विदेशी फंडिंग पर मोदी सरकार का शिकंजा, NGO को अब देना होगा पाई-पाई का हिसाब

नई दिल्ली।  केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा लेने के नियमों में बड़े और व्यापक बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सीधा असर देशभर के उन हजारों गैर सरकारी संगठनों पर पड़ेगा, जो विदेश से फंड लेकर भारत में काम करते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करके ‘फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट’ यानी FCRA के नियमों में संशोधन की जानकारी दी। इन नए नियमों का मुख्य मकसद विदेशी फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता लाना, जवाबदेही सुनिश्चित करना और सबसे अहम धर्मांतरण की आड़ में होने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाना है।

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धर्मांतरण पर लगेगी लगाम

नए नियमों में धार्मिक गतिविधियों को लेकर एक स्पष्ट और महत्वपूर्ण रेखा खींची गई है। FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए जो अनुसूची तैयार की गई है, उसमें धार्मिक स्थलों का निर्माण, मरम्मत और रखरखाव, धार्मिक शिक्षा को बढ़ावा देना, भक्ति संगीत का प्रचार-प्रसार और आस्था की परंपराओं का दस्तावेजीकरण जैसी कई गतिविधियों को मंजूरी दी गई है, लेकिन इन सबके बीच एक शर्त बिल्कुल साफ है कि धर्मांतरण को इस सूची से पूरी तरह बाहर रखा गया है।

crackdown on conversion A

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, धार्मिक शिक्षा, नैतिक शिक्षा, सत्संग, प्रवचन और ध्यान शिविरों का आयोजन, मूल निवासियों और आदिवासी आस्था की प्रथाओं, रीति-रिवाजों और पूजा-पद्धतियों का दस्तावेजीकरण, संरक्षण और पुनरुद्धार ये सभी काम धर्म परिवर्तन कराए बिना किए जाने चाहिए। यह शर्त उन संगठनों पर सीधा प्रहार है जो धार्मिक और सामाजिक सेवा की आड़ में धर्मांतरण को बढ़ावा देने के लिए विदेशी पैसे का इस्तेमाल करते रहे हैं।

देनी होगी सोशल मीडिया अकाउंट्स की जानकारी

नए नियमों का एक और अहम पहलू यह है कि, अब विदेशी फंड पाने वाले एनजीओ को FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन या रिन्यूअल के लिए अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की पूरी जानकारी सरकार को देनी होगी। सरकार इन अकाउंट्स पर नजर रखेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि, कोई संगठन विदेशी फंड का इस्तेमाल देश विरोधी, भड़काऊ या भ्रामक सामग्री फैलाने के लिए तो नहीं कर रहा। इसके अलावा एनजीओ को यह भी बताना होगा कि, क्या उनके मुख्य पदाधिकारियों ने कोई किताब या लेख प्रकाशित किया है, क्योंकि उन्हें समाचार या करंट अफेयर्स से जुड़ी सामग्री बनाने या प्रसारित करने की अनुमति नहीं है।

विदेशी फंड लेने के लिए मंजूरी जरूरी

नोटिफिकेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि, यदि किसी संगठन के मुख्य पदाधिकारियों में भारतीय मूल के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक शामिल हैं, तो ऐसे संगठनों को FCRA के तहत विदेशी फंड लेने के लिए रजिस्ट्रेशन या पूर्व मंजूरी देने पर आमतौर पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, इसमें एक अपवाद का भी प्रावधान है।

केंद्र सरकार एक आदेश के जरिए ऐसे विशेष मामले या परिस्थितियां तय कर सकती है, जिनमें विदेशी नागरिकों को किसी संगठन का मुख्य पदाधिकारी बनने की अनुमति दी जा सके।

नए नियमों में मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब इसमें कंपनी के डायरेक्टर, फर्म के पार्टनर, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता और संस्था के प्रबंधन पर नियंत्रण रखने वाले किसी भी व्यक्ति को शामिल किया गया है।

 बताना होगा काम का मकसद और राज्य

एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि, यदि विदेशी पैसा इंटरमीडियरी रेमिटेंस व्हीकल्स या डोनर एडवाइज्ड फंड्स जैसे माध्यमों से आता है, तो एनजीओ को अपनी एप्लीकेशन में उस असली दानकर्ता की जानकारी देनी होगी, जो पैसे का मूल स्रोत है। यह नियम उन संगठनों पर लगाम लगाने के लिए बनाया गया है, जो बिचौलियों के जरिए संदिग्ध विदेशी पैसा भारत में लाते हैं और असली स्रोत को छुपाते हैं।

नए नियमों के तहत विदेशी फंड के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले हर एनजीओ को अपने काम का मकसद और उन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों का नाम बताना होगा जहां वे काम करना चाहते हैं। यह जानकारी उन्हें नियमों के साथ जुड़ी अनुसूची में दी गई सूची में से चुनकर देनी होगी। इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक कैटेगरी के मकसद शामिल हैं। यह जानकारी एनजीओ को जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट पर भी अंकित की जाएगी। साथ ही अब सालाना रिटर्न में वित्तीय विवरण के साथ-साथ विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट भी शामिल करना अनिवार्य होगा।

75% खर्च के बाद ही मिलेगी अगली किस्त

सरकार ने फंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक सख्त वित्तीय नियम भी लागू किया है। पूर्व अनुमति के तहत किसी खास मकसद के लिए विदेशी फंड पाने वाले एनजीओ को फंड की अगली किस्त तभी जारी की जाएगी जब उसने पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा खर्च कर लिया हो। इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि, वह फंड के इस्तेमाल की जांच के लिए जमीनी स्तर पर फील्ड इंक्वायरी भी करेगी।

उन एनजीओ पर भी शिकंजा कसा गया है जो लाइसेंस तो रखते हैं लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं करते। नए नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराने या उसे रद्द होने से बचाने के लिए जरूरी है कि संगठन ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में विदेशी चंदे से अपनी चुनी हुई गतिविधियों पर कम से कम 10 लाख रुपये खर्च किए हों। यह नियम उन संगठनों की छंटनी करेगा जो केवल कागजों पर जिंदा हैं।

2026 से पहले रजिस्टर्ड सभी संस्थाओं को एक साल का समय दिया गया है कि, वे अपने मकसद और काम के राज्यों की जानकारी सरकार को दें। साथ ही एप्लीकेशन में हर अतिरिक्त राज्य या मकसद जोड़ने के लिए 300 रुपये की अतिरिक्त फीस देनी होगी। कुल मिलाकर ये नए नियम विदेशी फंडिंग की पूरी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और देशहित के अनुकूल बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम हैं।

 

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