मोबाइल की लत से सूख रही हैं आपकी आंखें! ये हैं ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण और बचाव

आजकल सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक मोबाइल हमारे हाथ से छूटता ही नहीं। ऑफिस का काम हो, सोशल मीडिया ब्राउज करना हो या फिर रील्स देखना, हमारा स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि, मोबाइल की यह लत आपकी आंखों की प्राकृतिक नमी को चुपके-चुपके छीन रही है।

आजकल अस्पतालों की ओपीडी में ड्राई आई सिंड्रोम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह हमारा स्मार्टफोन ही है। बड़े हों या बच्चे, हर किसी की दिनचर्या अब मोबाइल से शुरू होती है और रात को सोने से ठीक पहले भी स्क्रीन के सामने घंटों गुजर जाते हैं।

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बच्चों की बात करें तो ज्यादातर बच्चे मोबाइल देखे बिना खाना भी नहीं खाते। कई रिसर्च अध्ययनों में यह सामने आया है कि, मोबाइल देखते हुए खाना खाने वाले बच्चों का पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे उनकी ग्रोथ भी ठीक से नहीं हो पाती। इस लेख में हम ड्राई आई सिंड्रोम की बढ़ती समस्या, इसके कारणों, लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

क्या है ड्राई आई सिंड्रोम 

नेत्र रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि, आंखों को स्वस्थ रखने के लिए आंसुओं की एक पतली परत हमेशा बनी रहनी चाहिए। यह परत आंख की सतह को नम रखती है, संक्रमण से बचाती है और साफ दृष्टि प्रदान करती है। सामान्य रूप से एक स्वस्थ व्यक्ति एक मिनट में करीब 15 से 20 बार पलकें झपकाता है।

Dry Eye Syndrome

पलक झपकने से आंसुओं की परत पूरे आंख पर फैलती है और नमी बनी रहती है, लेकिन जब हम मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन पर कोई रोचक वीडियो, काम या गेम देखते हैं तो हमारा ध्यान पूरी तरह केंद्रित हो जाता है। नतीजतन हम पलक झपकना भूल जाते हैं।

पलक झपकने की दर घटकर मात्र 5 से 7 बार प्रति मिनट रह जाती है। इससे आंसू तेजी से सूखने लगते हैं। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंसुओं को और तेजी से सुखाती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने से आंखों की सतह सूख जाती है और ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या जन्म ले लेती है।

मुख्य लक्षण

ड्राई आई सिंड्रोम के सामान्य लक्षण

आंखों में लगातार जलन, चुभन या सूखापन महसूस होना
आंखें लाल हो जाना
आंखों में भारीपन या थकान
स्क्रीन देखते समय अचानक धुंधलापन छा जाना
आंखों में रेत जैसे कण महसूस होना
हल्का सिरदर्द और गर्दन-कंधे में दर्द
रोशनी में असहजता महसूस करना

ये लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं, लेकिन अनदेखा करने पर गंभीर रूप ले सकते हैं।

बच्चों और युवाओं में बढ़ती चिंता

आजकल बच्चों का स्क्रीन टाइम सबसे ज्यादा बढ़ गया है। पढ़ाई, मनोरंजन, गेमिंग सब स्क्रीन पर निर्भर है। मोबाइल देखते हुए खाना खाने की आदत न केवल आंखों को नुकसान पहुंचाती है बल्कि पाचन और समग्र विकास पर भी बुरा असर डालती है। ज्यादा स्क्रीन टाइम से मेयोपिया यानी निकट दृष्टिदोष की समस्या भी तेजी से बढ़ रही है।

बचाव के उपाय

 20-20-20 नियम अपनाएं

हर 20 मिनट काम के बाद 20 सेकंड का ब्रेक लें और कम से कम 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। यह नियम आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है और फोकस बदलने से पलक झपकने की प्रक्रिया सुधरती है।

 जानबूझकर पलकें झपकाएं

स्क्रीन देखते समय खुद को याद दिलाएं कि पलकें झपकाते रहें। इसके लिए फोन में रिमाइंडर सेट कर सकते हैं।

स्क्रीन सेटिंग्स सुधारें ब्राइटनेस को कम रखें

ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड ऑन रखें
फॉन्ट साइज बढ़ाकर पढ़ें
स्क्रीन को आंखों के स्तर से नीचे रखें

 रात का स्क्रीन टाइम कम करें

अंधेरे कमरे में मोबाइल इस्तेमाल बिल्कुल न करें। इससे आंखों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दें।

Dry Eye Syndrome

जीवनशैली में बदलाव

दिन में 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं
ओमेगा-3 युक्त भोजन (अखरोट, मछली, अलसी) लें
हरी सब्जियां, गाजर और मौसमी फल खाएं
एसी वाले कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें
रोज आउटडोर खेलकूद या वॉक पर समय निकालें

 आंखों के व्यायाम पामिंग

हथेलियों को रगड़कर गर्म करें और बंद आंखों पर रखें
आंखों को ऊपर-नीचे, बाएं-दाएं घुमाएं
पास और दूर की वस्तुओं पर फोकस बदलने का अभ्यास करें

 डॉक्टर से कब संपर्क करें?

अगर लक्षण लगातार बने रहें, आंखों में तेज जलन हो, दृष्टि धुंधली पड़ रही हो या रोशनी में परेशानी हो रही हो, तो तुरंत आई स्पेशलिस्ट से जांच कराएं। डॉक्टर आर्टिफिशियल टीयर्स, आई ड्रॉप्स या अन्य उपचार सुझा सकते हैं। स्वयं कोई भी आई ड्रॉप न डालें।

डिजिटल युग में संतुलन जरूरी

आज के समय में स्क्रीन से पूरी तरह दूर रहना संभव नहीं है, लेकिन संतुलित उपयोग जरूर संभव है। काम के दौरान नियमित ब्रेक लें, परिवार के साथ स्क्रीन-फ्री समय बिताएं और बच्चों को भी आउटडोर एक्टिविटीज के लिए प्रोत्साहित करें। ड्राई आई सिंड्रोम केवल असुविधा नहीं है। अगर समय रहते ध्यान न दिया गया तो यह आंखों की स्थायी क्षति का कारण बन सकती है, इसलिए आज से ही अपनी और अपने परिवार की आंखों की देखभाल शुरू करें।

 

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