
नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स (BRICS) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ मुलाकात कर वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण बेहद स्पष्ट से रखा। मंगलवार को हुई इस अहम बैठक में पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर जोर देकर एक साथ कई देशों को बड़ा और स्पष्ट संदेश दे दिया।
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मील का पत्थर साबित होगी ब्रिक्स की बैठक
जानकारों का कहना है कि, भारत के इन दोनों मुद्दों ने जहां पाकिस्तान की नींदें उड़ा दी हैं, वहीं ग्लोबल साउथ की चर्चा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी बिल्कुल पंसद नहीं आई। इस तरह ये दोनों मसले पाकिस्तान और अमेरिका की फिर से उभरती दोस्ती के बीच मिर्ची का काम करेंगे।

पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों के एनएसए से मुलाकात के दौरान बिल्कुल साफ शब्दों में कहा कि, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि, ब्रिक्स के सदस्य देश आतंकवाद और साइबर सुरक्षा से लेकर अन्य उभरती चुनौतियों से निपटने में दुनिया में बड़ी और निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि, चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में आतंकवाद और साइबर सिक्योरिटी से लेकर उभरती तकनीक के दौर में सुरक्षा सहयोग और साझा मुश्किलों का सामना करने में ब्रिक्स की प्रमुख और अपरिहार्य भूमिका है। भारत अपनी अध्यक्षता में व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत करने तथा एक सुरक्षित एवं समावेशी दुनिया के निर्माण में पूरा योगदान देगा।
देशों की सीमा पार कर रहे आधुनिक खतरे
इस बैठक से पहले ब्रिक्स देशों के एनएसए की आपसी बैठक 22 जून से दो दिनों के लिए नई दिल्ली में हुई जिसकी अगुवाई भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने की। डोभाल ने अपने समकक्षों को संबोधित करते हुए कहा कि, हम यहां अलग-अलग महाद्वीपों और विभिन्न क्षेत्रों से आए हैं और यह ऐसा समूह है जहां हमारे पास विविध तरह का अनुभव है।
उन्होंने सदस्य देशों को आगाह किया कि, सुरक्षा के आधुनिक खतरे तेजी से देशों की सीमाएं पार कर रहे हैं और रक्षा की परंपरागत तकनीक एवं कूटनीतिक ढांचे को नाकाम करने लगे हैं। डोभाल ने साइबर अटैक, आतंकवाद के नए और खतरनाक तरीकों तथा उभरती तकनीक की वजह से पैदा हो रहे नए खतरों की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया और कहा कि, गैर-पारंपरिक खतरों ने देशों की सीमाएं पार कर ली हैं और जवाबी कार्रवाई के पारंपरिक तरीकों को नाकाम करने वाले सिस्टम तैयार कर लिए हैं।
कई अहम विषयों पर हुआ मंथन
दो दिनों तक चली इस महत्वपूर्ण बैठक में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, सप्लाई चेन में आ रही बाधाएं, आतंकी नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल की जा रही नई और खतरनाक तकनीक, साइबर सिक्योरिटी और पर्यावरण को हो रहे नुकसान की वजह से पैदा हो रही वैश्विक अस्थिरता जैसे अहम विषयों पर गहन मंथन किया गया।

इन सभी मुद्दों पर ब्रिक्स देशों के बीच साझा रणनीति बनाने और मिलकर काम करने पर सहमति बनी। सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने 2026 में भारत की ब्रिक्स चेयरशिप के प्रति अपना पूर्ण और उत्साहजनक समर्थन जाहिर किया जो भारत की बढ़ती वैश्विक साख का प्रमाण है।
भारत द्वारा ब्रिक्स मंच पर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का मुद्दा प्रमुखता से उठाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा और सीधा संदेश है। पाकिस्तान पर लंबे समय से आतंकवाद को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं और अब जब ब्रिक्स जैसे बड़े वैश्विक मंच पर इस मुद्दे को इतनी प्रमुखता दी जा रही है तो यह निश्चित रूप से इस्लामाबाद के लिए चिंता का विषय बनेगा।
11 सदस्य राष्ट्र हैं ब्रिक्स में
वहीं दूसरी तरफ ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं की बात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रास नहीं आती क्योंकि वे हमेशा से अमेरिका फर्स्ट की नीति पर चलते हैं। ऐसे में भारत का यह दोहरा संदेश वैश्विक कूटनीति में एक बड़े और साहसी कदम के रूप में देखा जा रहा है।
वर्तमान में ब्रिक्स में 11 सदस्य राष्ट्र हैं जिनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसके अलावा बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम जैसे 10 पार्टनर देश भी इससे जुड़े हैं। इतने बड़े और विविध समूह की अध्यक्षता करते हुए भारत की जिम्मेदारी बेहद बड़ी है और पीएम मोदी की इस बैठक में की गई पहल यह साबित करती है कि भारत इस जिम्मेदारी को पूरी गंभीरता और दृढ़ता के साथ निभाने के लिए तैयार है।
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