं।

अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार के शीर्ष अधिकारियों के बीच इन तीनों राज्यों से अधिक प्रतिनिधियों को मोदी मंत्रिपरिषद में जगह देने की राय प्रबल हो रही है। राजनीतिक, जातीय, क्षेत्रीय और राज्यवार समीकरणों को साधते हुए मंत्रिपरिषद में संतुलन बनाना इस फेरबदल की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल में बीजेपी की हालिया शानदार जीत के बाद वहां से भी पार्टी के कुछ सांसदों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। यह संकेत देता है कि मोदी सरकार बंगाल में अपनी नई राजनीतिक ताकत को सरकार में उचित भागीदारी देना चाहती है।
नए सहयोगियों को भी मिल सकती है जगह
मंत्रिमंडल विस्तार में सिर्फ बीजेपी के नेता ही नहीं, बल्कि गठबंधन दलों के नेताओं को भी जगह मिलने की प्रबल संभावना है। तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के बागी गुटों के कुछ प्रतिनिधियों को मंत्री पद मिल सकता है। शिंदे गुट वाली शिवसेना के किसी वरिष्ठ नेता को पूर्ण कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने की भी चर्चा है।
साथ ही आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए सात राज्यसभा सांसदों में से एक या दो को भी मंत्रिपरिषद में स्थान मिल सकता है। हालांकि, तृणमूल और उबाठा के बागी सदस्यों को मंत्री बनाने का अंतिम फैसला लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय पर निर्भर करेगा, क्योंकि उनके मूल दलों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग कर रखी है।
राष्ट्रपति से मुलाकात ने दी अटकलों को हवा
मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों को सबसे अधिक बल मिला 23 जून को तब मिला, जब प्रधानमंत्री मोदी पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिले। इसके ठीक दो दिन बाद 25 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी राष्ट्रपति से मिले। सरकार ने दोनों मुलाकातों को शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, इन बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार पर गहन चर्चा हुई होगी।
प्रधानमंत्री मोदी 27 से 29 जून तक सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर हैं और 6 से 11 जुलाई के बीच इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के दौरे पर जाने की भी संभावना है। जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची भी 1 से 3 जुलाई तक नई दिल्ली की यात्रा पर रहेंगी। इन सभी व्यस्तताओं को देखते हुए फेरबदल की तारीख को प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के अनुसार ही तय किया जाएगा।
हरदीप पुरी, बीएल वर्मा और राज्यपालों पर भी निगाह
दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों हरदीप पुरी और बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल नवंबर में समाप्त होने वाला है। शीर्ष नेतृत्व उन्हें फिर से उम्मीदवार बनाएगा या नहीं, यह महत्वपूर्ण सवाल है। वहीं तीन राज्यपालों कर्नाटक के थावर चंद गहलोत, मध्य प्रदेश के मंगुभाई पटेल और उत्तराखंड के लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह का कार्यकाल भी क्रमशः जुलाई और सितंबर में पूरा होगा। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल से बाहर किए जाने वाले कुछ वरिष्ठ नेताओं को राज्यपाल पद की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
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