असीम मुनीर की कूटनीतिक चाल, पाकिस्तान में ईरानी राष्ट्रपति का हुआ शाही स्वागत

इस्लामाबाद। ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान को उस समय करारा झटका लगा जब स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ हाथ मिलाने और ग्रुप फोटो खिंचवाने से साफ इनकार कर दिया।

यह घटना पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों पर एक बड़े सवालिया निशान की तरह थी, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हार नहीं मानी और ईरान को मनाने के लिए एक बड़ा कूटनीतिक दांव खेला। पाकिस्तान ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित करके तेहरान के साथ संबंधों को नई गर्माहट देने की कोशिश की है।

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फाइटर जेट ने किया एस्कार्ट

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की पाकिस्तान यात्रा को इस्लामाबाद ने बेहद खास और यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जैसे ही पेजेश्कियान का विमान पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हुआ, पाकिस्तान वायु सेना के शक्तिशाली JF-17 थंडर फाइटर जेट्स ने उनके विमान को एस्कॉर्ट करना शुरू कर दिया।

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यह सम्मान किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के लिए बेहद खास माना जाता है और इससे साफ जाहिर होता था कि पाकिस्तान इस यात्रा को कितनी अहमियत दे रहा था। इस्लामाबाद पहुंचने पर ईरानी राष्ट्रपति का औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया, जिसमें उन्हें 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इस पूरे स्वागत समारोह ने यह संदेश देने की कोशिश की कि, पाकिस्तान की नजर में ईरान के साथ रिश्ते कितने महत्वपूर्ण और गहरे हैं।

मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित एक विशेष और भव्य समारोह में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। कराची स्थित प्रतिष्ठित संस्था कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स पाकिस्तान की ओर से यह मानद उपाधि खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने हाथों से पेजेश्कियान को सौंपी।

गौरतलब है कि, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान पेशे से एक अनुभवी कार्डियक सर्जन रहे हैं, इसलिए यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी बेहद खास और भावनात्मक महत्व रखता था। यह पाकिस्तान की एक सोची-समझी और चतुर कूटनीतिक चाल थी जिससे ईरानी राष्ट्रपति को व्यक्तिगत स्तर पर भी जोड़ने की कोशिश की गई।

उल्लेखनीय है कि, इससे पहले पाकिस्तान ने ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को भी मानद उपाधि से सम्मानित किया था जो दर्शाता है कि यह पाकिस्तान की एक सुनियोजित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित पड़ाव रहा ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई अहम मुलाकात।

एकजुट हों मुस्लिम देश

इस्लामाबाद में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में पेजेश्कियान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि, शांति बनाए रखने में इस भाई जैसे और दोस्ताना देश की कोशिशें सच में तारीफ के काबिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि, पाकिस्तान की सक्रिय और रचनात्मक भूमिका इस्लामी दुनिया की एकता और भाईचारे में उसके गहरे विश्वास का प्रमाण है।

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इस बैठक में पेजेश्कियान ने एक बड़ा और महत्वाकांक्षी प्रस्ताव भी रखा जिसमें उन्होंने इस्लामी देशों का एक अलग और मजबूत गुट बनाने की वकालत की। उनका मानना था कि, अगर मुस्लिम देश एकजुट होकर एक मंच पर आ जाएं, तो वे वैश्विक राजनीति में अपनी आवाज और ज्यादा बुलंद कर सकते हैं।

पेजेश्कियान के इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर आसिम मुनीर ने सहमति जताते हुए कहा कि पाकिस्तान का हमेशा से यही मानना रहा है कि, दुनिया में किसी भी मुस्लिम देश को किसी भी प्रकार की तकलीफ नहीं होनी चाहिए और पाकिस्तान हर मुस्लिम देश के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने हाथ मिलाने से किया इंकार

दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता में सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है और इसके लिए उसने कई स्तरों पर कूटनीतिक प्रयास किए हैं, लेकिन स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ हाथ मिलाने और ग्रुप फोटो खिंचवाने से जब साफ मना कर दिया तो इससे पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों पर गहरा सवाल खड़ा हो गया।

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यह घटना बताती है कि, ईरान और अमेरिका के बीच की खाई अभी भी कितनी गहरी है और दोनों देशों के बीच अविश्वास का भाव किस हद तक बना हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए दोनों देशों को एक मेज पर बैठना और उनके बीच सार्थक संवाद कराना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

कई मोर्चों पर हित साधने की कोशिश

विशेषज्ञों का मानना है कि, पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में एक साथ कई मोर्चों पर अपने हित साधने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ वह अमेरिका की नजर में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद मध्यस्थ देश के रूप में अपनी छवि बनाना चाहता है तो दूसरी तरफ ईरान के साथ अपने पुराने और गहरे संबंधों को भी मजबूती देना चाहता है।

ईरानी राष्ट्रपति को मानद डॉक्टरेट देना, JF-17 से एस्कॉर्ट करना और 21 तोपों की सलामी देना ये सब उसी बड़ी रणनीति के हिस्से हैं। आसिम मुनीर की इस पूरे खेल में केंद्रीय भूमिका है और वे चाहते हैं कि, पाकिस्तान इस्लामी दुनिया में एक नेतृत्वकारी और निर्णायक भूमिका में आए। हालांकि यह रास्ता कितना आसान होगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

 

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