‘लव जिहाद व लैंड जिहाद’ पर सीएम योगी का बड़ा प्रहार, खर-दूषण और ताड़का से की तुलना

लखनऊ। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा महोत्सव के समापन समारोह के दौरान समसामयिक और राष्ट्रहित के मुद्दों पर अत्यंत मुखर होकर अपने विचार व्यक्त किए। तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा वाचित इस रामकथा के समापन पर सीएम योगी ने न केवल प्रभु श्रीराम के आदर्शों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक ताने-बाने और सांस्कृतिक पहचान पर चोट करने वाली ताकतों को भी कड़ा संदेश दिया।

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भारत धर्मशाला नहीं

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट और दो-टूक शब्दों में कहा कि, जिन लोगों के मन में भारत के प्रति आस्था, निष्ठा और इसके संस्कारों के लिए सम्मान नहीं है, उनके लिए भारत की धरती कोई धर्मशाला नहीं हो सकती। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि, जो कोई भी प्रभु श्रीराम या इस राष्ट्र की मूल आत्मा से द्रोह करेगा, उसे इस धरती पर कभी जगह नहीं मिलेगी। इतिहास गवाह है कि रामायण काल में भी रामद्रोहियों का अंत अत्यंत वीभत्स रहा है।

देश की तोड़ने में लगी हैं नकारात्मक ताकतें

सीएम ने समाज को आगाह करते हुए कहा कि, आज देश को तोड़ने वाली नकारात्मक ताकतें सक्रिय हैं। ये ताकतें आम जनता को जाति, भाषा, क्षेत्र और संप्रदाय के नाम पर विभाजित करने की लगातार चेष्टा कर रही हैं। ऐसे समय में देश की संत शक्ति ही समाज को एकजुट करने और राष्ट्र को प्रगति के पथ पर ले जाने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने जनता से अपील की कि व्यासपीठ द्वारा समझाए गए जीवन के मर्म को केवल सुना न जाए, बल्कि उसे अपने आचरण में अंगीकार किया जाए।

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मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में वर्तमान समय की दो बड़ी चुनौतियों ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ का विशेष रूप से उल्लेख किया और इनके विरुद्ध समाज को एकजुट होने का आह्वान किया। सीएम ने कहा कि, रावण द्वारा माता सीता के हरण के बाद प्रभु श्रीराम ने उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़कर जो संघर्ष किया, वह नारी गरिमा की रक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण है। यही आदर्श आज हमें ‘लव जिहाद’ जैसी कुप्रथाओं को रोकने की प्रेरणा देता है।

केरल हाईकोर्ट एक फैसले का किया जिक्र 

केरल उच्च न्यायालय ने 2009 और 2011 में धार्मिक जनसांख्यिकी को बदलने की गहरी साजिश पर चिंता व्यक्त की थी, लेकिन तत्कालीन व्यवस्थाओं ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उत्तर प्रदेश सरकार ने 2020 में इसके खिलाफ सख्त कानून बनाया, परंतु इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए अब भी व्यापक जन-जागरूकता की आवश्यकता है।

रामायण काल से की लैंड जिहाद की तुलना

सीएम योगी ने लैंड जिहाद की तुलना रामायण काल के राक्षसों की गतिविधियों से की। उन्होंने कहा कि मारीच, सुबाहु और खर-दूषण जैसे राक्षस वास्तव में उस दौर में ‘लैंड जिहाद’ से ही जुड़े थे, जो ऋषियों-मुनियों की जमीनों और बस्तर के वनों पर जबरन कब्जा कर रहे थे।

उन्होंने कड़े शब्दों में कहा किसी भी सरकारी या निजी खाली जमीन पर अवैध रूप से तंबू गाड़ने की प्रथा को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब भी नकारात्मक ताकतें वर्चस्व में आती हैं, वे शिक्षण संस्थानों और शोध केंद्रों को वैसे ही बंजर कर देती हैं, जैसे ताड़का और खर-दूषण ने किया था। उन्होंने कहा, समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर इन भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहना होगा।

मुख्यमंत्री ने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के इतिहास को याद करते हुए कहा कि संतों ने इस आंदोलन को अपने जीवन-मरण का प्रश्न बनाया था। संत समाज इस ऐतिहासिक कार्य का श्रेय स्वयं नहीं चाहता था, वे केवल इसलिए जुड़े क्योंकि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भारतीय परंपरा और विरासत में हर नागरिक के आदर्श हैं।

जिनका डीएनए भारत का है, वे राम को पूजते हैं

उन्होंने कहा कि राजनीति और पूर्वाग्रह से ग्रसित कुछ चुनिंदा लोगों को छोड़ दिया जाए, तो हर वह व्यक्ति जिसके भीतर भारत का डीएनए है, वह भगवान राम को पूजता है। राम का नाम उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोने की ताकत रखता है।

वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि, अदालत की फुल बेंच ने माना कि जहां रामलला विराजमान हैं, वही रामजन्मभूमि है। उन्होंने एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अदालत के एक न्यायमूर्ति ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के साक्ष्यों और वक्तव्यों को सुनकर स्वयं स्वीकार किया था कि, सनातन धर्मावलंबियों के साथ सैकड़ों वर्षों से अन्याय हो रहा था।

मारीच और शकुनि का दिया उदाहरण

अपने संबोधन के दौरान सीएम योगी ने रामायण के मारीच और महाभारत के शकुनि का उदाहरण देते हुए समाज में मौजूद कुसंगति पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि, मारीच रिश्ते में रावण का मामा लगता था। जब रावण ने सीता हरण की योजना बनाई, तो पहले मारीच ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन रावण की धमकियों के आगे उसने कुसंग का साथ दिया।

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इसी प्रकार, दुर्योधन के मामा शकुनि ने अपनी कुटिल बुद्धि से महाभारत का विनाशकारी युद्ध करवा दिया। सीएम ने कहा कि जब भी मामा या चाचा अनुचित व्यवस्थाओं और अनैतिक कार्यों में संलिप्त होते हैं, तो वे समाज को सन्मार्ग की बजाय विनाश और कुसंग की तरफ ही ले जाते हैं।

गोस्वामी तुलसीदास का किया जिक्र 

गोरक्षपीठाधीश्वर ने संतों की साधना को राष्ट्र कल्याण और लोकमंगल के लिए समर्पित बताया। उन्होंने स्वामी रामभद्राचार्य जी की सराहना करते हुए कहा कि इस आयु में भी वे विश्राम करने के बजाय निरंतर प्रभु की कथा को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने चित्रकूट में देश का पहला दिव्यांग विश्वविद्यालय स्थापित किया और आज भी उसके कुलाधिपति के रूप में समाज के वंचित वर्ग को दिशा दे रहे हैं।

उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि मध्यकाल में जिस प्रकार गोस्वामी तुलसीदास जी ने विदेशी आक्रांताओं के दौर में रामचरितमानस के माध्यम से उत्तर भारत को एकता के सूत्र में बांधा था, ठीक वही कार्य आज तुलसीपीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य जी कर रहे हैं।

 

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