
मास्को। आज जब दुनिया भर में हथियारों की होड़ मची है, रूस ने एक ऐसा हथियार विकसित कर लिया है, जिसने अमेरिका सहित पूरे यूरोप की नींद उड़ा दी है। यह हथियार है रूस की रहस्यमयी स्काईफॉल परमाणु मिसाइल है, जिसे आधिकारिक तौर पर 9एम179 बुरेवेस्तनिक के नाम से जाना जाता है। रूसी भाषा में बुरेवेस्तनिक का अर्थ होता है तूफान का अग्रदूत। और सच में ये मिसाइल अपने नाम की तरह ही दुनिया के लिए किसी तूफान से कम नहीं है।
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पुतिन ने 2018 में किया था जिक्र
स्काईफॉल मिसाइल का पहली बार सार्वजनिक जिक्र रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साल 2018 में एक मार्च को किया था। उस वक्त उन्होंने रूस के छह नए अत्याधुनिक रणनीतिक हथियारों का भी ऐलान किया था, जिनमें से बुरेवेस्तनिक सबसे चर्चित और सबसे रहस्यमयी हथियार रहा। पुतिन ने इसे रूसी शस्त्रागार का सबसे उन्नत और अजेय हथियार बताते हुए दावा किया था कि, दुनिया की कोई भी मिसाइल प्रणाली इसकी बराबरी नहीं कर सकती और न ही इसे रोक सकती है।

पुतिन ने कई मंचों पर इस मिसाइल की तारीफ करते हुए कहा है कि, यह हथियार रूस की रक्षा क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाता है। उनका दावा है कि, इसकी मारक क्षमता असीमित है और यह किसी भी मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेद सकती है।
ये है बुरेवेस्तनिक मिसाइल की खासियत
बुरेवेस्तनिक मिसाइल कई मायनों में दुनिया की अन्य मिसाइलों से बिल्कुल अलग है। सबसे पहली और सबसे बड़ी खासियत यह है कि, यह मिसाइल परमाणु प्रणोदन प्रणाली यानी न्यूक्लियर प्रपल्शन सिस्टम से चलती है। इसका मतलब यह है कि, यह मिसाइल परमाणु ऊर्जा से संचालित होती है, जिससे इसकी उड़ान की अवधि और दूरी दोनों कहीं अधिक हो जाती हैं।
अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के प्रोफेसर जेक हेक्ला और आर. स्कॉट केम्प ने इस मिसाइल पर गहन शोध किया है। उनकी रिपोर्ट के अनुसार बुरेवेस्तनिक मिसाइल डायरेक्ट साइकिल एयर ब्रीथिंग न्यूक्लियर प्रपल्शन सिस्टम का उपयोग करती है, जो संभवतः एक परमाणु ऊर्जा चालित टर्बोजेट इंजन से संचालित होती है। यह तकनीक इसे पारंपरिक मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक घातक बनाती है।
900 किलोमीटर प्रति घंटा है रफ्तार
MIT के इन्हीं वैज्ञानिकों के अनुसार, इस मिसाइल की कुल लंबाई लगभग 31 फीट यानी 9.5 मीटर है और इसके पंखों का फैलाव लगभग 18 फीट यानी 5.6 मीटर है। यह मिसाइल मैक 0.75 की गति से उड़ती है, जो ध्वनि की गति का लगभग 75 प्रतिशत है। इस हिसाब से इसकी रफ्तार लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटा के करीब बैठती है।
रूस का दावा है कि, बुरेवेस्तनिक मिसाइल की मारक क्षमता असीमित है, लेकिन पश्चिमी विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि, यह मिसाइल अधिकतम 14,000 किलोमीटर तक के लक्ष्य को निशाना बना सकती है। यह दूरी इतनी विशाल है कि, रूस अपनी सीमा से ही अमेरिका के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकता है।
रेडियोएक्टिव पदार्थ छोड़ती है मिसाइल
रूसी जनरल स्टाफ के प्रमुख वालेरी गेरासिमोव ने दावा किया है कि, 21 अक्टूबर 2025 को बुरेवेस्तनिक मिसाइल ने अपनी परीक्षण उड़ान में 15 घंटे में 14,000 किलोमीटर की दूरी तय की। यह दावा सच साबित होता है, तो यह मिसाइल वाकई दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल बन जाती है। बुरेवेस्तनिक मिसाइल को और भी खतरनाक बनाती है इसकी एक विशेष और भयावह खूबी।

MIT के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि, यह मिसाइल अपनी उड़ान के दौरान रास्ते में रेडियोएक्टिव पदार्थ छोड़ती जाती है। इसका अर्थ यह है कि, यह मिसाइल केवल अपने लक्ष्य पर ही हमला नहीं करती, बल्कि उड़ान के दौरान जिन क्षेत्रों से गुजरती है, वहां भी रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैला देती है। यह इसे परंपरागत परमाणु हथियारों से भी कहीं अधिक विनाशकारी बना देता है।
रडार भी नहीं पकड़ सकता
इस मिसाइल की एक और बड़ी खासियत यह है कि, यह जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है। सतह के बेहद करीब उड़ने के कारण इसे किसी भी रडार प्रणाली के जरिए डिटेक्ट करना मुश्किल हो जाता है। आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों आमतौर पर ऊंचाई पर आने वाले खतरों को पकड़ने में सक्षम होती हैं, लेकिन जमीन से सटकर उड़ने वाली इस मिसाइल को रोकना लगभग असंभव हो जाता है। यही कारण है कि अमेरिका और NATO देश इस मिसाइल को लेकर सबसे अधिक चिंतित हैं।

हालांकि, रूस इस मिसाइल को लेकर बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन परीक्षणों का इतिहास उतना शानदार नहीं रहा है। न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से अब तक बुरेवेस्तनिक मिसाइल के 13 ज्ञात परीक्षण दर्ज किए गए हैं। इनमें से केवल दो परीक्षण ही आंशिक रूप से सफल रहे हैं। शेष परीक्षण विफल रहे या अधूरे रहे। यह तथ्य इस बात की ओर इशारा करता है कि, इस मिसाइल की तकनीक अभी भी पूरी तरह परिपक्व नहीं हो पाई है।
मिसाइल की काट खोजने में जुटे यूरोपीय देश
भले ही बुरेवेस्तनिक मिसाइल के परीक्षण पूरी तरह सफल न रहे हों, लेकिन इसकी अवधारणा और तकनीक ही वैश्विक सुरक्षा के लिए गहरी चिंता का विषय है। एक ऐसी मिसाइल जो परमाणु ऊर्जा से चलती हो, रडार को चकमा दे सके, उड़ान के दौरान रेडियोएक्टिव प्रदूषण फैलाए और 14,000 किलोमीटर दूर तक वार करने में सक्षम हो, यह किसी भी देश के लिए बुरे सपने जैसी स्थिति है।
अमेरिका और यूरोपीय देश इस मिसाइल की काट खोजने में जुटे हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। रूस का यह हथियार 21वीं सदी की हथियार दौड़ को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि, अगर यह मिसाइल पूरी तरह कार्यक्षम हो गई तो वैश्विक सैन्य संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
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