
अयोध्या। राम मंदिर निर्माण को लेकर लगातार चर्चा में रहने वाले राम जन्मभूमि परिसर में अब चढ़ावा चोरी का विवाद गहराता जा रहा है। रविवार को मंदिर निर्माण समिति की तीन दिवसीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने इस मामले पर खुलकर बात की। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था में सुधार की बात कही और प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की तारीफ की। नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि, सरकार ने मंदिर ट्रस्ट की मांग के महज 24 घंटे के अंदर ही एसआईटी का गठन कर दिया, जो बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट अपनी व्यवस्था में जरूरी सुधार करेगा।
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15 दिन में देगी पूरी रिपोर्ट
प्रदेश सरकार ने राम मंदिर में चढ़ावे की राशि गायब होने के आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

एसआईटी आज सोमवार को अयोध्या पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर देगी। अधिकारियों का कहना है कि, टीम एक सप्ताह में प्रारंभिक रिपोर्ट और 15 दिनों के अंदर पूरी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। जांच टीम में सीबीआई, वित्त और प्रशासनिक अनुभव वाले वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए गए हैं।
नृपेंद्र मिश्र ने सरकार को दी क्लीन चिट
शनिवार को नृपेंद्र मिश्र ने इस मामले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया था और खुद को केवल मंदिर निर्माण तक सीमित बताया था, लेकिन रविवार को उन्होंने प्रदेश सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार की तेजी से कार्रवाई से पता चलता है कि वह मामले को गंभीरता से ले रही है।
गरमाई यूपी की सियासत
राम मंदिर चढ़ावा विवाद अब पूरी तरह से सियासी रंग ले चुका है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। आगरा में एक कार्यक्रम के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि सनातन धर्म के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी की जांच अब अधिकारी करेंगे। अखिलेश ने कहा, प्रभु श्रीराम के चढ़ावे में कोई गड़बड़ी हुई है, तो आपस में बैठकर बात कर लीजिए। कैमरा और आंखें बंद करके जो चोरी हुई है, उसे वापस कर दीजिए। प्रभु श्रीराम कुछ नहीं बोलेंगे। उन्होंने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया।
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि, राम मंदिर में लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने दो-तीन दिनों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मुद्दे पर विस्तार से बात करने की जानकारी दी। पवन खेड़ा ने कहा कि, पूरा देश इस मामले को देख रहा है और देश इसकी माफी नहीं देगा।
विनय कटियार का बड़ा बयान
बीजेपी के पूर्व सांसद और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे विनय कटियार ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में जितने भी लोग हैं, सबके सब चोर हैं।

कटियार ने मांग की कि सभी को हटाया जाए। उन्होंने कहा, ये सब या तो भाग जाएंगे या जेल जाएंगे। कटियार ने यह भी सवाल उठाया कि, गोपाल राव को ट्रस्ट में किसने भेजा था और राम मंदिर के दान में कितने करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है, यह जांच में सामने आएगा।
अवधेश प्रसाद ने की सख्त कार्रवाई की मां
अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने सरकार द्वारा गठित एसआईटी पर भरोसा जताने से इनकार कर दिया। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र समिति से कराई जाए। साथ ही उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग भी की। अवधेश प्रसाद ने कुछ गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, चढ़ावे की रकम को गोबर और घूर के गड्ढों में छिपाने जैसी सूचनाएं भी सामने आ रही हैं। उन्होंने सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
क्या है पूरी विवाद
राम मंदिर में चढ़ावे की राशि गायब होने का आरोप सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लगाया था। उनके आरोप के बाद यूपी की राजनीति गरमा गई। लाखों भक्तों द्वारा राम मंदिर में चढ़ाए गए नोट, सोना-चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं की गिनती, सुरक्षा और हिसाब-किताब को लेकर सवाल उठने लगे। राम मंदिर ट्रस्ट पहले ही कई बार आय-व्यय के लेखा-जोखा को लेकर सवालों का सामना कर चुका है। इस बार चढ़ावा चोरी का आरोप इतना गंभीर है कि प्रदेश सरकार को एसआईटी गठित करनी पड़ी।
क्या कहते हैं धार्मिक जानकार
धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि, राम मंदिर देश की आस्था का केंद्र है। यहां होने वाली किसी भी अनियमितता से न सिर्फ लाखों भक्तों की भावनाएं आहत होती हैं, बल्कि पूरे सनातन धर्म की छवि पर भी असर पड़ता है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।
आगे क्या होगा?
एसआईटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी। अगर गड़बड़ी साबित होती है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही मंदिर ट्रस्ट की व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जाएं।

राम मंदिर न सिर्फ हिंदू समाज की आस्था का प्रतीक है, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी है। ऐसे में चढ़ावे की राशि की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना हर स्तर पर जरूरी है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
राम मंदिर चढ़ावा विवाद फिलहाल पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन चुका है। एक तरफ सरकार तेजी से जांच कर रही है तो दूसरी तरफ विपक्ष इसे सनातन धर्म पर हमला बता रहा है। एसआईटी की जांच का नतीजा आने के बाद ही यह तय होगा कि, मामला कितना गंभीर है और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार है। अभी पूरा देश इस जांच की ओर देख रहा है कि, राम मंदिर जैसी पवित्र जगह पर हुई किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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