
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोग इस समय भीषण गर्मी, तेज लू और असहनीय उमस की मार झेल रहे हैं और हर किसी की निगाहें आसमान की तरफ टिकी हैं, लेकिन अब राहत की खबर आ गई है। मौसम विभाग का कहना कि, 28 जून को मानसून उत्तर प्रदेश में दस्तक दे देगा और उसके अगले ही दिन यानी 29 जून से प्रदेश के अधिकतर हिस्सों में जोरदार मानसूनी बारिश का दौर शुरू हो जाएगा।
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31 जिलों में लू का अलर्ट
हालांकि, इससे पहले अगले तीन दिनों तक यानी 24 से 27 जून तक गर्मी, लू और उमस का सिलसिला जारी रहेगा और प्रदेश के 31 जिलों में लू का येलो अलर्ट भी जारी किया गया है। प्री-मानसूनी बारिश के नाकाफी साबित होने की वजह से पूरे प्रदेश में लू जैसी स्थिति बनी हुई है जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोग घरों से निकलने में कतरा रहे हैं।

लखनऊ स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के सीनियर वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि, इस बार मानसून पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगा। 28 जून को सबसे पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में मानसून की दस्तक होगी। सोनभद्र, बलिया से लेकर गोरखपुर तक के इलाकों में पहली मानसूनी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार प्रदेश में प्रवेश करने के बाद मानसून बेहद तेज रफ्तार से आगे बढ़ेगा और देखते ही देखते पूरे प्रदेश को अपनी आगोश में ले लेगा। 29 जून से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी और तेज मानसूनी बारिश होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं जिससे तापमान में एकाएक बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी। मौसम विभाग का यह भी कहना है कि, मानसून आने के बाद वातावरण के ऊपरी भाग में तापमान तेजी से घटेगा जिससे उमस से भी लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और मौसम सुहावना हो जाएगा।
गर्मी से राहत की उम्मीद नहीं
मौसम विभाग के वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि, मानसून आने से पहले यानी 24 से 28 जून तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप, झुलसाने वाली तपिश और लू का असर बना रहेगा और लोगों को फिलहाल किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
हालांकि, इस दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में लगातार बन रहे पश्चिमी सिस्टम के कारण तेज हवाएं चलने और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की भी संभावना है, लेकिन मौसम विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं कि, इससे गर्मी और उमस से कोई स्थायी या उल्लेखनीय राहत नहीं मिलेगी। पश्चिमी यूपी में आंधी-बारिश जैसी स्थिति कुछ घंटों के लिए जरूर बन सकती है, लेकिन अगले ही कुछ घंटों में गर्मी और उमस फिर वापस लौट आएगी। ऐसे में लोगों को मानसून की असली राहत के लिए 28 जून तक का इंतजार करना ही होगा।
दोपहर में बाहर न निकलने की अपील
मौसम विभाग ने बुधवार को प्रदेश के 31 जिलों में लू चलने का येलो अलर्ट जारी किया है। अलर्ट वाले जिलों में प्रयागराज, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी और भदोही प्रमुख रूप से शामिल हैं। येलो अलर्ट जारी होने के साथ ही जिला प्रशासन ने भी लोगों से दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घरों से बाहर न निकलने की सख्त अपील की है।

इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी, छाछ, नींबू पानी और ओआरएस का सेवन करते रहने की भी सलाह दी गई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को इस दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है क्योंकि लू उनके लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है।
कई जिलों में 42 डिग्री के पार पहुंचा तापमान
इस समय प्रदेश में बांदा सबसे गर्म जिला बना हुआ है, जहां मंगलवार को अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गर्मी के मामले में प्रयागराज 42.8 डिग्री के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फतेहपुर में 42.6 डिग्री, वाराणसी में 42.5 डिग्री और हमीरपुर में 42.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि, प्रदेश के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में गर्मी का प्रकोप सबसे ज्यादा है। तेज धूप और लू के कारण सड़कें सुनसान पड़ी हैं, बाजारों में रौनक गायब है और लोग जरूरी काम के बिना घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं।
हल्की बारिश ने दिलाई गर्मी से राहत
मंगलवार को हापुड़, गौतमबुद्ध नगर, आगरा, अलीगढ़ और मथुरा समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में कहीं तेज हवाएं चलीं तो कहीं हल्की बारिश भी हुई जिससे लोगों को गर्मी से कुछ घंटों की राहत जरूर मिली और लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन बारिश थमते ही बढ़ी उमस ने लोगों की परेशानी को दोगुना कर दिया और लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि, जब तक मानसून पूरी तरह सक्रिय होकर पूरे प्रदेश को कवर नहीं कर लेता तब तक इस चिपचिपी और दमघोंटू उमस से स्थायी राहत मिलना संभव नहीं है। मानसून की यह दस्तक सिर्फ आम लोगों के लिए ही नहीं बल्कि प्रदेश के लाखों किसानों के लिए भी बेहद जरूरी और राहत भरी खबर है। खरीफ फसलों की बुवाई का यह सबसे उपयुक्त और महत्वपूर्ण समय होता है और मानसून की देरी से किसान पहले से ही चिंतित थे। धान, मक्का, बाजरा और दलहनी फसलों की बुवाई के लिए किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
28 जून को मानसून आने के बाद किसान बुवाई का काम तेजी से शुरू कर सकेंगे जिससे फसल उत्पादन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। कुल मिलाकर अगले तीन दिन प्रदेशवासियों के लिए कठिन जरूर हैं लेकिन 28 जून के बाद मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा और गर्मी की इस तपन से जल्द निजात मिलेगी।
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