
मुरादाबाद। समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद जावेद अली खान एक बार फिर अपने बयान की वजह से सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने मुरादाबाद दौरे के दौरान मुस्लिम कार्यकर्ताओं को एक खास रणनीतिक सलाह दी, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। जावेद अली खान ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में कहा कि, अगर सच में भाजपा को सत्ता से बाहर करना है तो केवल मुस्लिम एकजुटता से काम नहीं चलेगा।
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खान साहब का सपोर्ट करने वाले हो दोस्त
उन्होंने मुस्लिम साथियों से अपील करते हुए कहा कि हर मुस्लिम कार्यकर्ता को कम से कम चार ऐसे हिंदू दोस्त बनाने होंगे, जो उन पर पूरी तरह भरोसा करते हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि, मुस्लिम कार्यकर्ताओं का आपस में एकत्रित होना काफी नहीं है। केवल मुसलमान दोस्त बनाकर और निहत्थे होकर भाजपा से नहीं बचा जा सकता। जावेद अली खान ने कहा कि ऐसे हिंदू दोस्त बनाए जाएं जो सच्चे मन से भरोसा करें और कह सकें कि खान साहब या हुसैन साहब गलत नहीं कर रहे। जब आप देश की भलाई और समाज को जोड़ने की बात करेंगे और आपके पास ऐसे हिंदू दोस्त होंगे जो आपकी बात को आगे बढ़ाएंगे, उसी दिन भाजपा का अंत हो जाएगा।
बोले- विभाजन की खाई को पाटना है
उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों में भाजपा ने देश में ऐसा माहौल तैयार किया है जिसने बहुसंख्यक हिंदू समाज की सोच को प्रभावित किया है। भाजपा द्वारा फैलाए गए नैरेटिव का असर आम लोगों की मानसिकता पर गहरा पड़ा है, जिससे सामाजिक ताने-बाने में दूरियां आई हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत आरोप नहीं लगा रहे, बल्कि एक राजनीतिक नैरेटिव की बात कर रहे हैं जिसने समाज में विभाजन बढ़ावा दिया है। इस विभाजन को पाटने का सबसे कारगर तरीका अलग-अलग समुदायों के बीच व्यक्तिगत स्तर पर विश्वास और दोस्ती का रिश्ता कायम करना है।
हिन्दू आबादी के बीच भी जाएगी
सपा सांसद ने पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति का भी खुलासा किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी उन इलाकों में भी अपने संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देगी जहां अल्पसंख्यक आबादी बेहद कम है और हिंदू बहुल समाज निवास करता है। ऐसे क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं को विशेष मेहनत करनी होगी और हिंदू समाज के लोगों के बीच जाकर पार्टी की नीतियों व विचारधारा को स्पष्ट रूप से रखना होगा। इसके लिए मुस्लिम कार्यकर्ताओं को अपने हिंदू पड़ोसियों, सहकर्मियों और परिचितों के साथ विश्वास का रिश्ता बनाना जरूरी है। जब आपसी भरोसा कायम हो जाएगा तभी राजनीतिक संवाद प्रभावी होगा।
पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान
यह पहली बार नहीं है जब जावेद अली खान अपने आक्रामक और तीखे बयानों की वजह से चर्चा में आए हैं। इससे पहले साल 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के ठीक बाद, संभल में सपा के तत्कालीन सांसद डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क मतगणना स्थल के पास पहुंचे थे। वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सपा नेताओं की पुलिस प्रशासन से तीखी बहस हो गई थी। इस दौरान जावेद अली खान ने ऑन-कैमरा वहां मौजूद एक पुलिस इंस्पेक्टर को सरेआम बेहद आक्रामक लहजे में हड़काते हुए कहा था, अपनी हद में रहो, वरना ठीक कर दिए जाओगे। इस घटना का वीडियो काफी वायरल हुआ था और उस समय सपा तथा प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया था।
इसी तरह साल 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों को लेकर जब राज्यसभा में विपक्ष ने भारी हंगामा किया था, तब कई विपक्षी सांसदों को निलंबित भी किया गया था। इस विवाद में जावेद अली खान ने संसद के भीतर और मीडिया के सामने बेहद तीखे तेवर दिखाए थे।
उन्होंने राज्यसभा के आसन और संसद के मार्शलों पर पक्षपात करने तथा विपक्षी सांसदों के साथ बदसलूकी करने का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि, कोरोना काल के नियमों की धज्जियां खुद मार्शलों ने उड़ाईं, लेकिन दोष केवल विपक्ष के सिर मढ़ा जा रहा है। इन घटनाओं ने जावेद अली खान को एक सख्त और बिना लाग-लपेट वाली छवि दी है, जो उनके समर्थकों को पसंद आती है लेकिन विरोधियों द्वारा अक्सर आलोचना का विषय बनती है।
राजनीतिक हलचल तेज
जावेद अली खान के हालिया बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बहस छिड़ गई है। विरोधी दलों ने इस बयान को अपने-अपने नजरिए से व्याख्यायित किया है, जहां कुछ लोग इसे सामाजिक एकता की दिशा में एक सकारात्मक संदेश मान रहे हैं, वहीं कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान चुनावी दृष्टि से एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा नेताओं ने इसे साम्प्रदायिक एंगल देने की कोशिश की है और कहा है कि सपा मुस्लिम वोट बैंक को मजबूत करने के बाद अब हिंदू समाज में घुसपैठ की रणनीति बना रही है।
वहीं सपा कार्यकर्ता इसे सामाजिक सद्भाव और व्यापक गठबंधन की दिशा में एक व्यावहारिक कदम बता रहे हैं। बहरहाल, जावेद अली खान के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि, समाजवादी पार्टी आने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर न केवल अपने परंपरागत वोट बैंक पर निर्भर रहना चाहती है, बल्कि व्यापक सामाजिक गठजोड़ बनाकर भाजपा को चुनौती देने की तैयारी में जुटी है।
हिन्दू बहुल सीटों पर पैठ बनाने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि, मुस्लिम-हिंदू व्यक्तिगत संबंधों पर जोर देकर सपा हिंदू बहुल सीटों पर अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी का मानना है कि पोलराइज्ड वोटिंग के माहौल में भी अगर स्थानीय स्तर पर विश्वास बनाया जाए तो नतीजे बदल सकते हैं। जावेद अली खान का बयान इसी रणनीति का हिस्सा लगता है।
जावेद अली खान का यह बयान यूपी की सियासत में नई बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है। एक तरफ जहां यह बयान सामाजिक एकता का संदेश देता दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ उनके पुराने विवादास्पद बयानों और आक्रामक अंदाज के कारण इसे शक की नजर से भी देखा जा रहा है।
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